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पीयू : इस माह के अंत तक बदल सकते हैं डीयूआई, डीन रिसर्च व डीएसडब्ल्यू
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में इस माह के आखिर तक तीनों पदों पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। यह महत्वपूर्ण पद डीयूआई, डीन रिसर्च व डीएसडब्ल्यू के हैं। कुछ लोगों के नाम इन पदों के लिए सामने आए हैं तो कुछ ने अपनी सिफारिशें नेताओं आदि से लगवानी शुरू कर दी हैं, लेकिन यह साफ है कि दो पदों पर चयन वरिष्ठता के आधार पर ही होगा।
पीयू में वीसी के बाद सबसे बड़ा पद डीयूआई का होता है। इस पद पर वर्तमान में प्रो. वीआर सिन्हा हैं। उनका कार्यकाल इस माह के आखिर में पूरा होगा। उनका कार्यकाल बढ़ेगा या नहीं, इस पर संशय है। एक वर्ग ने उनके नाम पर विरोध दायर किया है। साथ ही कार्यप्रणाली सवाल खड़े किए हैं। हालांकि वह बेहतरीन वैज्ञानिक हैं, यह सभी जानते हैं। कुछ लोग उनका कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में भी है। यदि उनका कार्यकाल नहीं बढ़ेगा तो इस पद पर वरिष्ठता के मुताबिक डीन रिसर्च प्रो. एसके तोमर तैनात होंगे। उसके बाद डीन रिसर्च की जिम्मेदारी किसके पास आएगी, यह तय नहीं है। इसके लिए वरिष्ठता सूची खंगाली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि वीसी अपने विवेक के मुताबिक भी इस पद पर तैनाती कर सकते हैं। हालांकि पुटा ने इस पर पहले भी विरोध जताया है। जो भी शिक्षक डीन रिसर्च बनेगा, वह वरिष्ठता क्रम के मुताबिक ही आएगा।
डीएसडब्ल्यू के लिए कई की दावेदारी
इसी तरह प्रो. तोमर के पास डीएसडब्ल्यू का भी चार्ज है। यदि वह डीयूआई बनते हैं तो यह पद छोड़ना पड़ेगा जो खाली हो जाएगा। इस पद पर दावेदारी कई शिक्षक कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार इस पद पर कोई भी प्रोफेसर तैनात किया जा सकता है। उसके लिए वार्डन होना जरूरी नहीं होगा। यह पद छात्र कल्याण से जुड़ा है। ऐसे में छात्रों के करीब रहने वाले शिक्षक को इसका जिम्मा दिया जा सकता है। एडीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार को इस पद के लिए प्रमोशन मिल सकता है। उनके अलावा भी कई लोग लाइन में लगे हैं। कुछ वरिष्ठ शिक्षक भी चाहते हैं कि यह पद उनके पास आए। क्योंकि यह पद महत्वपूर्ण है जो कॅरिअर में भी काम आता है। मालूम हो कि इसी पद को लेकर मामला एक समय में हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
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पीयू को चाहिए स्थायी रजिस्ट्रार, डीसीडीसी
पंजाब विश्वविद्यालय को स्थायी रजिस्ट्रार, डीसीडीसी, परीक्षा नियंत्रक आदि की आवश्यकता है। इसके लिए मांग काफी समय पहले उठी थी। एक पूर्व सीनेटर ने भी मामला उठाया था जो चांसलर कार्यालय तक पहुंचा। सूत्रों का कहना है कि यदि इन पदों पर पीयू स्थायी नियुक्तियां करता है तो काम और बेहतर होगा। पीयू की साख और बढ़ सकती है। वर्तमान में जिन लोगों को इन पदों का जिम्मा दिया गया है वह अन्य कार्य भी कर रहे हैं। उन पर दबाव है।
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पीयू में वीसी के बाद सबसे बड़ा पद डीयूआई का होता है। इस पद पर वर्तमान में प्रो. वीआर सिन्हा हैं। उनका कार्यकाल इस माह के आखिर में पूरा होगा। उनका कार्यकाल बढ़ेगा या नहीं, इस पर संशय है। एक वर्ग ने उनके नाम पर विरोध दायर किया है। साथ ही कार्यप्रणाली सवाल खड़े किए हैं। हालांकि वह बेहतरीन वैज्ञानिक हैं, यह सभी जानते हैं। कुछ लोग उनका कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में भी है। यदि उनका कार्यकाल नहीं बढ़ेगा तो इस पद पर वरिष्ठता के मुताबिक डीन रिसर्च प्रो. एसके तोमर तैनात होंगे। उसके बाद डीन रिसर्च की जिम्मेदारी किसके पास आएगी, यह तय नहीं है। इसके लिए वरिष्ठता सूची खंगाली जा रही है। सूत्रों का कहना है कि वीसी अपने विवेक के मुताबिक भी इस पद पर तैनाती कर सकते हैं। हालांकि पुटा ने इस पर पहले भी विरोध जताया है। जो भी शिक्षक डीन रिसर्च बनेगा, वह वरिष्ठता क्रम के मुताबिक ही आएगा।
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डीएसडब्ल्यू के लिए कई की दावेदारी
इसी तरह प्रो. तोमर के पास डीएसडब्ल्यू का भी चार्ज है। यदि वह डीयूआई बनते हैं तो यह पद छोड़ना पड़ेगा जो खाली हो जाएगा। इस पद पर दावेदारी कई शिक्षक कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार इस पद पर कोई भी प्रोफेसर तैनात किया जा सकता है। उसके लिए वार्डन होना जरूरी नहीं होगा। यह पद छात्र कल्याण से जुड़ा है। ऐसे में छात्रों के करीब रहने वाले शिक्षक को इसका जिम्मा दिया जा सकता है। एडीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार को इस पद के लिए प्रमोशन मिल सकता है। उनके अलावा भी कई लोग लाइन में लगे हैं। कुछ वरिष्ठ शिक्षक भी चाहते हैं कि यह पद उनके पास आए। क्योंकि यह पद महत्वपूर्ण है जो कॅरिअर में भी काम आता है। मालूम हो कि इसी पद को लेकर मामला एक समय में हाईकोर्ट तक पहुंचा था।
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पीयू को चाहिए स्थायी रजिस्ट्रार, डीसीडीसी
पंजाब विश्वविद्यालय को स्थायी रजिस्ट्रार, डीसीडीसी, परीक्षा नियंत्रक आदि की आवश्यकता है। इसके लिए मांग काफी समय पहले उठी थी। एक पूर्व सीनेटर ने भी मामला उठाया था जो चांसलर कार्यालय तक पहुंचा। सूत्रों का कहना है कि यदि इन पदों पर पीयू स्थायी नियुक्तियां करता है तो काम और बेहतर होगा। पीयू की साख और बढ़ सकती है। वर्तमान में जिन लोगों को इन पदों का जिम्मा दिया गया है वह अन्य कार्य भी कर रहे हैं। उन पर दबाव है।