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विश्व जल दिवस विशेष: पानी की खपत में न्यूयार्क सिटी से भी आगे चंडीगढ़ के वीआईपी सेक्टर, प्रति व्यक्ति खपत 300 लीटर 

Tue, 22 Mar 2022 11:58 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 22 Mar 2022 11:58 AM IST
सार

पेक के निदेशक बलदेव सेतिया का कहना है कि ब्राजील के बाद भारत में सबसे ज्यादा बारिश होती है। चंडीगढ़ के पास कोई नदी नहीं है, इसलिए हम कजौली वाटर वर्क्स पर पूरी तरह निर्भर हैं।

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People living in VIP sectors of Chandigarh have consumed more water than New York City  
भूगर्भ जल दोहन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पानी खर्च करने के मामले में चंडीगढ़ के वीआईपी सेक्टरों में रहने वालों ने न्यूयार्क सिटी को भी पीछे छोड़ दिया है। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के उपनिदेशक डॉ. सीबी जोन के अनुसार, सेक्टर-1 से लेकर 11 तक प्रति व्यक्ति पानी की खपत 300 लीटर है जबकि न्यूयार्क सिटी में यह आंकड़ा 280 लीटर प्रति व्यक्ति है। फिलहाल स्थिति भयावह नहीं है लेकिन हम आज नहीं चेते तो भविष्य में स्थिति चिंताजनक हो जाएगी। वहीं शहर के दक्षिणी सेक्टरों में प्रति व्यक्ति पानी की खपत 135 लीटर है।

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चंडीगढ़ में लगातार भूजल दोहन से जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। साल दर साल स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 100 प्रतिशत भूमिगत जल में से चंडीगढ़ 57.38 प्रतिशत का दोहन कर लेता है। अकेले मनीमाजरा में 100 प्रतिशत भूजल में से 80 प्रतिशत का दोहन होता है, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 65 प्रतिशत तक था। यह क्षेत्र चिंताजनक स्थिति में है। यही कारण है स्मार्ट सिटी पायलट परियोजना के अंतर्गत यहां सातों दिन 24 घंटे पेयजल आपूर्ति योजना का काम शुरू कर दिया गया है। 
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मंत्रालय के अनुसार, चंडीगढ़ ने भूमिगत जल को बचाने के लिए 2017 के बाद से कोई ठोस कदम नहीं उठाए। यही वजह है कि रिपोर्ट में उसे काफी कम नंबर मिले हैं। हालांकि निगम का दावा है उनके सीवर ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेड हो गए हैं, इसलिए अब पानी की खपत कम होगी और भूमिगत जल का दोहन भी कम होगा। 

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आज जलस्तर 120 मीटर पर चला गया है :  डॉ. बलदेव सेतिया

पेक के निदेशक बलदेव सेतिया का कहना है कि ब्राजील के बाद भारत में सबसे ज्यादा बारिश होती है। चंडीगढ़ के पास कोई नदी नहीं है, इसलिए हम कजौली वाटर वर्क्स पर पूरी तरह निर्भर हैं। एक अनुमान के अनुसार, शहर को 90 एमजीडी पानी चाहिए, जबकि कजौली से हमें 97 एमजीडी पानी मिल रहा है। शहर में 300 ट्यूबवेल हैं, इन्हें कम करना होगा। एक समय 80 मीटर पर हमें मीठा पानी मिल जाता था, आज यह जलस्तर गिरकर 120 से नीचे चला गया है।  

बैठक तक सीमित रहे अधिकारी, धरातल पर कुछ नहीं किया

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए अधिकारी महज कागजों में ही काम करते रहे, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। एनजीटी की फटकार के बाद निगम ने कैंबवाला, सारंगपुर और खुड्डा अलीशेर और प्रशासन मलोया, धनास गांव और कैंबवाला के दूसरे तालाब गोद लेने का फैसला किया है। वर्ष 2019 में जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के 254 जिलों की सूची जारी कर बताया था कि इन शहरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सूची में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। उसके बाद निगम ने खुड्डा अलीशेर का पक्का तालाब और प्रशासन ने सेक्टर-43 की झील को गोद लिया था।

गांव के तालाबों पर कब्जा तो कहीं अपने हालात बदतर 

गांव में बने तालाबों की हालत खस्ता है। दड़वा में तालाब पर पार्क बना दिया गया है, वहीं डड्डूमाजरा में तालाब सूखा पड़ा है। धनास का तालाब बदहाल है तो कैंबवाला और खुड्डा जस्सू में अभी तालाबों को सहेज कर रखा गया है। सांसद आदर्श गांव सारंगपुर, खुड्डा अलीशेर और बहलाना के तालाब पर कब्जा हो चुका है, वहीं गंदगी का अंबार लगा है।

मनीमाजरा और शहर में दो अलग-अलग योजनाओं के अंतर्गत 24 घंटे 7 दिन पेयजल आपूर्ति योजना बनाई है। मनीमाजरा में काम शुरू हो गया है, वहीं शहर का प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है। दोनों प्रोजेक्ट शुरू होते ही इस समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम

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