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मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान को हाईकोर्ट में चुनौती, प्रशासन तलब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 Sep 2016 07:42 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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चंडीगढ़ के मास्टर प्लान में अपार्टमेंट के प्रावधान को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करके चुनौती दी गई है। जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन, अर्बन प्लानिंग एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट के सचिव, चीफ आर्किटेक्ट सहित एस्टेट ऑफिसर को नोटिस जारी कर कर दिया। याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि एक ही यूनिट में अलग-अलग अपार्टमेंट बनाकर उसे बेचा जा रहा है। इससे शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद होने का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही उत्तरी सेक्टरों के लिए यह प्रावधान घातक साबित हो सकता है।
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने आगामी 17 अक्टूबर को जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका सेक्टर-10 रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव और अन्य सदस्यों ने दायर की है। इसमें बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई अन्य जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तौर पर निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उल्लंघन है।
इतना ही नहीं, यह प्रावधान चंडीगढ़ के वास्तविक प्लान का भी उल्लंघन है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट की विभिन्न मंजिल अलग-अलग लोगों को बेची जाएंगी, तो जनसंख्या घनत्व में वृद्धि के साथ-साथ इन जगहों पर भारी संख्या में वाहन की पार्किंग स्पेस सहित कई और बुनियादी समस्याएं भी पैदा होंगी।
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याचिका में बताया गया है की प्रशासन ने साल 2001 में अपार्टमेंट एक्ट बनाया था, लेकिन शहरवासियों की ओर से विरोध को देखते हुए साल 2007 में इसे वापस ले लिया गया। लोग यह नहीं चाहते थे कि शहर के खूबसूरत आवासीय इमारतों को अपार्टमेंट में बदलकर इनकी खूबसूरती खत्म की जाए। यह भी बताया गया की शहर में पहले ही अधिक वाहन हैं। एक यूनिट को अपार्टमेंट में तब्दील किए जाने से वाहनों की संख्या तीन गुना तक बढ़ जाएंगी, जिसका असर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा।
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याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस लीजा गिल की खंडपीठ ने आगामी 17 अक्टूबर को जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका सेक्टर-10 रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव और अन्य सदस्यों ने दायर की है। इसमें बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों से सेक्टर-10 सहित कई अन्य जगहों पर रिहाइशी प्लॉट्स का अवैध तौर पर निर्माण कर उन्हें अपार्टमेंट्स के तौर पर बेचा जा रहा है। यह न सिर्फ चंडीगढ़ के मास्टर प्लान के खिलाफ है, बल्कि प्रशासन के कई बायलॉज और निर्देशों का उल्लंघन है।
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इतना ही नहीं, यह प्रावधान चंडीगढ़ के वास्तविक प्लान का भी उल्लंघन है। अगर अपार्टमेंट के प्रावधान को मंजूरी दी गई है तो इससे शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोझ काफी बढ़ जाएगा, क्योंकि जब एक ही प्लॉट की विभिन्न मंजिल अलग-अलग लोगों को बेची जाएंगी, तो जनसंख्या घनत्व में वृद्धि के साथ-साथ इन जगहों पर भारी संख्या में वाहन की पार्किंग स्पेस सहित कई और बुनियादी समस्याएं भी पैदा होंगी।
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याचिका में बताया गया है की प्रशासन ने साल 2001 में अपार्टमेंट एक्ट बनाया था, लेकिन शहरवासियों की ओर से विरोध को देखते हुए साल 2007 में इसे वापस ले लिया गया। लोग यह नहीं चाहते थे कि शहर के खूबसूरत आवासीय इमारतों को अपार्टमेंट में बदलकर इनकी खूबसूरती खत्म की जाए। यह भी बताया गया की शहर में पहले ही अधिक वाहन हैं। एक यूनिट को अपार्टमेंट में तब्दील किए जाने से वाहनों की संख्या तीन गुना तक बढ़ जाएंगी, जिसका असर शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा।