कोरोना : महामारी के दौर में पारंपरिक संगीत से जुड़े लोग हुए प्रभावित, चंडीगढ़ में बोले पंडित सलिल भट्ट- हमें भूली सरकार
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शास्त्रीय संगीत अगर कलाकार के जीने और कमाई का साधन हो तो भारत में उसका जीवन काफी कठिनाई भरा होगा। दूसरी ओर पिछले वर्ष जो सरकार ने कोरोना महामारी को देखते हुए लॉकडाउन लगाया तो उसने कला जगत की कमर तोड़कर रख दी, खासकर शास्त्रीय संगीत और नृत्य कलाकारों की। यह कहना है, संगीत जगत को सात्विक वीणा की सौगात देने वाले तंत्री सम्राट पंडित सलिल भट्ट का।
उन्होंने बताया कि शास्त्रीय कलाकारों का घर लाइव कार्यक्रम से ही चलता है। इसमें भी शास्त्रीय कलाकार पारंपरिक संगीत और भारतीय सभ्यता को लोगों तक मुफ्त में पहुंचा रहे हैं। किसी भी कार्यक्रम की कोई टिकट नहीं ली जाती। इन सबके बावजूद सरकारें पारंपरिक संगीत को बचाने वाले कलाकारों की कोई आर्थिक मदद नहीं कर रही हैं। वह चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र के कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए आए थे।
दुनिया की सबसे अमीर सभ्यता को बचाने में नाकाम
पंडित सलिल भट्ट ने बताया कि हमारे पास संगीत की दुनिया में सबसे अमीर सभ्यता है, लेकिन हम समाज के रूप में उसे बचाने में नाकाम रहे हैं। हम चाहते हैं कि बच्चे को नर्सरी कक्षा से संगीत अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए। इससे एक बच्चे की कलात्मकता में वृद्धि होगी और वह तनावमुक्त और क्रोधमुक्त होगा। साथ ही बच्चे को बचपन से ही देश के कलात्मक संगीत इतिहास, वाद्य यंत्रों इत्यादि की जानकारी मिलेगी। पंडित भट्ट ने बताया कि उन्होंने दस वर्ष की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया। उनके पिता ग्रेमी अवार्ड विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट उनके गुरु रहे हैं।
एक्टिंग की तरफ भी था रुझान... फौज की परीक्षा भी पास की
पंडित सलिल भट्ट ने बताया कि 21 वर्ष पहले उन्होंने मॉडलिंग और एक्टिंग के लिए फोटोग्राफर गौतम राजाध्यक्ष से पोर्टफोलियो तैयार करवाया था। उस वक्त उनका रुझान फिल्मों की तरफ भी था, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। राजस्थान से होने के नाते उन्होंने अन्य युवाओं की तरह भारतीय फौज की परीक्षा पास की है। शायद राजस्थान की धरोहर से ही देश के लिए काम करने का जज्बा मिलता है।
दो साल की मेहनत के बाद बनी ‘सात्विक’
पंडित सलिल भट्ट ने बताया कि सात्विक वीणा को बनाने में उन्हें पूरे दो वर्ष लगे। इसमें नई तकनीकी के आधार पर मिक्सर भी लगाया गया है, जिससे वीणा के साउंड टोन को नियंत्रित किया जा सके। यह इलेक्ट्रिक है। 1998 में सात्विक वीणा बनकर पूरी हुई। मेरे बेटे का जन्म भी वीणा के बनने के समय ही हुआ था। बेटे और वीणा दोनों का नाम हमने सात्विक रखा।