मोहालीः लॉकडाउन के दौरान नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़ी मरीजों की संख्या, 3036 ने कराया पंजीकरण
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कोरोना महामारी के चलते लगाए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौरान भले ही लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं और उन्हें कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। लेकिन इसके चलते जिले के लिए एक अच्छी खबर भी सामने आई है। जिसमें जिला मोहाली में चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों और क्लीनिकों में नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों की संख्या में एकदम बढ़ोतरी हुई है।
जी हां, आपको बता दें कि यह अच्छी खबर है कि 23 मार्च से लेकर एक मई तक जिले मोहाली में नशा छोड़ने के इच्छुक 3036 नए मरीजों का पंजीकरण हुआ है। जो कि अपने आप में एक चौंकाने वाला रिकॉर्ड है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से भी लोगों के साहस को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एक तरफ जहां उन्हें कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचने के टिप्स दिए जा रहे हैं। वहीं, उनकी नशा छोड़ने के लिए काउंसिलिंग कर नशे की लत से मुक्ति दिलाई जा रही है।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू भी पंजाब से नशा मुक्ति को लेकर काफी गंभीर हैं। उन्होंने भी साफ कहा है कि नशा मुक्ति केंद्रों में किसी भी तरह की सुविधा की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। जिला स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि जो नशा छोड़ने के इच्छुक नए मरीज आए हैं, उन्होंने जिले के नशा मुक्ति केंद्रों और क्लीनिकों में खुद पहुंचकर नशा छोड़ने की इच्छा जाहिर की है।
इसको देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने सभी ओट क्लीनिक और नशा मुक्ति केंद्रों के खोलने का समय सुबह 8 बजे करके नए रजिस्ट्रेशन के लिए अलग काउंटर लगाने की हिदायत दी है। जिससे मरीजों की लंबी लाइनें न लगें। डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने नशा पीड़ितों के लिए विशेष प्रबंध किए हैं।
नशा मुक्ति केंद्रों में दवाई देते समय सामाजिक दूरी का खास ध्यान रखा जा रहा है और मरीजों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है। मरीजों को समझाया जा रहा है कि उन्हें बुखार, सूखी खांसी या सांस लेने में मुश्किल आती है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाएं या फिर विभाग की हेल्पलाइन नंबर-104 पर संपर्क करें।
अब घर ले जा सकते हैं 21 दिन की दवा
डॉ. दलजीत सिंह ने बताया कि इलाज सेवाएं न मिलने की सूरत में मरीज के इलाज छोड़ने की संभावना रहती है। जो कि मरीज के लिए घातक हो सकता है। ऐसे में अब घर ले जाने के लिए दवाई की अवधि 21 दिन तक कर दी गई है। हालांकि यह दवा मनोरोग विशेषज्ञों की सलाह पर ही मरीज को दी जाती है।
अभी जिले में तीन मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा गर्ग, डॉ. गुरमुख सिंह और डॉ. नितिन सेठी सेवाएं दे रहे हैं। बता दें कि मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर और काउंसलर कोविड-19 मरीजों, क्वारंटीन किए लोगों और प्रवासी मजदूरों का लगातार हौंसला बढ़ा रहे हैं।