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पंचकूला हिंसा को लेकर दाखिल जनहित याचिका ली गई वापस, कारण भी जानिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:07 AM IST
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पंचकूला में हिंसा
- फोटो : File Photo
पंचकूला में गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाने के बाद हुई हिंसा और नुकसान के लिए धारा 144 सही प्रकार से न लगाने को जिम्मेदार बताते हुए इसके लिए दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग संबंधी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट से याचिका नए सिरे से दाखिल करने के लिए छूट दी है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका में तथ्यों का अभाव है इसलिए इसे खारिज कर दिया जाएगा। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वह याचिका वापस लेने की बात कही थी। इस मामले में पानीपत निवासी अनिल भान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि गुरमीत राम रहीम मामले में पंचकूला में धारा 144 के लागू होने के बाद भी लाखों लोगों की भीड़ कैसे एकत्र हो गई। पुलिस ने तोड़-फोड़ रोकने के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठाया।
याचिका के अनुसार इससे साफ है कि हरियाणा सरकार और उसके अधिकारी इस मामले में शामिल थे। सरकार ने एक बड़ी तादाद में डेरा समर्थकों को पंचकूला में जमा होने दिया। साफ है कि इसे एक तरह से लागू ही नहीं किया गया और उस दौरान खुद सरकार ने ही धारा-144 को एक मजाक बना दिया था।
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हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका में तथ्यों का अभाव है इसलिए इसे खारिज कर दिया जाएगा। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि वह याचिका वापस लेने की बात कही थी। इस मामले में पानीपत निवासी अनिल भान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि गुरमीत राम रहीम मामले में पंचकूला में धारा 144 के लागू होने के बाद भी लाखों लोगों की भीड़ कैसे एकत्र हो गई। पुलिस ने तोड़-फोड़ रोकने के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठाया।
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याचिका के अनुसार इससे साफ है कि हरियाणा सरकार और उसके अधिकारी इस मामले में शामिल थे। सरकार ने एक बड़ी तादाद में डेरा समर्थकों को पंचकूला में जमा होने दिया। साफ है कि इसे एक तरह से लागू ही नहीं किया गया और उस दौरान खुद सरकार ने ही धारा-144 को एक मजाक बना दिया था।
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