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पीजीआई आपकी सेवाओं को कभी नहीं भूल सकेगा, तीन प्रख्यात प्रोफेसरों को दी विदाई
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पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने प्रो. राकेश को सम्मानित किया।
- फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। पीजीआई ने रविवार को तीन प्रख्यात प्रोफेसरों को विदाई दी। उनकी सेवाओं को पीजीआई ही नहीं वरन पूरा देश नहीं भूल पाएगा। उन्होंने मेडिकल चिकित्सा में बड़ा योगदान दिया है। हजारों मरीजों को उनके जरिए लाभ मिला है और तमाम चिकित्सकों को उन्होंने शिक्षा देकर आगे बढ़ाया है। इन तीन प्रोफेसरों में प्रो. अनिल भंसाली, प्रो. राकेश कोचर और प्रो. सविता कुमारी शामिल हैं।
विदाई के समय पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने कहा कि तीनों ही प्रोफेसर सूक्ष्मदर्शी और भावुक देखभाल करने वाले रहे हैं। करुणा भी उनमें कूट-कूटकर भरी हुई है। उनका दृष्टिकोण हमेशा सेवा करने वाला रहा है। इसी कारण उन्होंने कई चिकित्सकों को उत्कृष्ट बनाया। तीनों ही प्रोफेसरों ने महामारी के खिलाफ बेहतर कदम उठाए और तमाम लोगों को लाभ पहुंचाया। इस मौके पर प्रो. जीडी पुरी (डीन, अकादमिक), प्रो. गुरप्रीत सिंह (डीन, अनुसंधान), प्रो. विपिन कौशल (अभिनय एमएस), कुमार गौरव धवन (डीडीए) कुमार अभय (एफए), प्रो. संजय (एंडोक्रिनोलॉजी), प्रो. उषा दत्ता (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) और प्रो. संजय जैन (आंतरिक चिकित्सा) आदि लोग मौजूद रहे।
उपलब्धियों पर एक नजर..
प्रो. भंसाली ने टाइप टू मधुमेह पर किया काम
प्रो. अनिल भंसाली ने 1987 में सीनियर रेजिडेंट के रूप में संस्थान में प्रवेश किया और एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख के पद पर पहुंचे। कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और फेलोशिप पाई। प्रो. भंसाली को उनके विशेष योगदान के लिए जाना जाता है। मधुमेह के क्षेत्र में विशेष रूप से टाइप टू मधुमेह में स्टेम सेल थेरेपी पर उन्होंने कार्य किया। वह एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख के रूप में 17 साल से कार्यरत थे।
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प्रो. राकेश कोचर ने कई खोजी परियोजनाओं को पूरा किया
प्रो. राकेश कोचर 1979 में जूनियर रेजिडेंट के रूप में संस्थान से जुड़े और 2007 में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रमुख बने। उन्होंने संस्थान को सब-डीन (रिसर्च) के रूप में भी सेवा प्रदान की है। 40 साल से अधिक के अपने करिअर के दौरान उन्होंने कई खोजी और बहु-केंद्र परियोजनाओं को पूरा किया। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेंटर पीजीआईएमईआर में और 350 से अधिक वैज्ञानिक पत्रों और समीक्षाओं को प्रकाशित किया।
प्रो. सविता ने चार दशकों तक किया बेहतर कार्य
प्रो. सविता कुमारी भी 1979 में पीजीआईएमईआर में जूनियर रेजिडेंट के रूप में शामिल हुईं और इंटिमेट मेडिसिन विभाग के प्रमुख के पद तक पहुंचीं। एक प्रशंसित पेशेवर, गतिशील टीम लीडर और विनम्रता का व्यक्तित्व है। प्रोफेसर सविता कुमारी ने संस्थान में चार दशकों से अधिक समय तक अटूट प्रतिबद्धता के साथ सेवा का काम किया। रिसर्च से लेकर कई क्षेत्रों में उनके किए गए कार्यों को याद किया जाएगा।
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विदाई के समय पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने कहा कि तीनों ही प्रोफेसर सूक्ष्मदर्शी और भावुक देखभाल करने वाले रहे हैं। करुणा भी उनमें कूट-कूटकर भरी हुई है। उनका दृष्टिकोण हमेशा सेवा करने वाला रहा है। इसी कारण उन्होंने कई चिकित्सकों को उत्कृष्ट बनाया। तीनों ही प्रोफेसरों ने महामारी के खिलाफ बेहतर कदम उठाए और तमाम लोगों को लाभ पहुंचाया। इस मौके पर प्रो. जीडी पुरी (डीन, अकादमिक), प्रो. गुरप्रीत सिंह (डीन, अनुसंधान), प्रो. विपिन कौशल (अभिनय एमएस), कुमार गौरव धवन (डीडीए) कुमार अभय (एफए), प्रो. संजय (एंडोक्रिनोलॉजी), प्रो. उषा दत्ता (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) और प्रो. संजय जैन (आंतरिक चिकित्सा) आदि लोग मौजूद रहे।
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उपलब्धियों पर एक नजर..
प्रो. भंसाली ने टाइप टू मधुमेह पर किया काम
प्रो. अनिल भंसाली ने 1987 में सीनियर रेजिडेंट के रूप में संस्थान में प्रवेश किया और एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख के पद पर पहुंचे। कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों और फेलोशिप पाई। प्रो. भंसाली को उनके विशेष योगदान के लिए जाना जाता है। मधुमेह के क्षेत्र में विशेष रूप से टाइप टू मधुमेह में स्टेम सेल थेरेपी पर उन्होंने कार्य किया। वह एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख के रूप में 17 साल से कार्यरत थे।
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प्रो. राकेश कोचर ने कई खोजी परियोजनाओं को पूरा किया
प्रो. राकेश कोचर 1979 में जूनियर रेजिडेंट के रूप में संस्थान से जुड़े और 2007 में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रमुख बने। उन्होंने संस्थान को सब-डीन (रिसर्च) के रूप में भी सेवा प्रदान की है। 40 साल से अधिक के अपने करिअर के दौरान उन्होंने कई खोजी और बहु-केंद्र परियोजनाओं को पूरा किया। विशेष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सेंटर पीजीआईएमईआर में और 350 से अधिक वैज्ञानिक पत्रों और समीक्षाओं को प्रकाशित किया।
प्रो. सविता ने चार दशकों तक किया बेहतर कार्य
प्रो. सविता कुमारी भी 1979 में पीजीआईएमईआर में जूनियर रेजिडेंट के रूप में शामिल हुईं और इंटिमेट मेडिसिन विभाग के प्रमुख के पद तक पहुंचीं। एक प्रशंसित पेशेवर, गतिशील टीम लीडर और विनम्रता का व्यक्तित्व है। प्रोफेसर सविता कुमारी ने संस्थान में चार दशकों से अधिक समय तक अटूट प्रतिबद्धता के साथ सेवा का काम किया। रिसर्च से लेकर कई क्षेत्रों में उनके किए गए कार्यों को याद किया जाएगा।

पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने प्रो. सविता को सम्मानित किया। - फोटो : CHANDIGARH

पीजीआई निदेशक प्रो. जगतराम ने प्रो. अनिल भंसाली को सम्मानित किया- फोटो : CHANDIGARH