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मरुभूमि में नहरी जल पर सियासत करते रहे दल, गांव वाले बोले- अब भी होता है भेदभाव

Sun, 21 Feb 2021 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा यशपाल शर्मा, लोहारू, भिवानी
यशपाल शर्मा, लोहारू, भिवानी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 21 Feb 2021 02:05 AM IST
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political Parties of haryana doing politics on the canal water
सांकेतिक चित्र... - फोटो : अमर उजाला

नवाब अहमद बक्श की रियासत लोहारू। स्थापना 1903 में हुई, अब तहसील के साथ विधानसभा क्षेत्र भी है। नहरी पानी बरसों से यहां का अहम मुद्दा बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने खेती के महत्व को समझते हुए भिवानी जिले में नहरों का जाल बिछाया। जितना संभव हुआ उतना पानी भी पहुंचाया। लेकिन, जैसे सत्ता बदलती रही नहरी पानी की आपूर्ति के हालात भी बदलते रहे।

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नलोई, गुरेरा व साथ लगते गांवों के लोगों का कहना है कि पूर्व सरकारों ने जहां उनके प्रभाव का क्षेत्र रहा, वहीं की भूमि सींची। लोहारू विधानसभा और खासकर राजस्थान सीमा से लगते इसके अनेक गांवों को सिंचाई से वंचित रखा। नहरी पानी की आपूर्ति ही नहीं की गई। यहां तक की पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के ननिहाल लीलस में भी दशकों बाद सिंचाई के लिए नहरी पानी पहुंचा है।
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गुरेरा गांव के हरिदत्त शर्मा, जगदीश गोदारा, हरि सिंह व रघुबीर का कहना है कि बंसीलाल सरकार के बाद अब जाकर हालात सुधरे हैं। अब भी बहुत कुछ होना बाकी है। सिंचाई विभाग के अधिकारी गांवों में पहुंचने लगे हैं। पहले तो जहां की सरकार आती थी, वहीं नहरी पानी मोड़ा जाता रहा। वे आरोप किसी पर नहीं लगाते, लेकिन उनके साथ सिंचाई के पानी को लेकर भेदभाव जरूर हुआ है। अगर बंसीलाल सरकार के बाद आई सरकारों ने उनकी मूलभूत जरूरत समझी होती तो हालात ये न होते। दर्जनों गांवों में दशकों बाद कुछ समय से दोबारा नहरी पानी की आपूर्ति शुरू हुई है।
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जगदीश गोदारा ने बताया कि गांवों की सैकड़ों किला जमीन राजनीतिक पक्षपात का शिकार हुई। उनकी व पड़ोसियों की भूमि के टिब्बे पानी के इंतजार में हैं। नलोई व गुरेरा माइनर में पानी आ रहा है। अधिकारियों से ज्यादा पानी की मांग कर रहे हैं, मगर उनकी भी मजबूरी है। जितना पानी पीछे से आएगा, उतना ही देंगे। उन्हें अफसरों से नहीं पहले के हुक्मरानों से गिला है।


हिसार के बरवाला में ज्यादा पानी छोड़ने का आरोप
ग्रामीण मक्खन राम व लक्खी राम ने आरोप लगाया कि जो पानी नलोई व गुरेरा में आना चाहिए वह हिसार के बरवाला में छोड़ दिया जाता है। वहां का प्रभाव ज्यादा है। सिंचाई विभाग के उस तरफ के कुछ अफसर गड़बड़ी करते हैं। अभी उनके क्षेत्र में सिंचाई शुरू होने से 500 एकड़ में पूरी खेती हो रही है। अगर सभी जगह खाल बन जाएंगी तो 800 एकड़ में खेती होने लगेगी। नलोई व गुरेरा में की टेल में 2-3 साल से ही पानी आने लगा है।

बिना भेदभाव हर क्षेत्र को करेंगे सिंचित, बोले मनोहर
सीएम मनोहर लाल ने नीति आयोग की बैठक में कहा है कि राज्य में सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो इरिगेशन एवं कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी का गठन किया गया है। मॉनसून व वर्षा जल के उपयोग के लिए सिंचाई प्रणाली को पुन: व्यवस्थित किया जा रहा है। नहरी व्यवस्था का जीर्णोद्धार किया है। हर क्षेत्र में बिना भेदभाव सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाएंगे।

 हर गांव तक पहुंचाएंगे नहरी पानी : कादियान
चीफ इंजीनियर (लिफ्ट कैनाल यूनिट) डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने बताया कि लोहारू हल्के के हर गांव में पानी पहुंचाने के लिए माइनर का जाल बिछा रहे हैं। किसी को कोई शिकायत नहीं रहने दी जाएगी। हर गांव में नहरी पानी की आवश्यकता का आंकलन किया गया है। किसान साथ दें, आने वाले समय मे समस्या का समाधान हो जाएगा।


नलोई वाले करें शिकायत तुरंत होगी कार्रवाई
हरियाणा के राजस्थान बॉर्डर से लगते अंतिम गांव में नहरी पानी तो पहुंच रहा है कि उनकी मांग हफ्ते के बजाए 15 दिन तक लगातार एक जैसी आपूर्ति की है। इस पर एसडीओ कैनाल परमवीर सिंह कहते हैं कि ग्रामीण शिकायत करें तुरंत कार्रवाई होगी। शिकायत लिखित में करें व कागजात मुहैया कराएं। पानी में कमी की समस्या भी दूर कर रहे हैं।

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