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Hindi News ›   Chandigarh ›   Pollution certificate will be issued only after five-second video uploaded on software in Punjab

पंजाब में नया नियम: सॉफ्टवेयर पर पांच सेकेंड का वीडियो अपलोड होने के बाद ही जारी होगा प्रदूषण प्रमाण पत्र

Mon, 15 Jul 2024 08:18 AM IST
निवेदिता वर्मा राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 15 Jul 2024 08:18 AM IST
सार

पंजाब परिवहन विभाग के अनुसार ऐसी शिकायतें आ रही थी कि कुछ जांच केंद्र वाहन की जांच किए बिना ही प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। केंद्र पर काम कर रहे कर्मचारी सिर्फ गाड़ी का फोटो मंगवाकर ही प्रमाण पत्र बना देते हैं। इस तरह के फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए ही विभाग ने नए सॉफ्टवेयर के साथ सभी केंद्रों को जोड़ने और वीडियो अपलोड करने का प्रावधान किया है।

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Pollution certificate will be issued only after five-second video uploaded on software in Punjab
pollution certificate - फोटो : istock

विस्तार

पंजाब सरकार का परिवहन विभाग प्रदेश के सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को एक सॉफ्टवेयर से जोड़ने जा रहा है, जिसके बाद फर्जी प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) जारी नहीं किए जा सकेंगे। 
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सभी केंद्रों को सॉफ्टवेयर पर पांच सेकंड का वीडियो अपलोड करना होगा, जिससे सुनिश्चित होगा कि वाहन की जांच के बाद ही प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी किया गया है। विभाग ने सॉफ्टवेयर का ट्रायल शुरू कर दिया है। एक महीने के अंदर नए बदलाव सभी केंद्रों पर लागू कर दिए जाएंगे। 
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इस सॉफ्टवेयर को वाहन पोर्टल से भी लिंक किया जाएगा ताकि विभाग किसी भी वक्त पूरे डाटा को चेक कर सके। इसके अलावा सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को जीपीएस से भी जोड़ा जा रहा है। इससे अब सभी जांच केंद्रों का संचालन तय आवंटित जगह से किया जा सकेगा।
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रोड साइड गाड़ियों में नहीं कर सकेंगे चेकिंग 

विभाग के अनुसार जीपीएस से अब तय जगहों पर ही प्रदूषण जांच केंद्रों का काम होगा। इससे पहले ऐसे मामले भी सामने आ रहे थे कि रोड साइड गाड़ियों में उपकरण लेकर वाहनों के प्रदूषण जांच का काम किया जा रहा है। हाईवे किनारे इस तरह के काम होने से हादसे होने का भी खतरा रहता था। अब कोई भी व्यक्ति तय जगह के अलावा दूसरी जगहों से केंद्रों का संचालन नहीं कर पाएगा। जीपीएस से ऐसे मामले पकड़े जाएंगे और विभाग की तरफ से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश में चल रहे 800 प्रदूषण जांच केंद्र  

प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इस समय 800 प्रदूषण जांच केंद्र चल रहे हैं। पहले परिवहन विभाग अपने स्तर पर इन केंद्रों को अपग्रेड करने के लिए काम कर रहा था। यही कारण है कि इस संबंध में इच्छुक एजेंसियों से पिछले साल आवेदन भी मांगे गए थे, लेकिन बाद में नेशनल इंफोर्मेटिक सेंटर (एनआईसी) की तरफ से ही इनको अपग्रेड कर दिया गया। यही कारण है कि अब एनआईसी के साथ मिलकर ही विभाग ने नए प्रावधान का ट्रायल शुरू कर दिया है। केंद्रों को ऑनलाइन करने का काम विभाग ने पहले ही पूरा कर लिया था। अब चेकिंग के बाद वाहन मालिक के नंबर पर भी जानकारी के लिए एक मैसेज जाएगा।


परिवहन विभाग प्रदूषण केंद्रों पर कुछ बदलाव करने जा रहे हैं। उनको जीपीएस के साथ जोड़ा जाएगा। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्र प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। नए सॉफ्टवेयर का ट्रायल शुरू हो गया है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा। -हरजोत कौर, एडिशनल स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, एडमिन।
 
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