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पीयू के 11 संकायों को फरवरी में मिल सकते हैं डीन, होगा चुनाव

Tue, 18 Jan 2022 02:21 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 18 Jan 2022 02:21 AM IST
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PU departments will have better operation, 11 faculties may get deans in February
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय को फरवरी में 11 डीन मिल सकते हैं। इसकी तैयारियां चल रही हैं। सिंडिकेट के गठन के दौरान ही इसका भी चुनाव होगा। डीन के बिना विभागों का संचालन बेहतर नहीं हो पा रहा है। पाठ्यक्रम निर्धारण से लेकर तमाम कार्य गति नहीं पकड़ पा रहे हैं।
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पीयू की सीनेट बैठक में प्रस्ताव रखा गया था कि सिंडिकेट गठन से लेकर डीन, कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए। इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद से पीयू ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि फरवरी में पीयू को डीन मिल सकते हैं। यह डीन आर्ट, बिजनेस मैनेजमेंट, डेयरिंग एंड एनिमल हसबेंडरी, डिजाइन एंड फाइन आर्ट, एजुकेशन, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, लैंग्वेज, लॉ, मेडिकल साइंस, फार्मास्युटिकल साइंस, साइंस फैकल्टी के होंगे। इनके अलावा सचिव भी चुने जाएंगे। सीनेट व सिंडिकेट के सदस्य इनका चयन करते हैं। डीन के लिए काफी ताकत लगानी पड़ती है।
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पिछले डीन चुनाव में गोयल ग्रुप का दबदबा रहा है, क्योंकि सीनेट व सिंडिकेट में अधिकांश उनके सदस्य थे, लेकिन इस बार नजारा कुछ बदला हुआ है। माना जा रहा है कि वीसी ग्रुप इस बार डीन अपने चेहरों को बनाएगा। क्योंकि सीनेट में सदस्य उनके पास सर्वाधिक हैं। हालांकि गोयल ग्रुप की कसर नहीं छोड़ेगा। यह ग्रुप इंतजार कर रहा है कि उनका नोमिनेशन चांसलर कार्यालय से हो जाए। मालूम हो कि सिंडिकेट का चुनाव 15 दिसंबर 2019 को हुआ था। उसी दौरान डीन भी चुने गए थे।
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इनसेट---
उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट लागू होगी या नहीं
पीयू शासन सुधार के लिए चांसलर ने उच्चस्तरीय कमेटी गठित की थी। समिति ने दो माह में मंथन कर अपना प्रस्ताव चांसलर को सौंप दिया था। उसके बाद यह प्रस्ताव सीनेट के जरिए मंजूर होना था। पहली बैठक में इस प्रस्ताव को नहीं लाया गया। इसमें कानूनी पेंच देखे जा रहे हैं। इसी कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि डीन के चुनाव नहीं होने चाहिए। विभागों में जो सबसे वरिष्ठ शिक्षक हों उन्हें डीन बनाया जा सकता है। यह भी कहा था कि डीन शिक्षक ही होने चाहिए ताकि वह पीयू के अलावा अपने विभाग को बेहतर समझ सकें। अब यह तय नहीं हो पा रहा है कि समिति की ओर से सुझाए गए प्रस्ताव लागू होंगे या नहीं।
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