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Chandigarh News: 250 से ज्यादा इमारतें असुरक्षित, कई पांच दशक से ज्यादा पुरानी
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चंडीगढ़। सेक्टर-17ए में बेसमेंट की दीवार गिरने की घटना ने शहर में पुरानी इमारतों की सुरक्षा का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। शहर में 250 से ज्यादा इमारतें असुरक्षित चिह्नित हैं। इनमें सेक्टर-20 के 100 से अधिक सरकारी मकान शामिल हैं। सेक्टर-29 में भी 200 से ज्यादा सरकारी मकान जर्जर होने के कारण खाली पड़े बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सेक्टर-7, 8, 9, 17, 21, 22, 34, 37 और 38 में भी कई पुरानी इमारतें मौजूद हैं।
आर्किटेक्ट संदीप साहनी के मुताबिक शहर के कई पुराने सेक्टरों में आवासीय और व्यावसायिक इमारतें 50 से 55 साल से ज्यादा पुरानी हैं। चूहे, बरसाती पानी, सीवेज और पानी के रिसाव से समय के साथ नींव और स्ट्रक्चर प्रभावित हो सकता है। ऐसे भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट नहीं होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
इंडस्ट्रियल एरिया में दो हजार से ज्यादा नोटिस
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में स्ट्रक्चरल सेफ्टी और बिल्डिंग वॉयलेशन को लेकर दो हजार से अधिक संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे यहां निर्माण नियमों के उल्लंघन और भवन सुरक्षा की समस्या की गंभीरता का पता चलता है।
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जुलाई हादसे में दो पार्टनरों की मौत
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 के प्लॉट नंबर-28 में जुलाई में इमारत गिरने से पार्टनर तरुण जैन और तरुण कौशिक की मौत हो गई थी। प्रशासन की जांच में सामने आया था कि निर्माण और मरम्मत के दौरान पिलर की दीवार तोड़े जाने से ढांचा कमजोर हुआ और इमारत ढह गई। हादसे के बाद भी पुराने भवनों और निर्माण के दौरान स्ट्रक्चरल सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं।
हादसे से पहले जांच की मांग
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने कहा कि असुरक्षित भवनों की पहचान के बाद केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। 50 वर्ष से अधिक पुराने भवनों की नींव, पिलर, बीम, छत और दीवारों का चरणबद्ध तकनीकी ऑडिट कराया जाना चाहिए। असुरक्षित भवनों को समय रहते खाली कराकर मरम्मत, पुनर्निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।
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आर्किटेक्ट संदीप साहनी के मुताबिक शहर के कई पुराने सेक्टरों में आवासीय और व्यावसायिक इमारतें 50 से 55 साल से ज्यादा पुरानी हैं। चूहे, बरसाती पानी, सीवेज और पानी के रिसाव से समय के साथ नींव और स्ट्रक्चर प्रभावित हो सकता है। ऐसे भवनों का नियमित स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट नहीं होने पर जोखिम बढ़ सकता है।
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इंडस्ट्रियल एरिया में दो हजार से ज्यादा नोटिस
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में स्ट्रक्चरल सेफ्टी और बिल्डिंग वॉयलेशन को लेकर दो हजार से अधिक संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे यहां निर्माण नियमों के उल्लंघन और भवन सुरक्षा की समस्या की गंभीरता का पता चलता है।
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जुलाई हादसे में दो पार्टनरों की मौत
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 के प्लॉट नंबर-28 में जुलाई में इमारत गिरने से पार्टनर तरुण जैन और तरुण कौशिक की मौत हो गई थी। प्रशासन की जांच में सामने आया था कि निर्माण और मरम्मत के दौरान पिलर की दीवार तोड़े जाने से ढांचा कमजोर हुआ और इमारत ढह गई। हादसे के बाद भी पुराने भवनों और निर्माण के दौरान स्ट्रक्चरल सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं।
हादसे से पहले जांच की मांग
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने कहा कि असुरक्षित भवनों की पहचान के बाद केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। 50 वर्ष से अधिक पुराने भवनों की नींव, पिलर, बीम, छत और दीवारों का चरणबद्ध तकनीकी ऑडिट कराया जाना चाहिए। असुरक्षित भवनों को समय रहते खाली कराकर मरम्मत, पुनर्निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।