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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा: कैदी भी मानव होता है, उससे पशुओं जैसा व्यवहार सही नहीं
Fri, 02 Jul 2021 01:05 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 02 Jul 2021 01:05 AM IST
सार
पंजाब की जेलों में बंद सात गैंगस्टरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने जेल में एकांतवास पर रखे जाने के आदेश पर आपत्ति जताई औऱ हाईकोर्ट से गुहार लगाई। कोर्ट ने भी पंजाब सरकार के इस फैसले को खारिज कर दिया।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब की जेल में बंद गैंगस्टरों द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें 22 घंटे एकांतवास में रखने के राज्य सरकार के आदेश को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि कैदी भी मानव होता है, उससे पशुओं जैसा व्यवहार सही नहीं है। उन्हें जेल में कैसे रखा जाए इसके लिए सुझाव देने की बात कहते हुए सुनवाई 19 जुलाई तक स्थगित कर दी।
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कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा देओल, बलजिंदर सिंह बिल्ला, राजिया, गुरप्रीत सिंह सेखों, चंदन, रमनदीप सिंह रम्मी और तजिंदर सिंह तेजा द्वारा दायर याचिका में जेल में अमानवीय व्यवहार होने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि गैंगेस्टर का ठप्पा लगाकर याचिकाकर्ताओं को बठिंडा जेल में एकत्रित किया जा रहा है और उन्हें अनहोनी की आशंका है। पुलिस उनके एनकाउंटर की साजिश रच रही है और उनकी जान को खतरा है। जब से उन्हें बठिंडा जेल लाया गया हर दिन 22 घंटे अंधेरे कमरे में बिना पानी, साफ हवा व अन्य मूल सुविधाओं के रखा जाता है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर होने के बावजूद कैदियों को जेल में 22 घटे तक एकांत में रखना सजा के भीतर सजा देने जैसा है। कैदी होने के साथ ही वे इंसान भी हैं। अदालतें कैदियों की स्वतंत्रता को सीमित करती हैं लेकिन उनका यह भी कर्तव्य है कि वे कैदियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में कार्य करें, जिसका एक कैदी भी हकदार है।
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सजा के पुनर्वास पहलू को खारिज करता है अमानवीय व्यवहार
अमानवीय व्यवहार सजा के पुनर्वास पहलू को पूरी तरह से खारिज करता है, जो हर विकसित समाज में सजा के दर्शन का प्रमुख घटक है। हाईकोर्ट ने एकांतवास आदेश को खारिज करते हुए पंजाब सरकार को आदेश दिया कि जेल प्रबंधन यह तय करे कि जेल में गैंगस्टरों को कैसे रखा जाए, जिससे टकराव न हो। कोर्ट ने कहा कि इन्हें गुट के अनुसार अलग-अलग बैरक में रख सकते हैं। हाईकोर्ट ने सरकार 19 जुलाई तक इसके लिए सुझाव तैयार कर हाईकोर्ट को इसकी जानकारी देने का आदेश दिया है।