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Chandigarh Parking Policy: चार साल में बनी पार्किंग नीति 2020 में लागू... आज तक धरातल पर नहीं उतरी

Thu, 03 Nov 2022 02:15 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 03 Nov 2022 02:15 AM IST
सार

ज्यादा कर्मचारियों वाले दफ्तरों के लिए बस चलाने, कॉलेजों में गाड़ी से आने वाले छात्रों के यूजर फीस को बढ़ाने या पूरी तरह से रोक लगाने की सलाह दी गई थी ताकि छात्र बड़ी गाड़ियां न लेकर आएं। अगर इन नियमों को प्रशासन समय रहते लागू करा देता तो शहर में पार्किंग की समस्या पैदा नहीं होती।

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Parking Policy: Prepared in four years, implemented in 2020... has not landed on the ground till date
Chandigarh Parking

विस्तार

चंडीगढ़ में पार्किंग की समस्या ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया है लेकिन प्रशासनिक अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। स्थिति यह है कि कई इलाकों में इमरजेंसी की स्थिति में आप रात को अपनी गाड़ी तक नहीं निकाल सकते। शहर के लिए पार्किंग नीति पर वर्ष 2016 से काम शुरू हुआ और उसे बनाने में चार साल लग गए। वर्ष 2020 में जैसे-तैसे यह नीति बनी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दबाव में आनन-फानन जारी कर दी गई लेकिन आज तक पार्किंग नीति को धरातल पर नहीं उतारा गया है जिसका खामियाजा शहरवासी भुगत रहे हैं।
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हालत यह है कि आज लगभग सभी सेक्टरों में पार्किंग की समस्या है। गांव-कॉलोनियों में हालात काबू से बाहर हो चुके हैं। धनास, मलोया, मौलीजागरां, विकास नगर, रामदरबार, हल्लोमाजरा समेत विभिन्न इलाकों में घरों के बीच बने छोटे पार्क अब लगभग खत्म हो चुके हैं। यहां लोग गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। सेक्टरों व अन्य जगहों पर गाड़ियां बेतरतीब ढंग से खड़ी हो रही हैं। इस सभी समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए प्रशासन ने पार्किंग नीति बनाई। इसमें साइक्लिंग को बढ़ावा देने और कारों का कम इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। नियम बनाया गया कि गाड़ी खरीदते समय लोगों को पार्किंग स्पेस सर्टिफिकेट देना होगा। विभाग की टीम इसका सत्यापन भी करेगी हालांकि ऐसा कुछ हो नहीं रहा। 
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ज्यादा कर्मचारियों वाले दफ्तरों के लिए बस चलाने, कॉलेजों में गाड़ी से आने वाले छात्रों के यूजर फीस को बढ़ाने या पूरी तरह से रोक लगाने की सलाह दी गई थी ताकि छात्र बड़ी गाड़ियां न लेकर आएं। अगर इन नियमों को प्रशासन समय रहते लागू करा देता तो शहर में पार्किंग की समस्या पैदा नहीं होती।
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रात को लोग सड़कों पर बेतरतीब खड़ी कर देते हैं गाड़ियां
गांव-कॉलोनियों में गाड़ी खड़ी हो जाने के बाद रात के समय रास्ते बंद हो जाते हैं। कई सेक्टरों की अंदरूनी गलियों के भी कमोबेश यही हालात हैं। एक स्टडी के अनुसार, 98 फीसदी लोग रात के समय मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल जाने के लिए अपनी ही गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं जबकि शहर के कई इलाके हैं जहां रात में जरूरत पड़ जाए तो आप अपनी गाड़ी नहीं निकाल सकते हैं।

दिसंबर 2020 में नीति लागू, जून 2022 में पायलट प्रोजेक्ट चलाने का फैसला
पार्किंग को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बाद प्रशासन ने जून 2022 में एक बैठक की और फैसला लिया गया कि नीति को पहले कुछ चुनिंदा सेक्टरों में पायलट प्रोजेक्ट की तरह लागू किया जाएगा। अगर सफलता मिली तो फिर पूरे शहर में लागू किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई और सेक्टर-34, 35 और 15 को पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया। निगम और ट्रैफिक पुलिस की ज्वाइंट टीमों ने कई बार सेक्टर का दौरा किया। आरडब्ल्यूए के साथ बैठक की लेकिन कोई भी कम्यूनिटी पार्किंग के लिए पैसे देने को तैयार नहीं हुआ इसलिए पार्किंग नीति फिर ठंडे बस्ते में चली गई है।

सामुदायिक पार्किंग पर जोर
पार्किंग नीति में शामिल सामुदायिक पार्किंग पर प्रशासन काफी जोर दे रहा है। कहा जा रहा है कि समस्या को दूर करने में सामुदायिक पार्किंग एक अच्छा रोल निभा सकता है। शहर के स्कूल, इंस्टीट्यूशन व अन्य जहां भी खाली जगह मौजूद हैं, नॉन वर्किंग ऑवर में इनका इस्तेमाल पार्किंग के लिए किया जा सकता है। हालांकि इसके इस्तेमाल के लिए लोगों को पैसे चुकाने होंगे इसलिए जब सेक्टर-34, 35 में लोगों से इस बारे में चर्चा की गई तो उन्होंने इसका विरोध किया।

पार्किंग नीति के मुख्य बिंदु
- सरकारी, पीएसयू, इंडस्ट्रियल और आईटी कंपनियों में 50 से ज्यादा कर्मचारी होने पर शटल बस सेवा देनी होगी
- पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के ऑफिस के समय में बदलाव करना होगा। स्कूलों के समय को भी अलग-अलग करना होगा
- सभी सब-सेक्टरों में सामुदायिक पार्किंग की शुरुआत की जाएगी
- पार्किंग में बैठे वेंडरों को हटाया जाएगा और उन्हें उनकी जगह पर शिफ्ट किया जाएगा
- शहर में किसी कार्यक्रम, मेला, आयोजन की तभी मंजूरी मिलेगी, जब आयोजक लोगों को लाने और ले जाने के लिए शहर के प्रमुख प्वाइंट से शटल बस सेवा की सुविधा देंगे

- सभी स्कूल, कॉलेज, सरकारी व प्राइवेट संस्थानों को पिक एंड ड्रॉप ऑफ जोन घोषित करने होंगे
- एंबुलेंस, फायर टेंडर, पुलिस की गाड़ियों के लिए एक अलग से लेन की शुरुआत करनी होगी
- घर के पास सड़क पर गाड़ी खड़ी कर सकेंगे लेकिन लोगों को पैसे चुकाने समेत कई अन्य हैं

पार्किंग नीति पर चंडीगढ़ प्रशासन काम कर रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ सेक्टरों को चुना गया है। वहां पर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की टीम काम कर रही है। लोगों से बातचीत की जा रही है। हमारी कोशिश है कि ज्यादा भीड़भाड़ वाले सेक्टरों में सामुदायिक पार्किंग बने ताकि लोगों को राहत मिले। पायलट प्रोजेक्ट की रिपोर्ट नगर निगम बना रहा है।  - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक
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