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PGI के नाम एक और उपलब्धि, 72 साल के व्यक्ति की किडनी निकाल ट्रांसप्लांट की
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Aug 2017 09:23 AM IST
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किडनी प्रत्यारोपण
- फोटो : Demo Pic
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पीजीआई ने पहली बार 72 वर्षीय दिवंगत डोनर से किडनी निकालकर दो जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर उन्हें नई जिंदगी दी है। आमतौर पर डाक्टर 65-70 की उम्र के बाद दिवंगत डोनरों से किडनी लेने से मना कर देते हैं। लेकिन इस केस में ऐसा नहीं हुआ।
पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के एचओडी डा. आशीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने डोनर की किडनी का टेस्ट कराया। किडनी पूरी तरह से अच्छी निकली। मरीज को न तो डायबिटीज थी और न ही हाइपरटेंशन। कोई शंका न रह जाए इसलिए बायोप्सी भी कराई गई। इसमें किडनी सुरक्षित निकली। उसके बाद ट्रांसप्लांट कर दिया गया है।
डा. शर्मा के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि 65-70 की उम्र के बाद डोनर की किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती। दिक्कत आने की प्रबल आशंका रहती है। लेकिन जब यह केस आया तो चांस लिया गया गया। दोनों ही टेस्ट में किडनी सुरक्षित निकली। इससे पहले 70 वर्षीय डोनर से किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की जा चुकी है। जो पूरी तरह से सफल रहा है। डा. शर्मा के मुताबिक ट्रांसप्लांट के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है। 72 वर्षीय पेशेंट हिमाचल का था। एक्सीडेंट के बाद वह कोमा में आ गया था। किडनी के अलावा उनकी दो कोर्निया सुरक्षित रख ली गईं हैं। जो बाद में पेशेंट में ट्रांसप्लांट कर दी जाएगी।
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पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के एचओडी डा. आशीष शर्मा ने बताया कि उन्होंने डोनर की किडनी का टेस्ट कराया। किडनी पूरी तरह से अच्छी निकली। मरीज को न तो डायबिटीज थी और न ही हाइपरटेंशन। कोई शंका न रह जाए इसलिए बायोप्सी भी कराई गई। इसमें किडनी सुरक्षित निकली। उसके बाद ट्रांसप्लांट कर दिया गया है।
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डा. शर्मा के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि 65-70 की उम्र के बाद डोनर की किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती। दिक्कत आने की प्रबल आशंका रहती है। लेकिन जब यह केस आया तो चांस लिया गया गया। दोनों ही टेस्ट में किडनी सुरक्षित निकली। इससे पहले 70 वर्षीय डोनर से किडनी निकालकर ट्रांसप्लांट की जा चुकी है। जो पूरी तरह से सफल रहा है। डा. शर्मा के मुताबिक ट्रांसप्लांट के बाद दोनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है। 72 वर्षीय पेशेंट हिमाचल का था। एक्सीडेंट के बाद वह कोमा में आ गया था। किडनी के अलावा उनकी दो कोर्निया सुरक्षित रख ली गईं हैं। जो बाद में पेशेंट में ट्रांसप्लांट कर दी जाएगी।
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इस साल का 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : PTI
इस साल का 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन
पीजीआई ने दिवंगत आर्गन डोनेशन में नई कामयाबी हासिल कर ली है। अभी इस साल के सात महीने बीते हैं और पीजीआई अब तक 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन कर चुका है। पीजीआई ने जून 1973 में किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू किया था। अब तक 3545 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं।
इनमें 3301 लाइव डोनेशन व 244 दिवंगत आर्गन डोनेशन है। 244 दिवंगत आर्गन डोनेशन में 56 किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ इस साल किए गए हैं। कामयाबी और सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2014 में पहला पेनक्रियाज व किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। अब तक 11 पेनक्रियाज व किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
दिवंगत आर्गन डोनेशन में पीजीआई ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। सात महीने में 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन बताता है कि लोगों का माइंडसेट बदला है। इसमें टीम के सभी सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई है। उनके इस प्रयास को नकारा नहीं जा सकता है। -डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
पीजीआई ने दिवंगत आर्गन डोनेशन में नई कामयाबी हासिल कर ली है। अभी इस साल के सात महीने बीते हैं और पीजीआई अब तक 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन कर चुका है। पीजीआई ने जून 1973 में किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू किया था। अब तक 3545 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं।
इनमें 3301 लाइव डोनेशन व 244 दिवंगत आर्गन डोनेशन है। 244 दिवंगत आर्गन डोनेशन में 56 किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ इस साल किए गए हैं। कामयाबी और सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2014 में पहला पेनक्रियाज व किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। अब तक 11 पेनक्रियाज व किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
दिवंगत आर्गन डोनेशन में पीजीआई ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। सात महीने में 31वां दिवंगत आर्गन डोनेशन बताता है कि लोगों का माइंडसेट बदला है। इसमें टीम के सभी सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई है। उनके इस प्रयास को नकारा नहीं जा सकता है। -डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई