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हरियाणा: निजी नौकरियों में 75 फीसदी आरक्षण अधिनियम को चुनौती, याचिकाकर्ता ने कहा- युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन

Wed, 24 Nov 2021 08:21 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 24 Nov 2021 08:21 PM IST
सार

हरियाणा सरकार ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय युवाओं के लिए 75 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है। इस अधिनियम के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह अधिनियम लागू होने से उद्योग प्रदेश से करेंगे पलायन।

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Petition filed in High Court against 75 percent reservation in private jobs in Haryana
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय निवासियों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य करने के प्रावधान को गुरुग्राम इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में याचिका दाखिल की जा चुकी है जिस पर हाईकोर्ट जल्द सुनवाई करेगा।

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याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। अगर नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। 
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यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं। याची ने कहा कि यह कानून योग्यता के बदले रिहायश के आधार पर निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की पद्धति को शुरू करने का प्रयास है। ऐसा हुआ तो हरियाणा में निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी। 
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यह कानून निजी क्षेत्र के विकास को भी बाधित करेगा और इसके कारण राज्य से उद्योग पलायन भी आरंभ कर सकते हैं। याची ने कहा कि यह कानून वास्तविक तौर पर कौशलयुक्त युवाओं के अधिकारों का हनन है। 75 फीसदी नौकरियां आरक्षित करने के लिए 2 मार्च, 2021 को लागू अधिनियम और 6 नवंबर, 2021 की अधिसूचना संविधान, संप्रभुता के प्रावधानों के खिलाफ है।

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