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Chandigarh News: बेअदबी रोकथाम बिल पर सियासत तेज, सरकार पर लोगों को गुमराह करने का आरोप

Sat, 26 Jul 2025 08:41 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 08:41 PM IST
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Politics intensifies on the sacrilege prevention bill, government accused of misleading people
-हरपाल चीमा बोले- बेअदबी को रोकने के लिए एक सशक्त कानून बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है विधेयक
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अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक-2025 पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार लोगों की आंखों में धूल झोंक रही है जबकि भाजपा का कहना है सरकार दबाव में थी, इसलिए उसने जल्दबाजी दिखाई। शिअद ने आरोप लगाया है कि आप इस एक्ट पर सिर्फ राजनीति कर रही है। विशेषज्ञाें की राय भी इसमें बंटी हुई नजर आ रही है। दूसरी तरफ इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे लोगों का कहना है कि इसमें अब देरी नहीं की जानी चाहिए। वहीं, सरकार का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक 2025 का उल्लेख किया, जिसे विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया। यह विधेयक राज्य सरकार की सभी धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को रोकने के लिए एक सशक्त कानून बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जल्द लागू हो एक्ट, राजनीति न हो
पंजाब में धार्मिक बेअदबी के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। इसलिए ऐसा कानून बनवाने के लिए उनका मोर्चा लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। हम आज भी मानसा में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अब आप सरकार ने संशोधन नहीं बल्कि विशेष एक्ट बनाने की पहल की है जोकि सिलेक्ट कमेटी में पहुंच चुका है। कमेटी सबकी राय ले रही है। हमारी यही गुजारिश है कि इस बिल को जल्द से जल्द बिना रुकावट पास करवा सूबे में लागू करवाया जाए। इस पर अब किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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-गुरप्रीत सिंह खालसा, सर्वधर्म बेअदबी रोकाे कानून मोर्चा
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बेअदबी के खिलाफ सख्ती जरूरी

किसी भी धर्म के खिलाफ बेअदबी बर्दाश्त नहीं की जा सकती मगर पिछले कुछ समय में पंजाब में ऐसे मामले लगातार सामने आए। ऐसे मामलों के खिलाफ कानून बनाने के लिए पहले भी दो बार पहल हो चुकी है लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाई। बेअदबी के खिलाफ सख्ती बहुत जरूरी है। अब आप सरकार स्पेशल एक्ट लेकर आ रही है। यह बिल अभी सिलेक्ट कमेटी में गया है, पता नहीं यह भी सिरे चढ़ेगा या नहीं मगर इस मामले में पूरी गंभीरता से काम होना चाहिए।
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-प्रोफेसर मंजीत सिंह, समाजशास्त्री
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ऐसे एक्ट की जरूरत नहीं, दुरुपयोग होगा
कोई किसी धर्म की बेअदबी करेगा तो उसे सजा देने के लिए पहले ही संविधान में प्रावधान है। इसलिए ऐसे नए कानून की जरूरत ही नहीं है। यह राजनीतिक एजेंडा प्रतीत हो रहा है। लोगों की धार्मिक भावनाओं से खेला जा रहा है। पंजाब सरकार यह कानून तो बना लेगी मगर इस बात को सुनिश्चित कैसे करेगी कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा। यह कानून इस बात की गारंटी नहीं हो सकता कि बेअदबी के मामले रुक जाएंगे। इस कानून के जरिये सरकार लोगों के लिए एक नई समस्या खड़ी करने जा रही है।
-आरएस बैंस, सीनियर एडवोकेट, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट


लोगों की आंखों में धूल झोंक रही सरकार
सूबे में बेअदबी के मामले थमने चाहिए और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए। आप सरकार के करीब साढ़े तीन साल गुजर गए। अभी तक इन्हें ऐसे कानून की याद नहीं आई, क्या सरकार आगामी चुनाव के नजदीक आने का इंतजार रही थी। आप का यह कानून बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं होगा। सरकार केवल लोगों की आंख में धूल झोंक रही है। सरकार यह भी बताए कि सूबे में अभी तक हो चुकी बेअदबी के पुराने मामलों में क्या होगा।
-परगट सिंह, कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री


