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पीयू के रोज गार्डन पर भी दीमक का हमला, दर्जनों पौधे सूखे
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चंडीगढ़। अब पीयू के रोज गार्डन के गुलाबों का जीवन संकट में है। यहां दीमक ने धावा बोल दिया है। इस वजह से दर्जनों पेड़ सूख गए हैं। साथ ही फूल भी कई पौधों के मुरझा गए हैं। यही हाल रहा तो इस बार रोज फेस्टिवल पर संकट खड़ा होगा। बताया जाता है कि उद्यान विभाग हर साल लाखों रुपये फूलों पर खर्च करता है लेकिन यहां के गुलाब सूख रहे हैं। गुलाब के पौधे भी खत्म हो रहे हैं।
पीयू के रोज गार्डन में 30 से अधिक गुलाबों की प्रजातियां हैं। चार साल पहले तक यह गार्डन हमेशा गुलाबों से गुलजार नजर आता था। आलम यह है कि यहां लगे दो हजार से अधिक पौधों में से 60 फीसदी को दीमक ने अपने कब्जे में ले लिया है। पौधों के ऊपर तक मिट्टी चढ़ गई है। इसके कारण फूल ही नहीं सूखे, पूरे पौधे ही खत्म हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर पीयू का उद्यान विभाग सो रहा है। हैरत तो इस बात की है कि हर साल लाखों रुपये इस पर खर्च भी होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी गुलाब के पौधे क्यों सूख रहे हैं?
मालूम हो कि हर साल पीयू की ओर से रोज फेस्टिवल कराया जाता है। यह तीन दिन चलता है। लाखों लोग इस फेस्टिवल से जुड़ते हैं। बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। ऐसे में यदि रोज गार्डन सूख गया तो फेस्टिवल किस काम आएगा? हालांकि अलग से पौधे गमलों में उद्यान विभाग तैयार करता है, लेकिन वह पौधे फेस्टिवल के बाद कहां लगाए जा रहे हैं, इसकी किसी को खबर नहीं है।
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पीयू के रोज गार्डन में 30 से अधिक गुलाबों की प्रजातियां हैं। चार साल पहले तक यह गार्डन हमेशा गुलाबों से गुलजार नजर आता था। आलम यह है कि यहां लगे दो हजार से अधिक पौधों में से 60 फीसदी को दीमक ने अपने कब्जे में ले लिया है। पौधों के ऊपर तक मिट्टी चढ़ गई है। इसके कारण फूल ही नहीं सूखे, पूरे पौधे ही खत्म हो गए हैं। वहीं दूसरी ओर पीयू का उद्यान विभाग सो रहा है। हैरत तो इस बात की है कि हर साल लाखों रुपये इस पर खर्च भी होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी गुलाब के पौधे क्यों सूख रहे हैं?
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मालूम हो कि हर साल पीयू की ओर से रोज फेस्टिवल कराया जाता है। यह तीन दिन चलता है। लाखों लोग इस फेस्टिवल से जुड़ते हैं। बच्चों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। ऐसे में यदि रोज गार्डन सूख गया तो फेस्टिवल किस काम आएगा? हालांकि अलग से पौधे गमलों में उद्यान विभाग तैयार करता है, लेकिन वह पौधे फेस्टिवल के बाद कहां लगाए जा रहे हैं, इसकी किसी को खबर नहीं है।
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