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आरोपः पंचकूला हिंसा मामले में राम रहीम को बचा रही एसआईटी, हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका
Sun, 28 Apr 2019 09:46 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 28 Apr 2019 09:46 AM IST
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गुरमीत राम रहीम
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पंचकूला हिंसा मामले की जांच कर रही एसआईटी पर डेरामुखी राम रहीम को बचाने के आरोप लग रहे हैं। इसलिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। डेरामुखी गुरमीत राम रहीम को दोषी करार देने के बाद पंचकूला में डेरा समर्थकों द्वारा आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा के मामले में एक अर्जी हाईकोर्ट पहुंची है।
अर्जी में मामले की जांच कर रही एसआईटी पर डेरामुखी को बचाने के आरोप लगाए गए हैं। इस अर्जी में याचिकाकर्ता ने कहा है कि मामले में पकड़े गए कई लोगों ने पुलिस और अदालत मे बयान दिए हैं कि इन दंगों की साजिश डेरामुखी के इशारे पर की गई थी। इन बयानों के बावजूद एसआईटी इन दंगों के साजिशकर्ता के तौर पर डेरामुखी को नामजद ही नहीं कर रही है।
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अर्जी में मामले की जांच कर रही एसआईटी पर डेरामुखी को बचाने के आरोप लगाए गए हैं। इस अर्जी में याचिकाकर्ता ने कहा है कि मामले में पकड़े गए कई लोगों ने पुलिस और अदालत मे बयान दिए हैं कि इन दंगों की साजिश डेरामुखी के इशारे पर की गई थी। इन बयानों के बावजूद एसआईटी इन दंगों के साजिशकर्ता के तौर पर डेरामुखी को नामजद ही नहीं कर रही है।
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डेरामुखी के खिलाफ अभी तक सीधे सबूत नहीं मिले
मुख्य याचिका पर एसआईटी ने गत वर्ष हाईकोर्ट में कहा था कि अभी तक इस मामले में डेरामुखी के खिलाफ सीधे सबूत नहीं मिले हैं। याची ने कहा कि इससे साफ है कि एसआईटी जानबूझकर डेरामुखी को बचा रही है। आईजी केके राव ने इन दंगों के पीछे की साजिश के बारे में तभी मीडिया में जानकारी दी थी।
उन्होंने कहा था कि डेरामुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद उन्होंने गाड़ी से लाल बैग मंगवाया, जो इन दंगों का इशारा था। याचिकाकर्ता ने कहा इतने सबूतों के बावजूद भी एसआईटी इन्हें नजरअंदाज कर रही है। ऐसे में साफ है कि यह इसलिए किया जा रहा है जिससे सरकार लोकसभा चुनाव में इसका फायदा ले सके। इस याचिका पर हाईकोर्ट 13 मई को मुख्य याचिका के साथ ही सुनवाई करेगा।
उन्होंने कहा था कि डेरामुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद उन्होंने गाड़ी से लाल बैग मंगवाया, जो इन दंगों का इशारा था। याचिकाकर्ता ने कहा इतने सबूतों के बावजूद भी एसआईटी इन्हें नजरअंदाज कर रही है। ऐसे में साफ है कि यह इसलिए किया जा रहा है जिससे सरकार लोकसभा चुनाव में इसका फायदा ले सके। इस याचिका पर हाईकोर्ट 13 मई को मुख्य याचिका के साथ ही सुनवाई करेगा।