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दर्द दे रहा इलाज: हरियाणा के अस्पतालों में हो रही लूट, कहीं लंबा चौड़ा बिल तो कहीं शव से गहने गायब

Thu, 27 May 2021 05:46 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 27 May 2021 05:46 PM IST
सार

कोरोना ने इस समय पूरे देश में हाहाकार मचाया हुआ है। ये मर्ज ऐसा है कि जिसकी कोई दवा नहीं है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए डॉक्टर भगवान और अस्पताल मंदिर समान है। कहीं लोगों को सहारा मिल रहा है तो कहीं इस मर्ज के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है। हरियाणा में भी कुछ ऐसा ही हाल है। सरकार इस संकट के काल में अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर सख्त है, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी तक दी गई है, लेकिन कुछ अस्पताल इस आपदा को अवसर में बदल रहे हैं। 

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People are receiving pain from hospitals in exchange of treatment In Haryana 
अस्पतालों से मरीजों को मिल रहा दर्द। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अस्पतालों में लोगों को इलाज के बदले दर्द मिल रहा है। कहीं मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद परिजनों को लंबा चौड़ा बिल थमाया जा रहा है तो कहीं मृतकों के लाखों के गहने गायब हो रहे हैं। करनाल में एक मरीज के घरवालों से 44 हजार रुपये पीपीई किट के नाम पर मांगे गए तो चंडीगढ़ में तो 21 घंटे का बिल लगभग 48 हजार रुपये बना दिया गया। वहीं यमुनानगर में तो हद ही हो गई। अस्पताल में मौत के बाद जब महिला का शव उसके परिजनों को सौंपा गया तो महिला के गहने गायब थे।  

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करनाल: 21 दिन का बिल 4.62 लाख, इसमें 44 हजार पीपीई किट के
हरियाणा के करनाल में जीटी रोड स्थित पार्क हॉस्पिटल में कोविड-19 मरीज के परिजनों को जो बिल दिया गया उसमें पीपीई किट का दाम देखकर परिजन भौचक्के रह गए। इस मामले में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी ने भी जीटी रोड स्थित पार्क अस्पताल में पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। असंध निवासी रोहित ने आरोप लगाया था कि उसके पिता बलविंद्र (53) को कोरोना पॉजिटिव होने पर चार मई को पार्क अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया था। दो दिन बाद अस्पताल की ओर से फोन आया और उसे 50 हजार रुपये जमा कराने को कहा गया। उसने पैसे जमा करा दिए। ऐसे ही हर दो दिन बाद फोन आने लगा और वह रुपये जमा कराता रहा। जब पिता को अस्पताल ने छुट्टी दी तो उसका बिल 4.62 लाख रुपये बना दिया। जब उसे बिल मिला तो उसमें 44 हजार रुपये पीपीई किट के जोड़े गए थे। 80 हजार रुपये करीब इंजेक्शन के लगाए गए थे। जब उसने बिल में मनमानी फीस का विरोध किया तो उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उसे अस्पताल से निकाल दिया गया  

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यमुनानगर: महिला के शव से कई लाख रुपये के गहने चोरी
यमुनानगर के गाबा अस्पताल में एक महिला मरीज की मौत के बाद उसके गहने चोरी हो गए। महिला के बेटे की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सहारनपुर के पंजाबी बामे निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने यमुनानगर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 16 मई को उसकी मां सुनीता सिंह (52) को गाबा अस्पताल में भर्ती कराया था। उस दिन उसकी मां के गले में सोने की चेन, कानों में सोने की बालियां, हाथ में सोने की अंगूठी थी, जिसकी कीमत लाखों में थी।

24 मई की रात करीब 8 बजे अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बताया कि सुनीता की मौत हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें मां का शव दिया तो उनके गहने गायब थे। गाबा अस्पताल के सीईओ राहुल बेदी का कहना है कि हमने अपने स्तर पर सीसीटीवी फुटेज देखी है, लेकिन महिला के शरीर पर कोई गहने नहीं दिखाई दे रहे हैं। आरोप गलत हैं। हम पुलिस की जांच में सहयोग को तैयार हैं। जांच अधिकारी अनूप सिंह का कहना है कि मृत महिला के बेटे की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ गहने चोरी करने का केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है। 

चंडीगढ़ : 21 घंटे जनरल वार्ड में भर्ती मरीज का बिल बनाया 47 हजार 901 रुपये
चंडीगढ़ के ईडन अस्पताल पर आरोप लगा है कि मरीज को महज 21 घंटे के लिए जनरल वार्ड में भर्ती कर इलाज करने के एवज में अस्पताल ने 47901 रुपये वसूल लिए। पंचकूला निवासी 68 वर्षीय निर्मल कांता के बेटे विवेक ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने पर उन्होंने अपनी मां को 21 अप्रैल को ईडन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। रिसेप्शन पर 50000 रुपये एडवांस में जमा करवा लिए गए। इसके बाद मां को जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया गया। 

अगली सुबह 22 अप्रैल को जब वह अपनी मां से मिले तो उन्होंने बताया कि उन्हें रात को अस्पताल में भोजन भी नहीं मिला और कोई डॉक्टर भी देखने नहीं आया। उन्होंने अपनी मां को वहां से डिस्चार्ज करवा लिया। डिस्चार्ज के दौरान उन्हें 47901 रुपये का बिल थमा दिया गया। इसमें केवल सीटी स्कैन का नाम लिखा हुआ था। जब वह अपनी मां को डिस्चार्ज करा कर दूसरे अस्पताल में ले जा रहे थे उसी दौरान उनके पिता के पास ईडन हॉस्पिटल से कॉल आई कि उनके मरीज की स्थिति गंभीर है। इलाज जारी रखने के लिए और 50000 रुपये तत्काल जमा करवा दें। मरीज को डिस्चार्ज करवाने की बात सुनने के बाद भी कॉल करने वाले ने कहा कि अगर आपको भरोसा नहीं है तो मैं आपके मरीज से आपकी बात करवा सकता हूं।  स्वास्थ्य विभाग को शिकायत दे दी गई है।

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