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महंगी होती पढ़ाई: स्कूल-पब्लिशर और दुकानों के भंवर में फंसे अभिभावक, आठ हजार रुपये तक बिक रही पुस्तकें

Tue, 02 Apr 2024 03:26 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 02 Apr 2024 03:26 PM IST
सार

प्रशासन के दिशानिर्देश अनुसार स्कूल परिजनों की किसी निश्चित दुकान जाने के लिए नहीं कहता लेकिन ऐसे पब्लिशर की किताबों की सूची देता है जो मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ में सिर्फ एक जगह उपलब्ध हैं।

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Parents have forced to buy books from specified booksellers from schools
महंगी होती पढ़ाई - फोटो : संवद

विस्तार

छह हजार की पुस्तकें, चार हजार की यूनिफॉर्म, 20 हजार की क्वार्टरली फीस। अगर दो बच्चे हुए तो इसका दुगना यानी 60 हजार के करीब खर्चा अभिभावक का नए शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही हो जाता है। इसके अलावा परिवहन शुल्क भी रह जाता है। किताबें, वर्दी खरीदने में इतने पैसे क्यों लग रहे हैं, चंडीगढ़ समेत ट्राईसिटी में सिर्फ एक ही बुकसेलर के पास स्कूल की पुस्तकें क्यों हैं, यह कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका किसी के पास कोई जवाब नहीं है। स्कूल-पब्लिशर और दुकानों के भंवर में अभिभावक फंसे हुए हैं। यह सब होता देखकर भी शिक्षा विभाग ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।

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प्रशासन के दिशानिर्देश अनुसार स्कूल परिजनों की किसी निश्चित दुकान जाने के लिए नहीं कहता लेकिन ऐसे पब्लिशर की किताबों की सूची देता है जो मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ में सिर्फ एक जगह उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर मानव मंगल स्मार्ट वर्ल्ड स्कूल जीरकपुर, सेक्टर-88, सेक्टर-64 मोहाली और सेक्टर-21 चंडीगढ़ द्वारा निर्धारित पुस्तकें अभिभावकों को सिर्फ सेक्टर-19 के मनचंदा बुक हाउस में मिलती हैं।
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मनचंदा बुक्स और स्टेशनरी की दुकान पर संचालक का कहना था कि वह स्कूल की वेबसाइट से पुस्तकें देखकर रखते हैं। उनका स्कूल के साथ कोई टाइअप नहीं। वहीं, स्कूल द्वारा वेबसाइट पर उल्लेखनीय है कि अभिभावक कहीं से भी पुस्तकें खरीद सकते हैं। इसी तरह शहर के सभी डीएवी स्कूलों की आठवीं तक की पुस्तकें सिर्फ न्यू फेंसी बुक स्टोर सेक्टर-सात, फेंसी यूनिफॉर्मज एंड बुक्स सेक्टर-सात और मध्य मार्ग या मनचंदा मिक्स्डबैग सेक्टर-16 पंचकूला में मिलती हैं। सत्र 2024-25 के लिए सेक्टर सात स्थित केबीडीएवी स्कूल द्वारा जारी नोटिस में पुस्तकें लेने के लिए इन तीन दुकानों का जिक्र किया है।
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स्टेशनरी तक वापस नहीं देते निजी स्कूल  
सोमवार को सेक्टर-19 स्थित मनचंदा बुक्स एंड स्टेशनरी शॉप पर पुस्तकें खरीदने के लिए कतार में लगे अभिभावकों ने बताया कि हजारों का स्टेशनरी का सामान स्कूल अपने पास रख लेता है। सेक्टर-29 स्थित एक निजी स्कूल की केजी कक्षा की पुस्तकें खरीदने के लिए मनचंदा आए अभिभावकों ने बताया कि पिछले साल नर्सरी के लिए स्कूल से दी सूची में 1500 का सामान सिर्फ स्टेशनरी का था। यह सारा सामान वह स्कूल में जमा कर देते हैं जो उन्हें वापस नहीं मिलता। घर पर बच्चे को होमवर्क करवाने के लिए अलग से स्टेशनरी लेनी पड़ती है।

निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के दाम एनसीईआरटी की पुस्तकों से सात गुना अधिक
स्कूलों द्वारा बच्चों के लिए ऐसी पुस्तकें निर्धारित की गई हैं, जिनके दाम एनसीईआरटी की पुस्तकों से कई अधिक हैं। मानव मंगल स्कूल में पांचवीं कक्षा में हिंदी की पुस्तक नूतन सरल हिंदी माला 450 रुपये की है। वहीं, एनसीईआरटी द्वारा पांचवीं कक्षा की निर्धारित हिंदी पुस्तक रिमझिम मात्र 65 रुपये की है। इसी तरह सेंट मेरी स्कूल द्वारा यूकेजी के लिए सेपलिंग्स प्रकाशक की लगाई लर्न टू राइट कर्सिव वर्ड्ज पुस्तक 260 रुपये की है, वहीं ऑनलाइन समान पाठ्यक्रम की पुस्तकें 100-120 रुपये में उपलब्ध हैं।

निश्चित सेलर से किताबें खरीदवाने के लिए पैंतरे अपना रहे स्कूल  
अभिभावक निश्चित बुकसेलर के पास से ही पुस्तकें खरीदें, इसलिए निजी स्कूलों की ओ से पैंतरे अपनाए जा रहे हैं। कुछ स्कूलों ने हाल में मार्च माह के अंत में हुई पीटीएम में अभिभावकों को पुस्तकें लेने के लिए कह दिया। कुछ परिजनों को पुस्तकों और यूनिफार्म के लिए दुकानदार के कार्ड दिए हैं। डीएवी स्कूल द्वारा तो नोटिस में ही वेंडर के नाम लिखे हैं। अन्य स्कूलों में व्हाट्सएप ग्रुप, एसएमएस के जरिए निश्चित दुकानदार से चीजें लेने के लिए कहा जा रहा है।

पुस्तकों के सेट इतने के
एलकेजी - 4763
पांचवीं कक्षा - 6362
सातवीं कक्षा - 5723
आठवीं कक्षा - 5584
नौवीं कक्षा - 5451

एनसीईआरटी की पुस्तकों में कई गलतियां
एनसीईआरटी की पुस्तकों में कई गलतियां हैं। निजी स्कूल प्रशासन को पत्र लिखकर थक गए हैं कि उनकी पुस्तकों में गलतियों को सुधारा जाए। इसलिए निजी स्कूल आवश्यकता अनुसार अन्य प्रकाशकों की पुस्तकें निर्धारित कर रहे हैं। अगर अभिभावक पुस्तकों का दाम नहीं दे सकते तो सरकार पैसे दे। -एचएस मामिक, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन अध्यक्ष

पुस्तकें निर्धारित करने की निजी स्कूलों के पास शक्ति

विभाग निजी स्कूलों को सीबीएसई के पाठ्यक्रम अनुसार पुस्तकें लगाने की सिफारिश कर सकता है लेकिन अंतिम फैसला निजी स्कूलों के हाथ में है। पुस्तकों के दाम की कैपिंग करने की मेरे पास कोई शक्ति नहीं है। -हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक

डीएवी के तीन वेंडर निर्धारित

सभी डीएवी स्कूलों के लिए नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की पुस्तकों के लिए खुद की डीएवी प्रकाशन है। इसके तहत हमें वेंडर निर्धारित करना होता है। पिछले दो सालों से अभिभावकों की सहूलियत के लिए डीएवी पुस्तकों के लिए हमारे तीन वेंडर हैं। नौवीं से 12वीं कक्षा के लिए अभिभावक एनसीईआरटी की पुस्तकें कहीं से भी ले सकते हैं। -पूजा प्रकाश, केबी-डीएवी स्कूल सेक्टर-सात, चंडीगढ़


मनचंदा बुक एंड स्टेशनरी शॉप के संचालक की दुकान में अनुपस्थिति होने से सोमवार साढ़े तीन बजे उनके कर्मचारी से बात हुई। कर्मचारी ने कहा कि उनके साथ किसी स्कूल का टाइअप नहीं है। वह स्कूलों की वेबसाइट से पुस्तकों की सूची उठाते हैं।

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