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नाटक दीप दान में दिखाया पन्ना धाय के त्याग और बलिदान
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टैगोर थिएटर में नाटक दीप दान का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में सोमवार की शाम नाटक दीपदान का मंचन किया गया। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत नाटक का मंचन चंडीगढ़ प्रशासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से परंपरा आर्ट थिएटर ग्रुप के कलाकारों ने किया। नाटक के लेखक डॉ. राम कुमार वर्मा और निर्देशक अभिषेक शर्मा हैं। अभिषेक शर्मा ने बताया कि दीपदान की कहानी चित्तौड़ की एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है। इस नाटक में पन्ना धाय के अपूर्व त्याग, बलिदान और देश प्रेम को दिखाया गया है।
बात सन् 1536 की है। राजस्थान के चित्तौड़ दुर्ग में घटना घटित होती है। चित्तौड़ के महाराणा सांगा का देहांत हो चुका है। उनके राज्य के उत्तराधिकारी उनके सबसे छोटे पुत्र कुंवर उदय सिंह हैं, जिनकी उम्र अभी चौदह वर्ष है। कुंवर उदय सिंह की देखरेख और लालन-पालन का कार्य पन्ना नाम की एक स्वामिभक्त महिला कर रही है, जिन्हें पन्ना धाय के नाम से जाना जाता है। उसका तेरह वर्ष का चंदन नाम का एक पुत्र भी है, जिसका पालन-पोषण कुंवर उदय सिंह के साथ खेलते हुआ है।
महाराणा सांगा की मृत्यु के पश्चात उनके भाई पृथ्वीराज की एक दासी का 32 वर्षीय पुत्र बनवीर राज्य पर अपना अधिकार करने के लिए प्रयत्नशील है। ‘दीपदान’ की सारी कहानी पन्ना धाय और बनवीर पर आकर चरम सीमा पर ठहर जाती है। इस विकट समय में आने वाली घटनाओं से थोड़ा भी विचलित न होते हुए पन्ना तत्काल निर्णय लेती है। कुंवर उदय सिंह के प्राणों की रक्षा के लिए पन्ना अपने पुत्र चंदन का बलिदान दे देती है। नाटक में खुशी राजपूत, वरुण शर्मा, रोहित शर्मा, सुनील चिलवाल, आकांक्षा, मिली, सूरज मौर्य, रजत, राघव और पुष्पक ने भूमिका निभाई है।
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बात सन् 1536 की है। राजस्थान के चित्तौड़ दुर्ग में घटना घटित होती है। चित्तौड़ के महाराणा सांगा का देहांत हो चुका है। उनके राज्य के उत्तराधिकारी उनके सबसे छोटे पुत्र कुंवर उदय सिंह हैं, जिनकी उम्र अभी चौदह वर्ष है। कुंवर उदय सिंह की देखरेख और लालन-पालन का कार्य पन्ना नाम की एक स्वामिभक्त महिला कर रही है, जिन्हें पन्ना धाय के नाम से जाना जाता है। उसका तेरह वर्ष का चंदन नाम का एक पुत्र भी है, जिसका पालन-पोषण कुंवर उदय सिंह के साथ खेलते हुआ है।
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महाराणा सांगा की मृत्यु के पश्चात उनके भाई पृथ्वीराज की एक दासी का 32 वर्षीय पुत्र बनवीर राज्य पर अपना अधिकार करने के लिए प्रयत्नशील है। ‘दीपदान’ की सारी कहानी पन्ना धाय और बनवीर पर आकर चरम सीमा पर ठहर जाती है। इस विकट समय में आने वाली घटनाओं से थोड़ा भी विचलित न होते हुए पन्ना तत्काल निर्णय लेती है। कुंवर उदय सिंह के प्राणों की रक्षा के लिए पन्ना अपने पुत्र चंदन का बलिदान दे देती है। नाटक में खुशी राजपूत, वरुण शर्मा, रोहित शर्मा, सुनील चिलवाल, आकांक्षा, मिली, सूरज मौर्य, रजत, राघव और पुष्पक ने भूमिका निभाई है।
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