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पंजाब कैबिनेट की दो टूक: एसवाईएल नहर के निर्माण का सवाल ही पैदा नहीं होता, पढ़ें- अन्य अहम फैसले

Thu, 05 Oct 2023 11:38 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 05 Oct 2023 11:38 AM IST
सार

एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए कदम नहीं उठाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि पंजाब को इस प्रक्रिया में सहयोग करना होगा। ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी मजबूत कानूनी तर्कों के साथ पंजाब के नदी जल पर पंजाब के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है।

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cm bhagwant mann called cabinet meeting on Sutlej-Yamuna Link canal issue
पंजाब कैबिनेट की बैठक। - फोटो : twitter @BhagwantMann

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने गुरुवार को साफ कर दिया कि पंजाब के पास किसी भी राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और इस वजह से सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर बनाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इसके साथ ही कैबिनेट ने पंजाब के लोगों को राहत देते हुए शहरी इलाकों में संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर दी जा रही तीन फीसदी अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी की छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। 

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कैबिनेट ने उद्योगपतियों को भी राहत देते हुए बिना मंजूरी बनाई गई स्टैंडलोन (एकल) इमारतों को नियमित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी। मुख्यमंत्री आवास पर हुई आपात बैठक में कैबिनेट ने साफ शब्दों में कह दिया कि सतलुज नदी सूख चुकी है और पंजाब के पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए एक बूंद भी अतिरिक्त पानी नहीं है। 
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कैबिनेट ने यह भी कहा कि पंजाब के पास हरियाणा से साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक पानी की मौजूदगी के बारे में फिर से मूल्यांकन करने की जरूरत है। कैबिनेट ने इस नुकते पर भी विचार किया कि पंजाब के 76.5 प्रतिशत ब्लाक (153 में से 117) खतरे की कगार पर हैं जबकि धरती में से 100 प्रतिशत से अधिक पानी निकाला जा रहा है। दूसरी तरफ हरियाणा में सिर्फ 61.5 प्रतिशत (143 में से 88 ब्लाक) खतरे की स्थिति में हैं।

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31 तक लागू रहेगी तीन फीसदी अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी की छूट

पंजाब निवासियों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने शहरी इलाकों (नगर निगम और क्लास-1 नगर परिषदों) में 31 दिसंबर तक संपत्तियों की रजिस्ट्रेशन पर दी जा रही तीन प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी (सामाजिक सुरक्षा फंड) की छूट 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। कैबिनेट ने भारतीय स्टांप एक्ट-1899 की धारा 3 सी और शेड्यूल 1 बी, जोकि भारतीय स्टांप एक्ट 1899 के अधीन वसूलने योग्य है को खत्म करने की भी मंजूरी दे दी, जिससे शहरी इलाकों (नगर निगम और क्लास-1 नगर परिषदों) में जमीन खरीदने वालों को छूट मिलेगी।

बिना अनुमति बनी एकल इमारतें नियमित करने को मंजूरी

हाल ही में आयोजित ‘सरकार-उद्योगपति मिलनी’ के दौरान उद्योगपतियों से किए वादे के मुताबिक पंजाब कैबिनेट ने मौजूदा स्टैंडलोन (एकल) इमारतों को नियमित करने की नीति को हरी झंडी दे दी है। यह फैसला म्यूनिसिपल सीमा, अर्बन इस्टेट और औद्योगिक फोकल प्वाइंट से बाहर बिना मंजूरी के बनाईं स्टैंडलोन इमारतों पर लागू होगा। इनमें होटल, मल्टीप्लेक्स, फॉर्म हाउस, शिक्षा, मेडिकल और औद्योगिक संस्थाएं व अन्य इमारतें शामिल हैं।

इस नीति के अनुसार अब तक बिना मंजूरी बनाईं गई स्टैंडलोन इमारतों को नियमित करवाने के लिए 31 दिसंबर तक आवेदन करने का मौका दिया जाएगा। इस नीति के तहत इमारत के उद्देश्य के अनुसार अपेक्षित अलग-अलग सीएलयू, ईडीसी, एसआईएफ, रेगुलराइजेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और माइनिंग चार्ज (जो भी लागू हों), जमा करवाने के मौके पर संबंधित दस्तावेज जमा करवाकर इस नीति का लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस नीति के अनुसार प्राप्त होने वाले मामलों का निपटारा छह महीनों के अंदर किया जाएगा।

दो उम्रकैदियों की अग्रिम रिहाई के केस भेजने की मंजूरी

कैबिनेट ने राज्य की जेलों में उम्रकैद की सजा भुगत रहे दो कैदियों की अग्रिम रिहाई के केस भेजने की सहमति दे दी है। कैबिनेट की इस मंजूरी के बाद अग्रिम रिहाई केस भारतीय संविधान की धारा 161 के तहत विचार के लिए पंजाब के राज्यपाल को भेजे जाएंगे।

पीजीएसटी (संशोधन) बिल- 2023 के प्रस्ताव को मंजूरी

कैबिनेट ने पंजाब गुड्स एंड सर्विस टैक्स (संशोधन) बिल- 2023 को पेश करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इससे जीएसटी काउंसिल के आदेश के मुताबिक पीजीएसटी में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। करदाताओं की सुविधा और कारोबार को आसान बनाने के लिए पंजाब जीएसटी एक्ट- 2017 में कुछ संशोधन करने का प्रस्ताव है। इनमें जीएसटी अपील ट्रिब्यूनल और इसके राज्य बेंचों का गठन, कुछ अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना, छोटे व्यापारियों को ई-कामर्स ऑपरेटरों की तरफ से माल की सप्लाई करने की सुविधा, जानकारी की सहमति आधारित शेयरिंग और ऑनलाइन गेमिंग और टैक्स के लिए कानूनी व्यवस्थाएं आदि शामिल हैं।

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