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Chandigarh: दिव्यांगों के लिए फ्रेंडली नहीं है चंडीगढ़, सार्वजनिक जगहों पर नहीं मिलती कोई सुविधा  

Sat, 18 Jun 2022 04:00 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 18 Jun 2022 04:00 PM IST
सार

दिव्यांग बिना किसी की मदद के अपना हर काम कर सकें, इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कई बार सार्वजनिक स्थलों पर रैंप बनाए जाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन असलियत में ऐसा कुछ होता नहीं है। 

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Public places lack necessary facilities for disabled in Chandigarh 
चंडीगढ़ में दिव्यांगों के लिए नहीं बने रैंप। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विकलांगों को सम्मान देने के लिए दिव्यांग कहना भले शुरू कर दिया गया है, लेकिन इससे उनकी समस्याओं में कोई कमी नहीं आई है। चंडीगढ़ के दिव्यांगों को घर से बाहर निकलते ही हर कदम पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पार्क, मार्केट, डिस्पेंसरी, सरकारी दफ्तर समेत अधिकतर सार्वजनिक जगहों पर दिव्यांगों के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि स्मार्ट सिटी दिव्यांगों के लिए फ्रेंडली नहीं है।

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हाईवे किनारे शराब बंद कराने और दिव्यांगों की तकलीफों के मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाले दिव्यांग हरमन सिद्धू ने बताया कि चंडीगढ़ में घर से बाहर निकलते ही दिव्यांगों के लिए समस्याओं का दौर शुरू हो जाता है। अगर कोई दिव्यांग पार्क में जाना चाहे, तो उसके लिए जगह नहीं है। मार्केट में सीढ़ियां हैं।
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उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में गए लेकिन वहां देखकर हैरान रह गए कि कोर्ट रूम के अंदर जाने के लिए भी सीढ़ियां थीं। कहा कि दिव्यांगों को आ रही समस्याओं को लेकर वह कुछ दिन पहले नगर निगम की आयुक्त से भी मिले। कहा कि नगर निगम इमारत के अंदर जाने में भी उन्हें समस्या आई। लिफ्ट तक पहुंचने के लिए कुछ सीढ़ियां थीं, लोगों ने मदद की तो वह वहां पहुंचे। अगर निगम में रैंप है, उसका बोर्ड होना चाहिए। शहर की विभिन्न डिस्पेंसरियां में भी यही आलम है। उन्होंने कहा कि लोगों को भी दिव्यांगों के बारे में सोचना चाहिए और उनके लिए मार्क जगह को छोड़ देना चाहिए।

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लेबर कोर्ट में न रैंप, न लिफ्ट...पहले फ्लोर पर होती है सुनवाई

निट्टर के लॉ अफसर जसपाल सिंह ने बताया कि वह शहर के दो क्लीनिक लैब में गए, वहां व्हील चेयर की सुविधा नहीं थी। यह समस्या लगभग हर जगह है। उन्होंने बताया कि लेबर कोर्ट में काफी मजदूर आते हैं, जो दिव्यांग होते हैं। वहां पर सुनवाई पहले फ्लोर पर होती है लेकिन न तो कोई रैंप है, न लिफ्ट है। सिर्फ सीढ़ियां हैं। ऐसे में उनके सामने बहुत बड़ी समस्या होती है कि वह पहले फ्लोर तक कैसे पहुंचे। प्रशासन को इस बारे में सोचना चाहिए और व्यवस्था करनी चाहिए। 

दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल सिर्फ विशेष दिन पर ही क्यों

प्रशासन को दिव्यांगों की सुविधा का ख्याल सिर्फ विशेष दिन पर ही आता है। यही कारण है कि प्रशासन चुनाव के दौरान वोट डलवाने के लिए दिव्यांगों को मतदान केंद्र स्थल पर रैंप बनाने के आदेश संबंधितों को जारी कर देता है लेकिन दिव्यांग पूरे साल भर कितने सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थलों पर रैंप न होने से परेशान होता है, इसे कोई नहीं देखता है। ये हालत तब है, जब पीडब्ल्यूडी अधिनियम 1995 में ही बन गया था और 7 फरवरी 1996 से लागू कर दिया गया। इसमें दिव्यांग लोगों के लिए समान अवसर और राष्ट्र के निर्माण में उनकी पूर्ण भागीदारी की बात कही गई है।

दिव्यांगों को आने वाली मुख्य समस्याएं

  • पार्क के अंदर जाने की सुविधा नहीं
  • कुछ मार्केटों में दिव्यांगों के लिए पार्किंग की जगह है, लेकिन वहां दूसरे लोग गाड़ी कर जाते हैं
  • सड़क पास करना बहुत मुश्किल है
  • मार्केट, डिस्पेंसरी, एटीएम व सरकारी इमारतों में जाने पर भी कठिनाई
  • पैदल चलने की जगह लोग खड़ी कर जाते हैं लोग

 

दिव्यांगों के लिए इमारत व सभी जगहें फ्रेंडली होनी चाहिए। चंडीगढ़ में कई इमारतों में रैंप है ताकि दिव्यांगों को कोई समस्या न आए। फिर भी अगर किसी इमारत में दिव्यांगों को समस्या आ रही है तो दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।  - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक

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