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देश के प्राइमरी हेल्थ केयर सिस्टम को सुधारना होगा : राजनाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:47 AM IST
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Home Minister Rajnath Singh at GMCH-32 Chandigarh
- फोटो : amar ujala
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गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच) के सिल्वर जुबली कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का प्राइमरी हेल्थ केयर सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है, इसलिए बड़े अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है।
भीड़ कम करनी है तो देश के प्राइमरी हेल्थ सिस्टम को सुधारना होगा। उन्होंने मेडिकल साइंस की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में पहुंचने वाले 95 फीसदी मरीज प्राइमरी हेल्थ सेंटर में ठीक हो सकते हैं।
प्राइमरी हेल्थ सिस्टम समय के साथ चले, सही ढंग से काम करें और उसमें डॉक्टर की उपलब्धता हो तो मरीजों को काफी फायदा पहुंचेगा। इस मौके पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन भी किया।
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भीड़ कम करनी है तो देश के प्राइमरी हेल्थ सिस्टम को सुधारना होगा। उन्होंने मेडिकल साइंस की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में पहुंचने वाले 95 फीसदी मरीज प्राइमरी हेल्थ सेंटर में ठीक हो सकते हैं।
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प्राइमरी हेल्थ सिस्टम समय के साथ चले, सही ढंग से काम करें और उसमें डॉक्टर की उपलब्धता हो तो मरीजों को काफी फायदा पहुंचेगा। इस मौके पर उन्होंने मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक का उद्घाटन भी किया।
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केंद्र सरकार सस्ता इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध
Home Minister Rajnath Singh and Administrator VP Singh Badnore with MP Kiran Kher
- फोटो : amar ujala
बड़े मन वाला ही अच्छा डाक्टर
गृहमंत्री ने कहा कि बड़े मन वाला ही अच्छा डॉक्टर होता है। डॉक्टर और मन के बीच एक रिश्ता है। छोटे मन वाला डॉक्टर कभी भी ईमानदारी व निष्ठा के साथ मरीज का इलाज नहीं करेगा। उससे इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि मरीज जीए या फिर मरे।
उसे मालूम है कि जो भी वह काम करेगा, उसे उसका पैसा तो मिल ही जाएगा। बड़े मन के डॉक्टर को अधिक और अच्छा काम करके सुख व आनंद की अनुभूति होती है। जिसका जितना बड़ा मन होगा, वह उतना ही सुख व आनंद प्राप्त करता है।
केंद्र सरकार सस्ता इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध
केंद्र सरकार देश के लोगों को सस्ता इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए केंद्र यूनिवर्सल हेल्थ केयर व हेल्थ कवर की दिशा में आगे बढ़ रही है। बीमारी के बचाव पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका मानना है कि भारत जैसे देश में हास्पिटल बेस्ड केयर के साथ प्राइमरी केयर पर भी फोकस करना होगा।
रिसर्च पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि रिसर्च का प्रिंसिपल सिद्धांत ग्लोबल स्टैंडर्ड और स्थानीय जरूरत होनी चाहिए। तभी लोगों को इसका फायदा मिल पाएगा।
गृहमंत्री ने कहा कि बड़े मन वाला ही अच्छा डॉक्टर होता है। डॉक्टर और मन के बीच एक रिश्ता है। छोटे मन वाला डॉक्टर कभी भी ईमानदारी व निष्ठा के साथ मरीज का इलाज नहीं करेगा। उससे इस बात से कोई लेना-देना नहीं कि मरीज जीए या फिर मरे।
उसे मालूम है कि जो भी वह काम करेगा, उसे उसका पैसा तो मिल ही जाएगा। बड़े मन के डॉक्टर को अधिक और अच्छा काम करके सुख व आनंद की अनुभूति होती है। जिसका जितना बड़ा मन होगा, वह उतना ही सुख व आनंद प्राप्त करता है।
केंद्र सरकार सस्ता इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध
केंद्र सरकार देश के लोगों को सस्ता इलाज देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए केंद्र यूनिवर्सल हेल्थ केयर व हेल्थ कवर की दिशा में आगे बढ़ रही है। बीमारी के बचाव पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका मानना है कि भारत जैसे देश में हास्पिटल बेस्ड केयर के साथ प्राइमरी केयर पर भी फोकस करना होगा।
रिसर्च पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि रिसर्च का प्रिंसिपल सिद्धांत ग्लोबल स्टैंडर्ड और स्थानीय जरूरत होनी चाहिए। तभी लोगों को इसका फायदा मिल पाएगा।
एक हजार मरीज पर एक डॉक्टर भी नहीं
Home Minister Rajnath Singh and Administrator VP Singh Badnore at GMCH-32 Chandigarh
- फोटो : amar ujala
एक हजार मरीज पर एक डॉक्टर भी नहीं
उन्होंने भारत की दयनीय चिकित्सा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में हजार लोगों पर एक डॉक्टर व एक नर्स की उपलब्धता भी नहीं है। अस्पतालों में बेड का अनुपात भी हजार लोगों के लिए सिर्फ एक बेड है। जबकि विश्व के दूसरे देशों में अनुपात काफी अच्छा है।
विदेशों में हजार लोगों पर दो से तीन डॉक्टर हैं। अगर बेड की बात करें तो हजार लोगों पर चार बेड हैं। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि भारत का मौजूदा मेडिकल हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमन रिसोर्स इस देश की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए नाकाफी है। भारत के हेल्थ केयर सिस्टम को रिविजिट व रिवाइज करने की जरूरत है। इसके लिए एकीकृत हेल्थ केयर सिस्टम की तरफ सोचना होगा।
उन्होंने भारत की दयनीय चिकित्सा व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में हजार लोगों पर एक डॉक्टर व एक नर्स की उपलब्धता भी नहीं है। अस्पतालों में बेड का अनुपात भी हजार लोगों के लिए सिर्फ एक बेड है। जबकि विश्व के दूसरे देशों में अनुपात काफी अच्छा है।
विदेशों में हजार लोगों पर दो से तीन डॉक्टर हैं। अगर बेड की बात करें तो हजार लोगों पर चार बेड हैं। इन आंकड़ों से समझा जा सकता है कि भारत का मौजूदा मेडिकल हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमन रिसोर्स इस देश की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए नाकाफी है। भारत के हेल्थ केयर सिस्टम को रिविजिट व रिवाइज करने की जरूरत है। इसके लिए एकीकृत हेल्थ केयर सिस्टम की तरफ सोचना होगा।