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आवक बढ़ी, पर गिरते दामों ने बढ़ाई चिंता
ब्यूरो/अमर उजाला कैथ्ाल
Updated Sun, 21 Sep 2014 11:59 PM IST
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कैथल। अनाज मंडियों में धान की आवक बेशक लगातार बढ़ रही है। लेकिन दामों में गिरावट जारी है। रविवार को धान की 1509 की कीमतें गिरकर 2300 से लेकर 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक रहीं। इस कारण अब किसान बुरी तरह से मायूस हैं। इसी किस्म की कीमत बीते सीजन में 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक थी। किसानाें का कहना है कि इस बार खर्च भी पूरा नहीं हो पाएगा। वहीं अनाज मंडी में सड़कों की खस्ता हालत भी परेशानी का सबब बनी हुई है।
आवक तो बढ़ी पर खरीदार नहीं
अनाज मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है। नई अनाज मंडी में रविवार को करीब 15000 बोरियों की आवक हुई। जिसे खरीदने को लेकर ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। पिछले तीन दिनों में 1509 की कीमतों में काफी गिरावट आई है। शुरुआत में यह जहां 3000 रुपये से ज्यादा बिका था। वहीं अब करीब 10-12 दिनों में कीमतें इससे भी गिरकर 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। किसानों को भय सता रहा है कि जैसे-जैसे आवक बढ़ेगी, कीमतें इसी तरह गिरती रहेंगी और ऐसे में तो उनका खर्च भी पूरा नहीं हो पाएगा। किसान सतनारायण, कृष्ण कुमार, रोहताश, भगवानदास ने कहा कि पिछले सीजन में यही धान 4000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिका था। जिस कारण पूरे क्षेत्र में किसानों का रुझान बासमती की ओर बढ़ा था। क्षेत्र में मोटे चावल की अपेक्षा किसानों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा इलाके में बासमती ग्रुप का चावल पैदा किया है।
पहले बारिश और अब कीमतों ने मारा : किसान
किसानों ने बताया कि शुरुआत में बरसात न होने के कारण जैसे-तैसे धान को बचाया। इसके बाद जब यह पकने के निकट थी तो बरसात से नुकसान पहुंचा। रही सही कसर अब रेट ने निकाल दी। पहले ही प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल के मुकाबले कम उत्पादन हुआ है। अब कीमतों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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नई अनाज मंडी में सड़कों की हालत खस्ता
नई अनाज मंडी में सड़कों की हालत खस्ता है। सीजन से पूर्व इन पर ध्यान नहीं दिया गया। जिस कारण अब मजदूरों एवं किसानों को काफी परेशानियां हो रही हैं। मंडी के जींद रोड की ओर प्रवेश द्वार पर सड़क काफी खस्ता है।
इसीलिए गिरे रेट
चावल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान विजय सेतिया ने कहा कि पिछली बार धान की कीमतें अनापशनाप थीं। उसका खामियाजा अभी तक निर्यातक भुगत रहे हैं। इस बार विदेशी ग्राहकों को पता है कि इंडिया में बंपर फसल हुई है। जिस कारण धान की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बार बासमती का ज्यादा उत्पादन होने जा रहा है। वहीं अभी तक पिछले साल के सौदे भी पूरे नहीं हुए हैं। जिस कारण नया रेट भी नहीं आया है।
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आवक तो बढ़ी पर खरीदार नहीं
अनाज मंडियों में धान की आवक लगातार बढ़ रही है। नई अनाज मंडी में रविवार को करीब 15000 बोरियों की आवक हुई। जिसे खरीदने को लेकर ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा है। पिछले तीन दिनों में 1509 की कीमतों में काफी गिरावट आई है। शुरुआत में यह जहां 3000 रुपये से ज्यादा बिका था। वहीं अब करीब 10-12 दिनों में कीमतें इससे भी गिरकर 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई हैं। किसानों को भय सता रहा है कि जैसे-जैसे आवक बढ़ेगी, कीमतें इसी तरह गिरती रहेंगी और ऐसे में तो उनका खर्च भी पूरा नहीं हो पाएगा। किसान सतनारायण, कृष्ण कुमार, रोहताश, भगवानदास ने कहा कि पिछले सीजन में यही धान 4000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास बिका था। जिस कारण पूरे क्षेत्र में किसानों का रुझान बासमती की ओर बढ़ा था। क्षेत्र में मोटे चावल की अपेक्षा किसानों ने 80 प्रतिशत से ज्यादा इलाके में बासमती ग्रुप का चावल पैदा किया है।
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पहले बारिश और अब कीमतों ने मारा : किसान
किसानों ने बताया कि शुरुआत में बरसात न होने के कारण जैसे-तैसे धान को बचाया। इसके बाद जब यह पकने के निकट थी तो बरसात से नुकसान पहुंचा। रही सही कसर अब रेट ने निकाल दी। पहले ही प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल के मुकाबले कम उत्पादन हुआ है। अब कीमतों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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नई अनाज मंडी में सड़कों की हालत खस्ता
नई अनाज मंडी में सड़कों की हालत खस्ता है। सीजन से पूर्व इन पर ध्यान नहीं दिया गया। जिस कारण अब मजदूरों एवं किसानों को काफी परेशानियां हो रही हैं। मंडी के जींद रोड की ओर प्रवेश द्वार पर सड़क काफी खस्ता है।
इसीलिए गिरे रेट
चावल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान विजय सेतिया ने कहा कि पिछली बार धान की कीमतें अनापशनाप थीं। उसका खामियाजा अभी तक निर्यातक भुगत रहे हैं। इस बार विदेशी ग्राहकों को पता है कि इंडिया में बंपर फसल हुई है। जिस कारण धान की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बार बासमती का ज्यादा उत्पादन होने जा रहा है। वहीं अभी तक पिछले साल के सौदे भी पूरे नहीं हुए हैं। जिस कारण नया रेट भी नहीं आया है।