दबाव में थी सरकार, जल्दबाजी दिखाई
आप सरकार इस मामले में बहुत ज्यादा दबाव में थी, क्योंकि उन्होंने स्पेशल कानून लाकर बेअदबी करने वाले दोषियों को सजा दिलवाने का वादा किया था। अब बिना किसी तैयारी के जल्दबाजी दिखाते हुए सरकार यह बिल लेकर आई है। इस बिल की ड्राफ्टिंग भी ठीक से नहीं हुई है। विभिन्न धर्मों के ग्रंथों व संतों का इसमें कोई जिक्र नहीं है। इसलिए इसे सिलेक्ट कमेटी को भेजा गया है। आप इस मामले में लोगों को गुमराह करते हुए राजनीति कर रही है।
-विनीत जोशी, मीडिया प्रमुख, पंजाब भाजपा

पहले बेअदबी और धर्म की परिभाषा तय हो
इस विषय पर विधायकों की सेलेक्ट कमेटी सही निर्णय दे पाएगी या सर्वमान्य निर्णय दे पाएगी, मुझे ऐसा नहीं लगता। होना तो यह चाहिए कि पहले धर्म की परिभाषा तय हो फिर बेअदबी किसे कहा जाए इसकी परिभाषा तय हो और उसके बाद ही दंड की बात की जाए। मेरा यह विश्वास है कि यह दंड कानून के हाथों में नहीं होना चाहिए, बल्कि धर्म गुरु ही उनको सुधारने के लिए धार्मिक सेवा का दंड दें। कानून बनाने से पहले इसकी पेचीदगियों को नहीं समझा गया। सिलेक्ट कमेटी में भी उन लोगों को शामिल किया गया है जिन्हें धर्म की गहरी समझ ही नहीं है। मेरा तो राजनेताओं, सरकारों से यह आग्रह है कि देश की जनता पर रहम करें।
-लक्ष्मीकांता चावला, अध्यक्ष, श्री दुर्गियाना कमेटी, अमृतसर
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सबसे पहले शिअद लाई थी ऐसा बिल
शिअद सूबे में हो रही धार्मिक बेअदबी के मामले में बहुत ज्यादा गंभीर है। हमारी सरकार ही सबसे पहले साल 2016 में इस तरह के बिल को लेकर आई थी लेकिन उस पर आपत्ति लग गई थी। आम आदमी पार्टी को ऐसे बिल लाने का कोई अधिकार ही नहीं है क्योंकि उनके नेता खुद एक ग्रंथ की बेअदबी मामले में फंसे हुए हैं। उनके दूसरे नेता ऐसे लोगों के बचाव में लग जाते हैं। ऐसे ही एक नेता को सिलेक्ट कमेटी का सदस्य भी बनाया गया है जो दुुर्भाग्यपूर्ण है। आप इस एक्ट पर सिर्फ राजनीतिक कर रही है और कुछ नहीं।

-सुखबीर सिंह बादल, अध्यक्ष, शिरोमणि अकाली दल
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स्पीकर संधवां और मंत्री बैंस ने भावनाओं को ठेस पहुंचाई: लालपुरा
चंडीगढ़। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य इकबाल सिंह लालपुरा ने शनिवार को आम आदमी पार्टी और इसके शीर्ष नेताओं की निंदा की। लालपुरा ने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहादत दिवस के उपलक्ष्य पर श्रीनगर में पंजाब सरकार की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस की मौजूदगी में भंगड़ा, गीत और नाच जैसी मनोरंजन गतिविधियों की गईं। यह गुरु साहिब की लासानी कुर्बानी का अपमान है और सीधी बेअदबी है। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की ओर से अरदास दा दोहरा को गलत तरीके से पढ़े जाने की घटना को भी आपत्तिजनक बताया। उन्होंने का कि यह सिख मर्यादा का खुला उल्लंघन है। यह बेअदबी है।
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