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कार्रवाईः बहिबल कलां गोलीकांड के दोषी पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज करने के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Aug 2018 09:56 AM IST
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बहिबल कलां गोलीकांड और कोटकपुरा लाठीचार्ज के मामले में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की ओर से जिन पुलिस कर्मचारियों को अपनी रिपोर्ट में नामजद करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है, उन सभी के खिलाफ राज्य सरकार ने धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
हालांकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर जांच का काम सीबीआई को सौंपने के फैसला लेते हुए यह घोषणा कर दी थी कि आयोग द्वारा जिन अधिकारियों को दोषी पाया गया है, उन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद यह केस सीबीआई को सौंपे जाएंगे। गुरूवार को गृह सचिव ने आयोग की रिपोर्ट में नामजद सभी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश पंजाब पुलिस के डीजीपी को भेज दी।
पता चला है कि यह मामला सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले पर सूबे के कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर एतराज जताया था। मंत्रियों की दलील थी कि चुनाव के समय जनता से वादा किया गया था कि इन मामलों के दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए 15 दिन में सलाखों के पीछे डाला जाएगा। अब सीबीआई को जांच सौंपे जाने से यह मामला लंबे समय तक लटक जाने की आशंका है।
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जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने बहिबल कलां गोलीकांड में पुलिस की भूमिका पर उंगली उठाते हुए मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, लाडोवाल के एसएचओ इंस्पेक्टर हरपाल सिंह व अन्य पुलिसकर्मी हरप्रीत सिंह, शमशेर सिंह, गुरप्रीत सिंह और परमदिंर सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि गोलीकांड को अंजाम देने के लिए चंडीगढ़ से दिशानिर्देश जारी हुए। लेकिन आयोग ने चंडीगढ़ के किसी पुलिस अधिकारी को इस मामले में नामजद नहीं किया।मुख्यमंत्री ने आयोग की रिपोर्ट के बाकी तीन हिस्से प्राप्त होने के बाद पूरी रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने या इस मामले पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बात कही है।
मृतकों के परिजनों को दोबारा नौकरी की घोषणा
मुख्यमंत्री ने 30 जुलाई को उक्त मामलों की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की घोषणा करते हुए गोलीकांड के मृतकों के एक-एक परिजन को सरकारी नौकरी और मुआवजे का एलान किया था। लेकिन पता चला है कि मृतकों के एक-एक परिजन को अकाली-भाजपा सरकार ने करीब ढाई साल पहले नौकरी दे दी थी। दोनों मृतकों के आश्रित इस समय शिक्षा विभाग में सीनियर लैब अटेंडेंट कार्यरत हैं।
उन्होंने जनवरी, 2016 में दो साल के प्रोबेशन पीरियड व बेसिक वेतन 5900 रुपये प्रति माह के हिसाब से नौकरी दी गई थी। यह दोनों आश्रित इस साल जनवरी में प्रोबेशन पीरियड पूरा कर चुके हैं और अब उनका वेतन 30000 रुपये प्रति माह हो गया है।
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हालांकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर जांच का काम सीबीआई को सौंपने के फैसला लेते हुए यह घोषणा कर दी थी कि आयोग द्वारा जिन अधिकारियों को दोषी पाया गया है, उन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद यह केस सीबीआई को सौंपे जाएंगे। गुरूवार को गृह सचिव ने आयोग की रिपोर्ट में नामजद सभी अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की सिफारिश पंजाब पुलिस के डीजीपी को भेज दी।
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पता चला है कि यह मामला सीबीआई को सौंपे जाने के फैसले पर सूबे के कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री से मिलकर एतराज जताया था। मंत्रियों की दलील थी कि चुनाव के समय जनता से वादा किया गया था कि इन मामलों के दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए 15 दिन में सलाखों के पीछे डाला जाएगा। अब सीबीआई को जांच सौंपे जाने से यह मामला लंबे समय तक लटक जाने की आशंका है।
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जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने बहिबल कलां गोलीकांड में पुलिस की भूमिका पर उंगली उठाते हुए मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, लाडोवाल के एसएचओ इंस्पेक्टर हरपाल सिंह व अन्य पुलिसकर्मी हरप्रीत सिंह, शमशेर सिंह, गुरप्रीत सिंह और परमदिंर सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि गोलीकांड को अंजाम देने के लिए चंडीगढ़ से दिशानिर्देश जारी हुए। लेकिन आयोग ने चंडीगढ़ के किसी पुलिस अधिकारी को इस मामले में नामजद नहीं किया।मुख्यमंत्री ने आयोग की रिपोर्ट के बाकी तीन हिस्से प्राप्त होने के बाद पूरी रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने या इस मामले पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बात कही है।
मृतकों के परिजनों को दोबारा नौकरी की घोषणा
मुख्यमंत्री ने 30 जुलाई को उक्त मामलों की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की घोषणा करते हुए गोलीकांड के मृतकों के एक-एक परिजन को सरकारी नौकरी और मुआवजे का एलान किया था। लेकिन पता चला है कि मृतकों के एक-एक परिजन को अकाली-भाजपा सरकार ने करीब ढाई साल पहले नौकरी दे दी थी। दोनों मृतकों के आश्रित इस समय शिक्षा विभाग में सीनियर लैब अटेंडेंट कार्यरत हैं।
उन्होंने जनवरी, 2016 में दो साल के प्रोबेशन पीरियड व बेसिक वेतन 5900 रुपये प्रति माह के हिसाब से नौकरी दी गई थी। यह दोनों आश्रित इस साल जनवरी में प्रोबेशन पीरियड पूरा कर चुके हैं और अब उनका वेतन 30000 रुपये प्रति माह हो गया है।