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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab and Haryana High Court refuses to interfere in formation of Mohali De-Limitation Board

मोहाली डी-लिमिटेशन बोर्ड गठन में दखल से हाईकोर्ट का इनकार, चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Thu, 04 Feb 2021 11:29 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 04 Feb 2021 11:29 AM IST
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Punjab and Haryana High Court refuses to interfere in formation of Mohali De-Limitation Board
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

मोहाली डी-लिमिटेशन बोर्ड का गठन करते हुए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को शामिल न करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रशासनिक निर्णय है और ऐसे में इसमें कोर्ट के दखल की संभावना बहुत कम रह जाती है। 

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गुरमुख सिंह सोहल ने हाईकोर्ट के सामने मोहाली के डी-लिमिटेशन बोर्ड के गठन की 31 जुलाई, 2020 की नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि नियमों के अनुसार बोर्ड के गठन के वक्त इसके सदस्यों के रूप में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को शामिल किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही पांच पार्षदों को एसोसिएट के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था जो नहीं किया गया। 
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याची ने कहा कि इस प्रकार डी-लिमिटेशन के दौरान नगर निगम को इससे दूर रखना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। बोर्ड का गठन करते हुए सत्ता में मौजूद लोगों का ध्यान रखा गया है। इसके साथ ही एक सदस्य तो ऐसा भी है जिसके खिलाफ हत्या के आरोप में ट्रायल लंबित है। 


याची ने बताया कि कुलजीत सिंह बेदी वर्तमान सत्तासीन सरकार में शामिल हैं जबकि अमरजीत सिंह वर्तमान कैबिनेट मंत्री के भाई हैं और उन पर चंडीगढ़ में 2020 में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में ट्रायल अभी तक लंबित है। याची ने हाईकोर्ट से डी लिमिटेशन बोर्ड को पुनर्गठित करने की मांग की थी। 

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रशासनिक निर्णय में अदालतों के दखल की संभावना कम ही होती है। ऐसा तभी होता है जब निर्णय पूर्ण रूप से दोष से युक्त हो या फिर यह संविधान के खिलाफ जाकर किया गया हो। इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है और ऐसे में अदालत इस मामले में दखल देना नहीं चाहती।

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