पराली नहीं जलाने वालों से ही रिश्ता जोड़ते हैं गुरबचन सिंह, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्यावरण को बचाना है तो तरनतारन के गांव बुर्ज देवा सिंह के किसान गुरबचन सिंह जैसा जज्बा होना जरूरी है। गुरबचन 40 एकड़ जमीन के मालिक हैं और वर्ष 2008 में धान की कटाई के बाद पराली को आग लगाने से तौबा कर चुके हैं। 2008 से पराली न जलाने के इतने अच्छे नतीजे आने लगे कि उन्होंने फैसला किया कि अपने बच्चों की शादी उसी घर में करेंगे, जहां पराली को आग नहीं लगाई जाती।
गुरबचन सिंह ने अपने बड़े बेटे गुरदेव सिंह का रिश्ता भी ऐसे ही घर में किया। आने वाले दिनों में वह अपनी बेटी की शादी भी उसी घर में करने जा रहे हैं, जिस परिवार ने उनकी बेटी को बहू बनाने से पहले ही पराली न जलाने की कसम ली है। गुरबचन सिंह ने बेटी के लिए नई हैप्पी सीडर मशीन भी खरीद ली है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में गुरबचन सिंह की इस पहल की प्रशंसा की।
ग्रेजुएशन तक पढ़ाई कर चुके गुरबचन सिंह ने बताया कि 2008 में गेहूं की कटाई के बाद पहली बार हैप्पी सीडर मशीन का प्रयोग करके उन्हें काफी लाभ हुआ। हैप्पी सीडर मशीन इस परिवार को इतनी रास आई कि वे पीएयू के इंजीनियर विभाग के अधिकारी एचएस सिद्धू और हैप्पी सीडर मशीन बनाने वाली सोसाइटी को धन्यवाद करते नहीं थकते। गुरबचन सिंह ने बताया कि पराली न जलाकर हैप्पी सीडर मशीन के प्रयोग से इतना लाभ हुआ कि धान की फसल बिना किसी खाद व स्प्रे के होती है। केवल गेहूं की फसल के दौरान आधी खाद डालनी पड़ती है। इस फसल में किसी स्प्रे की जरूरत नहीं पड़ती। फसल का झाड़ भी बढ़ता है।
उन्होंने बताया कि पहली बार 1.24 लाख रुपये में चार किसानों ने मिलकर हैप्पी सीडर मशीन खरीदी थी। इस मशीन ने चारों घरों की पौ बारह कर डाली। अब गुरबचन सिंह रोज करीब 12 किसानों को पराली न जलाने लिए प्रेरित करते हैं। गुरबचन सिंह कहते हैं कि पहले कभी उनकी सुध लेने पटवारी तक नहीं आया। अब डीसी घर आ चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने भी की सराहना
धरती मां को प्यार करें
गुरबचन कहते हैं कि पराली जलाने से धरती मां का कलेजा आग से फट जाता है। किसानों को चाहिए कि धरती मां को प्यार करते हुए पराली को आग न लगाएं। इसे धरती के बेशुमार जीव जंतु भी बच जाएंगे।
गुरबचन सिंह हैं रोल मॉडल: डीसी
डीसी प्रदीप सभ्रवाल किसान गुरबचन सिंह को सम्मानित करने के लिए उनके घर आ चुके हैं। डीसी सभ्रवाल ने किसान के उद्यम पर खुशी जाहिर करते हुए कहा था कि गुरबचन सिंह इलाके के किसानों के लिए रोल मॉडल हैं। उन्होंने वादा किया था कि आने वाले दिनों में किसान गुरबचन सिंह को प्रशासन की ओर से विशेष सम्मान दिया जाएगा।
पीएम मोदी ने की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में कहा कि पंजाब के किसान भाई गुरबचन सिंह जी एक सामान्य और परिश्रमी किसान हैं। प्रधानमंत्री ने उनके बेटे की शादी में लड़की के परिवार से खेत में पराली न जलाने का वचन लेने की बात को अत्यंत सराहा और कहा कि गुरबचन सिंह जी के परिवार ने पर्यावरण को बचाने की एक मिसाल दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब के एक गांव कल्लर माजरा के बारे में पढ़ा जो नाभा के पास है। कल्लर माजरा इसलिए चर्चित हुआ है क्योंकि वहां के लोग धान की पराली जलाने के बजाय उसे जोतकर उसी मिट्टी में मिला देते हैं। पीएम ने कहा कि जिस तरह बूंद-बूंद से सागर बनता है, उसी तरह छोटे-छोटे सकारात्मक कार्य हमेशा सकारात्मक माहौल बनाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं।
समाज गुरबचन से प्रेरणा ले : सेवा सिंह
तरनतारन के पद्मश्री बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वालों ने गुरबचन सिंह की प्रशंसा करते कहा कि समाज को इस किसान से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पराली को आग लगाने से पर्यावरण ही खराब नहीं होता, बल्कि इससे मित्र जीव जंतु और पेड़ भी जल जाते हैं। मित्र कीटों के मरने से फसलों को ज्यादा बीमारियां लगती हैं। उन्होंने कहा कि 67 फीसदी खाद पराली में रह जाती है और बाकी 33 फीसदी फसल को लगती है। इस वजह से पराली को खेत में जोतने से 60 फीसदी खाद की पूर्ति हो जाती है।