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प्रताप सिंह बाजवा को बेवजह परेशान नहीं किया जाए: हाईकोर्ट

Wed, 14 May 2025 10:58 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 May 2025 10:58 PM IST
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Pratap Singh Bajwa should not be unnecessarily harassed: High Court
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और उसके पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को राज्य में कथित रूप से तस्करी कर लाए गए अज्ञात ग्रेनेडों पर उनकी टिप्पणी के बाद पुलिस द्वारा दर्ज मामले में जांच के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सख्ती से की जाए। यह निर्देश तब आया जब अदालत ने राज्य को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अगली सुनवाई की तारीख 22 मई तय की। पीठ ने बाजवा की दलीलों पर ध्यान दिया कि जांच की आड़ में उन्हें परेशान किया जा रहा है।
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उन्होंने विशेष रूप से 10 मई को जारी किए गए नोटिस का हवाला दिया, जिसमें उन्हें पिछले दो वर्षों में उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी मोबाइल फोन और सिम कार्ड का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। उन्हें 11 मई को दोपहर तक जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। उनके वकील ने कहा कि दी गई समय सीमा अनुचित रूप से कम थी और मांगी गई जानकारी एफआईआर में लगाए गए आरोपों से अलग थी। याचिका का विरोध करते हुए, राज्य ने तर्क दिया कि जांच के लिए जानकारी आवश्यक थी और अदालत को विश्वास दिलाया कि अगली तारीख तक जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।
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इस मामले में एफआईआर एक पुलिस कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसने आरोप लगाया था कि बाजवा ने फेसबुक पर एक इंटरव्यू के दौरान दावा किया था कि पाकिस्तान से पंजाब में 50 ग्रेनेड पहुंचे हैं। इनमें से 18 का इस्तेमाल किया जा चुका है और 32 का विस्फोट होना बाकी है। शिकायतकर्ता ने कहा कि यह दावा भ्रामक है और इससे लोगों में असंतोष फैल सकता है। एफआईआर को रद्द करने की मांग करने वाली मुख्य याचिका में बाजवा ने कहा कि उनकी टिप्पणी 10 अप्रैल को एक टॉक शो के दौरान पिछले दिन की एक समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए की गई थी। वह हाल ही में हुए बम धमाकों सहित राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे थे।
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