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PGI में 9 दिन की बच्ची की मौत, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप, मामला दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 27 Sep 2016 01:58 AM IST
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डॉक्टरों की लापरवाही से 9 दिन की बच्ची की मौत
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पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत का शिकार हुई नौ दिन की बच्ची का पोस्टमार्टम सोमवार को डॉक्टरों के पैनल ने किया। दूसरी तरफ पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ डीडीआर दर्ज कर ली है। अब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।
ढकौली निवासी बलजिंदर व अनीता की नौ दिन की बच्ची की पीजीआई में मौत हो गई थी। उनका आरोप था कि पीजीआई के डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उनकी बच्ची ने दम तोड़ा है। बलजिंदर के परिजनों ने बताया कि करीब दस दिन पहले अनीता ने सेक्टर-6 पंचकूला के जनरल हॉस्पिटल में एक बेटी को जन्म दिया था। उस वक्त जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ थे। अगले ही दिन उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। उसके बाद बच्ची के चेहरे पर एक निशान बन गया, जो धीरे-धीरे बढ़कर दाई आंख की ओर बढ़ने लगा। उस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं, यह अपने आप ठीक हो जाएगा। जब निशान बढ़कर इंफेक्शन का रूप लेने लगा तो उन्होंने प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया। प्राइवेट डॉक्टर ने शनिवार को पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर रेफर कर दिया।
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ढकौली निवासी बलजिंदर व अनीता की नौ दिन की बच्ची की पीजीआई में मौत हो गई थी। उनका आरोप था कि पीजीआई के डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उनकी बच्ची ने दम तोड़ा है। बलजिंदर के परिजनों ने बताया कि करीब दस दिन पहले अनीता ने सेक्टर-6 पंचकूला के जनरल हॉस्पिटल में एक बेटी को जन्म दिया था। उस वक्त जच्चा व बच्चा दोनों स्वस्थ थे। अगले ही दिन उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। उसके बाद बच्ची के चेहरे पर एक निशान बन गया, जो धीरे-धीरे बढ़कर दाई आंख की ओर बढ़ने लगा। उस दौरान डॉक्टरों ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं, यह अपने आप ठीक हो जाएगा। जब निशान बढ़कर इंफेक्शन का रूप लेने लगा तो उन्होंने प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया। प्राइवेट डॉक्टर ने शनिवार को पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर रेफर कर दिया।
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पुलिस ने दर्ज की डीडीआर, डाक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल
- फोटो : PTI
पीजीआई के एडवाइंस पीडियाट्रिक सेंटर (एपीसी) पर पहुंचते ही उनका अनुभव कड़वा हो गया। उनका आरोप है कि सीनियर डॉक्टरों ने उनके साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया। उनसे कहा गया कि वे किसी प्राइवेट क्लीनिक में चले जाएं, क्योंकि यहां पर मरीज काफी हैं। काफी जद्दोजहद के बाद उन्होंने पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के लिए रेफर कर दिया। वहां से जांच करने के बाद उन्हें दोबारा से एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर रेफर कर दिया गया। अगले दिन वे 11 बजे दोबारा से एपीसी पहुंचे। साढ़े तीन बजे तक वे वहीं पर डटे रहे, लेकिन बच्ची को न तो देखा और न ही दाखिल किया।
जब परिजनों ने गुस्सा किया तो तीन बजकर 45 मिनट पर उन्हें दाखिल किया। करीब साढ़े चार बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। यदि वे समय पर इलाज शुरू कर देते तो शायद उनकी बच्ची जिंदा होती। मौत के बाद परिजनों के एपीसी में हंगामा करने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों के बयान के आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ डीडीआर दर्ज की। उसके बाद डॉक्टरों का पैनल गठित कर सोमवार को बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया।
परिजनों का कहना है कि वे शहर की एक पढ़ी-लिखी फैमिली है। जब उनके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो जो गरीब लोग इलाज कराने आते हैं तो उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा। इसे आसानी से समझा जा सकता है। वहीं पीजीआई प्रवक्ता मंजू वडवालकर का कहना है कि अब मामला पुलिस के पास पहुंच गया है और वे इस मामले की जांच कर रहे हैं।
जब परिजनों ने गुस्सा किया तो तीन बजकर 45 मिनट पर उन्हें दाखिल किया। करीब साढ़े चार बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। यदि वे समय पर इलाज शुरू कर देते तो शायद उनकी बच्ची जिंदा होती। मौत के बाद परिजनों के एपीसी में हंगामा करने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों के बयान के आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ डीडीआर दर्ज की। उसके बाद डॉक्टरों का पैनल गठित कर सोमवार को बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया।
परिजनों का कहना है कि वे शहर की एक पढ़ी-लिखी फैमिली है। जब उनके साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो जो गरीब लोग इलाज कराने आते हैं तो उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा। इसे आसानी से समझा जा सकता है। वहीं पीजीआई प्रवक्ता मंजू वडवालकर का कहना है कि अब मामला पुलिस के पास पहुंच गया है और वे इस मामले की जांच कर रहे हैं।