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Chandigarh: राजनीतिक संगठनों की घुसपैठ से पहले छात्र मुद्दों पर होती थी राजनीति, पीयू ने दिए कई बड़े नेता

Tue, 05 Sep 2023 02:03 PM IST
निवेदिता वर्मा कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 05 Sep 2023 02:03 PM IST
सार

आप नेता मालविंदर कंग ने बताया कि वह पुसू से वर्ष 2002-2003 और 2003-2004 तक छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। उस दौरान सिर्फ तीन ही छात्र संगठन पुसू, सोपू और एबीवीपी थे। सभी संगठन पूरा साल काम करते थे। पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने बताया कि वर्तमान परिदृश्य से उस समय के चुनाव बहुत अलग थे। छात्र सालभर काम करते थे

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Panjab University was considered bastion of student politics in Haryana, Punjab and Himachal Pradesh
पीयू छात्रसंघ चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब यूनिवर्सिटी ने देश की राजनीति के लिए बहुत सारे नेता तैयार किए हैं। पीयू को हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में छात्र राजनीति का गढ़ माना जाता था। हाल में पीयू में सभी राजनीतिक पार्टियों के छात्र संगठन काम कर रहे हैं जबकि छात्रों के संगठन का प्रभाव साल दर साल कम होता जा रहा है।

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पीयू के पुराने छात्र नेताओं ने बताया कि राजनीतिक संगठनों के आने से पहले छात्र मुद्दों पर राजनीति होती थी। वहीं, छात्रों के पास पैसा नहीं था इसलिए पूरी यूनिवर्सिटी में छात्र चुनाव का जश्न दिखाई देता था। हॉस्टलों में सभी छात्र अलग-अलग संगठनों के स्टीकर से लेकर पोस्टर-बैनर तैयार करते थे। सभी संगठन को अपने विशेष रंग और पहचान थी सिर्फ उसी रंग के कागज पर पोस्टर तैयार होते थे।
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बेहतरीन वक्ता और लीडरशिप होती थी तैयार
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने बताया कि 1974-1975 तक वह पीयू छात्रसंघ का महासचिव रहे। अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होता था। विभागों के डीआर छात्रसंघ के पैनल का चुनाव करते थे। वर्तमान परिदृश्य से उस समय के चुनाव बहुत अलग थे। छात्रों के पास पैसा नहीं था। राजनीतिक पार्टियों का कोई सहयोग नहीं था इसलिए छात्र सालभर काम करते थे और चुनाव से पहले स्वयं पोस्टर डिजाइन करते थे। छात्रों के मुद्दों पर संगठनों में बहस होती थी और उसी के आधार पर जीत दर्ज होती थी। इससे छात्रों की लीडरशिप गुणों के साथ व्यक्तित्व में बेहतरीन वक्ता के तौर पर निखार आता था। अब छात्र चुनाव का राजनीतिकरण हो गया है। इस कारण बेहतरीन लीडरशिप उभरकर सामने नहीं आ पा रही है।

स्टूडेंट सेंटर पर मुद्दों पर होती थी ओपन डिबेट 
आप नेता मालविंदर कंग ने बताया कि वह पुसू से वर्ष 2002-2003 और 2003-2004 तक छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। उस दौरान सिर्फ तीन ही छात्र संगठन पुसू, सोपू और एबीवीपी थे। सभी संगठन पूरा साल काम करते थे। लिंगदोह कमेटी नहीं थी लेकिन पीयू की अपनी चुनावों की गाइडलाइन थी जो बेहतर थी। इसमें 25 साल के बाद उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ सकता था। 

छात्रों पर धरने को लेकर होने वाले केस में छूट थी। स्टूडेंट पर चुनाव से एक दिन पहले मुद्दों पर ओपन डिबेट होती थी। सभी छात्र संगठनों को समय अलॉट होता था और फिर मुद्दों पर बहस होती थी। इन मुद्दों से जीत की रूपरेखा तैयार होती थी। छात्र नेता आपस में मिलजुल कर पैसा एकत्रित कर पोस्टर बनाने के लिए पेपर खरीदते थे। अब राजनीतिक पार्टियों का हस्तक्षेप बढ़ गया है। इस कारण बेहतरीन लीडरशिप उभरकर नहीं आ रही है।

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पांच हजार छात्रों के प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ छात्रसंघ चुनाव
वर्ष 1992-1995 तक पीयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता कुलजीत नागरा ने बताया कि पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार के कारण पीयू में छात्रसंघ चुनाव बंद हो गया था। वर्ष 1986 में लॉ में पीयू में दाखिला लिया और छात्रों के मुद्दों पर काम करना शुरू करने के साथ संगठन पुसू को एक्टिव किया। 

वर्ष 1992 में पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने के बाद पीयू में छात्रों ने छात्रसंघ चुनाव की मांग रखी। उस दौरान लगभग पांच हजार छात्रों ने पूरे चंडीगढ़ और पीयू में चुनाव करवाने को लेकर प्रदर्शन किया। वीसी दफ्तर के बाहर दस दिन मरणव्रत धरने पर बैठे। इसके बाद अप्रत्यक्ष रूप से छात्रसंघ चुनाव पीयू में वर्ष 1992 में शुरू हुए। इसके बाद सीनेट में छात्रों की मांग के जरिए वर्ष 1997 में प्रत्यक्ष रूप से चुनाव शुरू हुए। उस दौरान छात्र अपने मुद्दों को लेकर एकजुट होकर लड़ते थे लेकिन अब पीयू में ऐसा नहीं हो रहा है। छात्र एक्टिविज्म खत्म होता जा रहा है जब से राजनीतिक संगठनों ने दखलअंदाजी कर दी है।

पीयू से निकले ये राजनेता
पीयू की छात्र राजनीति से कांग्रेस के पूर्व सांसद पवन कुमार बंसल, भाजपा के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन, भाजपा पूर्व सांसद राजीव प्रताप रूडी, आप एमएलएल मालविंदर कंग, कांग्रेस पूर्व एमएलए कुलजीत सिंह नागरा, कांग्रेस के पूर्व एमएलए दलवीर सिंह गोल्डी, कांग्रेस नेता खुशबाज सिंह जटाना, कांग्रेस नेता बरिंदर सिंह ढिल्लन, कांग्रेस नेता राजविंदर सिंह, शिअद नेता यादविंदर सिंह, सोई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोबिन बराड़, आप नेता परविंदर सिंह गोल्डी इत्यादि हैं।

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