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जगरांव नगर काउंसिल में सत्ता की जंग: सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चुनाव से तय होगा पावर सेंटर
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जगरांव। नगर काउंसिल में सोमवार को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, जो केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि नगर की सत्ता पर कब्जे की निर्णायक लड़ाई बन गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की रोक के कारण अध्यक्ष पद का चुनाव अभी नहीं हो पा रहा है इसलिए जो भी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चुना जाएगा, वही नगर काउंसलि का वास्तविक पावर सेंटर बन जाएगा।
पूर्व अध्यक्ष जतिंदर पाल राणा की दो बार बर्खास्तगी का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने अध्यक्ष चुनाव पर रोक लगा रखी है और 20 जनवरी को इस पर फैसला आना है। यही वजह है कि उपप्रधान पद के चुनाव को इतना अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीनियर वाइस प्रेसिडेंट की कुर्सी फाइलों, ठेकों, विकास कार्यों और नगर प्रशासन की दिशा तय करेगी।
नगर काउंसिल के 23 पार्षदों में से 17 कांग्रेस के थे और दो निर्दलीय भी उनके साथ थे, जिससे कांग्रेस पूर्ण बहुमत में थी। लेकिन पार्टी की अंदरूनी खींचतान और विधायक बनाम अध्यक्ष के टकराव के चलते कांग्रेस का किला कमजोर पड़ गया। आठ पार्षद बागी होकर विधायक के खेमे में चले गए। इसके अलावा, एक अकाली समर्थित निर्दलीय और एक अकाली पार्षद ने भी विपक्ष का साथ दिया जिससे जतिंदर पाल राणा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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सत्ता संतुलन का फैसला करेगा चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल पद का नहीं बल्कि नगर काउंसिल में सत्ता संतुलन का फैसला करेगा। पिछले पांच साल में गुटबाजी और आपसी झगड़ों के कारण शहर का विकास ठप रहा, कूड़े के ढेरों में जनता जूझती रही और राजनीति अंदर सिमटी रही। आज का चुनाव तय करेगा कि नगर कौंसिल पर विधायक का नियंत्रण रहेगा या कांग्रेस संगठन का। यह सिर्फ सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं, बल्कि नगर की सत्ता की सेमीफाइनल लड़ाई है। जो जीतेगा, वही हाईकोर्ट के फैसले तक जगरांव में प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा तय करेगा।
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पूर्व अध्यक्ष जतिंदर पाल राणा की दो बार बर्खास्तगी का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने अध्यक्ष चुनाव पर रोक लगा रखी है और 20 जनवरी को इस पर फैसला आना है। यही वजह है कि उपप्रधान पद के चुनाव को इतना अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार सीनियर वाइस प्रेसिडेंट की कुर्सी फाइलों, ठेकों, विकास कार्यों और नगर प्रशासन की दिशा तय करेगी।
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नगर काउंसिल के 23 पार्षदों में से 17 कांग्रेस के थे और दो निर्दलीय भी उनके साथ थे, जिससे कांग्रेस पूर्ण बहुमत में थी। लेकिन पार्टी की अंदरूनी खींचतान और विधायक बनाम अध्यक्ष के टकराव के चलते कांग्रेस का किला कमजोर पड़ गया। आठ पार्षद बागी होकर विधायक के खेमे में चले गए। इसके अलावा, एक अकाली समर्थित निर्दलीय और एक अकाली पार्षद ने भी विपक्ष का साथ दिया जिससे जतिंदर पाल राणा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
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सत्ता संतुलन का फैसला करेगा चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह चुनाव केवल पद का नहीं बल्कि नगर काउंसिल में सत्ता संतुलन का फैसला करेगा। पिछले पांच साल में गुटबाजी और आपसी झगड़ों के कारण शहर का विकास ठप रहा, कूड़े के ढेरों में जनता जूझती रही और राजनीति अंदर सिमटी रही। आज का चुनाव तय करेगा कि नगर कौंसिल पर विधायक का नियंत्रण रहेगा या कांग्रेस संगठन का। यह सिर्फ सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं, बल्कि नगर की सत्ता की सेमीफाइनल लड़ाई है। जो जीतेगा, वही हाईकोर्ट के फैसले तक जगरांव में प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा तय करेगा।