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पीजीआई में सीनियर सिटीजंस को ग्रीन कार्ड, सुविधा धेले की नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Wed, 04 May 2016 12:30 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर पीजीआई ने सीनियर सिटीजन के लिए अलग से कार्ड बनाना तो शुरू कर दिया है, लेकिन उन्हें इलाज के लिए इंतजार उतना ही करना पड़ रहा है, जितना पहले करना पड़ रहा था। पीजीआई के अधिकतर डाक्टर सीनियर सिटीजन को कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। कुछ ही डाक्टर सीनियर सिटीजन का कार्ड आते ही उन्हें जल्दी से जल्दी देखने की कोशिश करते हैं। आए दिन सीनियर सिटीजन इस बारे में पीजीआई को शिकायत देते हैं, ताकि उन्हें कोई राहत मिल जाए, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया है।
पिछले साल पीजीआई ने सीनियर सिटीजन के लिए ग्रीन कार्ड बनाने शुरू किए थे। इसका मकसद था कि डाक्टर सीनियर सिटीजन को प्राथमिकता के तौर पर देखें। उन्हें ज्यादा इंतजार न करना पड़े। इस बारे में शहर के सीनियर सिटीजन ने कई बार पीजीआई प्रशासन को पत्र लिखा था। उसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के निर्देश पर ग्रीन कार्ड बनने शुरू हुए थे। डाक्टरों को भी निर्देश दिए गए थे कि वे ग्रीन कार्ड को वरीयता दें और सीनियर सिटीजन को जल्दी से जल्दी देखें।
मंगलवार को पंजाब के होशियारपुर से आए जोगिंदर सिंह थर्ड फ्लोर पर स्थित इंटरनल मेडिसिन की ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो घंटे से नाम बुलाने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रीन कार्ड का उन्हें कोई फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ यही फायदा है कि कार्ड जल्दी बन जाता है। हालांकि कुछ डाक्टर सीनियर सिटीजन को आसानी से देख लेते हैं।
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क्या कहना है मरीजों का
सुबह 8.30 बजे पहुंच गया था, लेकिन फिर मेरा नंबर डेढ़ बजे आया। ग्रीन कार्ड का क्या फायदा। पहले भी इतना वक्त लगता था। जब मैंने डाक्टर से कहा कि मैं इतने देर से खड़ा हूं, तब जाकर उन्होंने मुझे देखा। गर्मी में इतनी देर तक खड़ा हो पाना काफी मुश्किल है। इस बारे में पीजीआई प्रशासन दखल दे और सुनिश्चित करवाएं कि ग्रीन कार्ड वालों को जल्दी से जल्दी देखा जाए।
पीसी गुप्ता, अंबाला से आए थे
कोट
सब दिखावा है। पीजीआई ने बना दिए ग्रीन कार्ड। आप लोगों ने खबरें छाप दीं। उसका फायदा हो रहा या नहीं, कोई भी देखने वाला नहीं है। हर जगह सीनियर सिटीजन को तवज्जो दी जा रही है, लेकिन पीजीआई में कोई देखने वाला नहीं है, न ही कोई सुनने वाला। मुझे लगता है कि अधिकारी ही नहीं चाहते कि पीजीआई में सुधार हो। कभी वे भी सामान्य लाइन में खड़े होकर इलाज कराएं, तभी दिक्कतों का पता चलेगा।
एसपी ठाकुर, चंडीगढ़ सेक्टर 37 से आए थे
कोट
मुझे ग्रीन कार्ड का कोई फायदा नहीं मिला। जितना पहले वक्त लगता था, उतना अब भी लगा। यहां नंबर आ जाए तो टेस्ट और जांच में तो आप भूल जाओ। वहां तो धक्के खाने पड़ेंगे। गर्मी भी देखिए कितनी ज्यादा हो गई है। आते जाओ धक्के खाते जाओ, किसी को कोई लेना-देना नहीं।
राकेश, पंचकूला सेक्टर 8
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पिछले साल पीजीआई ने सीनियर सिटीजन के लिए ग्रीन कार्ड बनाने शुरू किए थे। इसका मकसद था कि डाक्टर सीनियर सिटीजन को प्राथमिकता के तौर पर देखें। उन्हें ज्यादा इंतजार न करना पड़े। इस बारे में शहर के सीनियर सिटीजन ने कई बार पीजीआई प्रशासन को पत्र लिखा था। उसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के निर्देश पर ग्रीन कार्ड बनने शुरू हुए थे। डाक्टरों को भी निर्देश दिए गए थे कि वे ग्रीन कार्ड को वरीयता दें और सीनियर सिटीजन को जल्दी से जल्दी देखें।
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मंगलवार को पंजाब के होशियारपुर से आए जोगिंदर सिंह थर्ड फ्लोर पर स्थित इंटरनल मेडिसिन की ओपीडी के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो घंटे से नाम बुलाने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रीन कार्ड का उन्हें कोई फायदा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ यही फायदा है कि कार्ड जल्दी बन जाता है। हालांकि कुछ डाक्टर सीनियर सिटीजन को आसानी से देख लेते हैं।
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क्या कहना है मरीजों का
सुबह 8.30 बजे पहुंच गया था, लेकिन फिर मेरा नंबर डेढ़ बजे आया। ग्रीन कार्ड का क्या फायदा। पहले भी इतना वक्त लगता था। जब मैंने डाक्टर से कहा कि मैं इतने देर से खड़ा हूं, तब जाकर उन्होंने मुझे देखा। गर्मी में इतनी देर तक खड़ा हो पाना काफी मुश्किल है। इस बारे में पीजीआई प्रशासन दखल दे और सुनिश्चित करवाएं कि ग्रीन कार्ड वालों को जल्दी से जल्दी देखा जाए।
पीसी गुप्ता, अंबाला से आए थे
कोट
सब दिखावा है। पीजीआई ने बना दिए ग्रीन कार्ड। आप लोगों ने खबरें छाप दीं। उसका फायदा हो रहा या नहीं, कोई भी देखने वाला नहीं है। हर जगह सीनियर सिटीजन को तवज्जो दी जा रही है, लेकिन पीजीआई में कोई देखने वाला नहीं है, न ही कोई सुनने वाला। मुझे लगता है कि अधिकारी ही नहीं चाहते कि पीजीआई में सुधार हो। कभी वे भी सामान्य लाइन में खड़े होकर इलाज कराएं, तभी दिक्कतों का पता चलेगा।
एसपी ठाकुर, चंडीगढ़ सेक्टर 37 से आए थे
कोट
मुझे ग्रीन कार्ड का कोई फायदा नहीं मिला। जितना पहले वक्त लगता था, उतना अब भी लगा। यहां नंबर आ जाए तो टेस्ट और जांच में तो आप भूल जाओ। वहां तो धक्के खाने पड़ेंगे। गर्मी भी देखिए कितनी ज्यादा हो गई है। आते जाओ धक्के खाते जाओ, किसी को कोई लेना-देना नहीं।
राकेश, पंचकूला सेक्टर 8