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पीएमईटी के मामले में हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Thu, 27 Aug 2015 08:29 PM IST
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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की ओर से बीते अप्रैल महीने में आयोजित पंजाब मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट (पीएमईटी) को रद्द करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। यूनिवर्सिटी के वकील अनुपम गुप्ता की ओर से बहस के बाद याचिकाकर्ता के वकीलों ने वीरवार को अपनी बहस मुकम्मल कर ली।
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छात्रों ने याचिका दायर कर परीक्षा में गलत प्रश्न पूछने अथवा इनके वैकल्पिक उत्तर गलत होने का आरोप लगाया था। इसी पर हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। यूनिवर्सिटी ने अपने एक्सपर्ट्स से प्रश्न पत्र व इनके उत्तरों की परख के लिए समय मांगा था। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने स्वयं माना कि दो प्रश्नों में गड़बड़ी है।
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इसके लिए छात्रों को समान अंक दे दिए जाएंगे। छात्रों ने कहा था कि 35 ऐसे प्रश्न थे, जिनमें गड़बड़ी थी। छात्रों की ओर से एक निजी एक्सपर्ट की ओर से कराई जांच का हवाला भी दिया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने छात्रों को फटकार लगाई थी कि हर बार नया तथ्य क्यों पेश किया जा रहा है।
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यूनिवर्सिटी की ओर से दो और छात्रों की ओर से 35 प्रश्न गलत बताए जाने पर एडवोकेट गुप्ता ने पैरवी करते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट उच्चस्तरीय हैं। प्रश्न पत्र बनाने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, केवल दो सवालों में गड़बड़ी है। इसके लिए अंक दे दिए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रश्न पत्र में गड़बड़ी के अलावा छात्रों ने और तथ्य भी पेश किया था। कहा था कि यूनिवर्सिटी की ओर से परीक्षा के लिए एक मात्र परीक्षा केंद्र केवल जालंधर में स्थापित किया।
दूर दराज से आने वाले छात्र परीक्षा में देरी से पहुंचे और उन्हें अतिरिक्त समय नहीं दिया गया। इस पर यूनिवर्सिटी ने कहा था कि संगठित परीक्षा कराने के लिए ही एक केंद्र स्थापित किया गया था।