कैप्टन का 'कांग्रेसी' किला गिराने में जुटेंगे बाजवा
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा अब लोकसभा में पार्टी के उपनेता कैप्टन अमरिंदर सिंह का मजबूत किला ढहाने में जुटेंगे। कैप्टन के करीबी विधायकों को साथ लाने की आखिरी कोशिश की जाएगी। उसके बाद बाजवा अपनी टीम बनाएंगे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह की ललकार रैली में विधायकों को रोकने के लिए बाजवा ने पूरा जोर लगा दिया। पंजाब के सह-प्रभारी हरीश चौधरी से भी फोन करवाए। उसके बाद भी 35 विधायक रैली में पहुंच गए।
इससे पहले भी बाजवा कैप्टन गुट के विधायकों को अपने साथ लाने की नाकाम कोशिशें कर चुके हैं। ललकार रैली के बाद अब बाजवा गुट ने अपनी रणनीति में बदलाव किया।
विधायकों को साथ लाने की आखिरी कोशिश करेंगे
अब बाजवा गुट विधायकों को अपने साथ लाने की आखिरी कोशिश करेगा। जो विधायक बाजवा गुट में आ गए, उन्हें मार्च में होने वाली किसान रैली में भीड़ जुटा कर इसका सबूत देना होगा कि वे बाजवा के साथ हैं।
बाजवा गुट मान कर चल रहा है कि ज्यादातर विधायक साथ नहीं आएंगे। उस स्थिति के लिए प्लान-बी भी तैयार कर लिया गया है, जो विधायक बाजवा गुट में नहीं आएंगे, उनके विरोधियों को मजबूत किया जाएगा।
हर विधायक के हलके में टिकट के कई दावेदार हैं। उनमें से जो भी मजबूत होगा, उसे बाजवा अपनी टीम में शामिल करेंगे। किसान रैली में भीड़ भी वही लोग लेकर आएंगे।
बाद में बाजवा उन्हें ही विधानसभा उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करेंगे। उन्हीं के लिए टिकट की लड़ाई लड़ी जाएगी। बाजवा गुट ने इस रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। एक-एक विधायक से संपर्क किया जा रहा है।