PGI: मरीजों को आधे से भी कम दाम पर मिलेंगी दवाएं
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खुद की केमिस्ट शॉप खोलने के लिए पीजीआई की ओर से गठित अधिकारियों की टीम ने देश के चार बड़े हॉस्पिटल का दौरा करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि शॉप से मरीजों को दी जाने वाली दवा पर कोई भी मुनाफा नहीं लिया जाएगा।
दवाओं पर सिर्फ इतना शुल्क लिया जाएगा, जिससे शॉप पर रखे जाने वाले कर्मचारियों का खर्च निकल जाए। यानी जो दवा कंपनी से खरीदी जाएगी, उस पर नाममात्र का चार्ज लगाया जाएगा। कुल मिलाकर मरीजों को दवाएं 50-80 प्रतिशत सस्ती मिलेंगी। अभी पीजीआई में मरीजों को ब्रांडेड दवाओं पर सिर्फ 25-30 प्रतिशत डिस्काउंट मिलता है।
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि इंडोर पेशेंट को वार्ड में ही सर्जिकल आइटम मिल जाए। इसके लिए मरीज से एडवांस में कुछ रुपये ले लिए जाएंगे। इससे फायदा यह होगा कि मरीजों को दौड़ लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पीजीआई में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि मरीजों के परिजनों को केमिस्ट शॉप के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसमें दवाओं के सभी ब्रांड होंगे। गरीब हो या अमीर। सभी को एक ही रेट पर दवा दी जाएगी। इसमें मेडिसिन के अलावा सर्जिकल आइटम भी होंगे। केमिस्ट शॉप नेहरू हॉस्पिटल में खोले जाने का प्रस्ताव है।
केमिस्ट शॉप के लिए छह महीने और इंतजार
पीजीआई में खुद की केमिस्ट शॉप खुलने में अभी छह महीने और लगेंगे। सूत्रों ने दावा किया है कि रिपोर्ट की सिफारिशों को पहले पीजीआई की फार्मेसी कमेटी से क्लीयर करवाया जाएगा। फिर यह डायरेक्टर के पास जाएंगी। उसके बाद फाइनल मुहर के लिए पीजीआई की गवर्निंग बाडी के पास भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह महीने लगेंगे।
मार्च में किया था दौरा
मरीजों को सस्ती दवा देने के फैसले के बाद पीजीआई ने छह अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। इसमें एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी व डॉक्टर भी शामिल थे। इनमें से कुछ सदस्यों ने मार्च में देश के चार उन हास्पिटलों का दौरा किया, जहां पर संस्थानों ने अपनी केमिस्ट शॉप खोल रखी थी।
इनमें पॉन्डिचेरी का हास्पिटल, लखनऊ का संजय गांधी, मुंबई का टाटा मेमोरियल और वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल शामिल था। टीम के सदस्यों ने वहां की वर्किंग देखी और उसकी रिपोर्ट तैयार की।