फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   PU scientist discovered technology to make fertilizer from biodegradable waste, got patent

Chandigarh News: पीयू के वैज्ञानिक ने बायोडिग्रेडेबल वेस्ट से उर्वरक बनाने की तकनीक तलाशी, मिला पेटेंट

Thu, 23 May 2024 05:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 May 2024 05:41 AM IST
विज्ञापन
PU scientist discovered technology to make fertilizer from biodegradable waste, got patent
चंडीगढ़। पीयू के कीटाणु विज्ञान (माइक्रोबायोलॉजी) विभाग के विशेषज्ञ प्रो. संजीव कुमार सोनी ने माइक्रोबियल इनोक्यूलेंट तैयार करने के लिए स्वदेशी विधि विकसित की है। इसमें जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट (बायोडिग्रेडेबलो वेस्ट) से उर्वरक तैयार करने के साथ ही पर्यावरण और भूमि प्रदूषण जैसी स्थिति से शत प्रतिशत बचाव संभव हो सकता है। इस तकनीक के लिए उन्हें भारत सरकार से पेटेंट मिला है। यह शोध कार्य प्रो. संजीव के मार्गदर्शन में शोध छात्र अपूर्व शर्मा और रमन सोनी ने किया है।
विज्ञापन


प्रो. संजीव ने बताया कि जैवनिम्नीकरणीय ऐसे अपशिष्ट पदार्थ हैं जो प्राकृतिक कारकों जैसे कि सूक्ष्म जीवों (जैसे बैक्टीरिया, कवक आदि) और अजैविक तत्वों जैसे कि तापमान, यूवी, ऑक्सीजन द्वारा विघटित हो सकते हैं। ऐसे अपशिष्ट पदार्थ के कुछ उदाहरण खाद्य पदार्थ, रसोई के अपशिष्ट और अन्य प्राकृतिक अपशिष्ट हैं। ये डंप कूड़े के निचले स्तर में होते हैं, जहां हवा नहीं जाती। इससे जहरीली गैस निकलती है जो पर्यावरण को प्रदूषित करती है। वहीं, कूड़े से मिट्टी में रिसकर जाने वाला पदार्थ मिट्टी को भी लगातार प्रदूषित करता है। इन दोनों स्थितियों से बचाव में नई तकनीक से काफी लाभ मिल सकता है।
विज्ञापन

प्रो. संजीव ने बताया कि मौजूदा समय में अलग-अलग उर्वरक 250 से 500 रुपये प्रति लीटर की देर से बेचे जा रहे हैं, जबकि इस तकनीक से उर्वरक तैयार कर अगर 100 रुपये प्रति लीटर भी बिक्री की गई तो साल के 330 दिनों में ही 8.5 करोड़ आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, इसके लिए प्लॉट लगाने पर एक बार का कुल आर्थिक व्यय चार करोड़ रुपये होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक टन कूड़े से 25 लीटर उर्वरक
इस तकनीक के तहत जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट में एस्परगिलस नाइजर एस-30 और क्लेबसिएला न्यूमोनिया एपी-407 सहित सूक्ष्म जीवों के एक संघ का उपयोग किया जाता है। क्लेबसिएला न्यूमोनिया एपी-407 नाइट्रोजन निर्धारण, फास्फोरस घुलनशीलता, पोटेशियम संचलन और पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले यौगिकों को मिलाकर यह उर्वरक तैयार किया जाता है। इससे प्रतिदिन एक टन जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट से 25 लीटर उर्वरक तैयार किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article