चंडीगढ़: एस्टेट ऑफिस के नए प्रस्ताव का चौतरफा विरोध, व्यापारियों ने प्रशासन को दी सख्त चेतावनी
चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा है कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन कर भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाना उद्योगपतियों के साथ अन्याय है।
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कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन के प्रस्ताव का अब चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। उद्योग व्यापार मंडल ने शनिवार को प्रेस क्लब में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। संगठन के अध्यक्ष कैलाश जैन ने कहा कि प्रशासन किसी एक्ट में संशोधन नहीं कर सकता है तो फिर बिल्डिग बायलॉज व मिस यूज को लेकर कैसे नोटिस जारी कर सकता है। पहले जब यह एक्ट बनाया गया था तब भी पंजाब विधानसभा में लाया गया था। इस प्रस्ताव को प्रशासन केंद्र को भेज सकता है और उसके बाद लोकसभा में इसके संशोधित कर सकता है। प्रशासन ने जल्द इस संबंध में नोटिस खत्म नहीं किया तो हर मार्केट में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस मुद्दे पर सभी दुकानदार, व्यापारी और उद्योगपति एकजुट हो गए हैं। व्यापारियों की संस्था ने शनिवार को प्रशासन के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उद्योगपतियों ने मिलकर एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाई है, जो सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है।
सभी ने एक सुर से इस प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही है। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज ने प्रशासन को पत्र लिखकर कई आपत्तियां दर्ज की हैं। चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीन मंगलानी ने कहा है कि कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन कर भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाना उद्योगपतियों के साथ अन्याय है। पिछले 50 वर्षों से किसी आवश्यकता आधारित परिवर्तन (नीड बेस चेंज) की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि पड़ोसी राज्य व्यापारियों व उद्योगतियों को इस पर कई रियायतें दे चुके हैं। प्रशासन को सबसे पहले परिवर्तनों की अनुमति देनी चाहिए और उसके बाद उल्लंघनों व दुरुपयोग को परिभाषित करना चाहिए।
मंगलानी ने कहा कि आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कुल 10 दिन का समय दिया गया, जिसमें से पांच दिन छुट्टी रही। टिप्पणी दर्ज कराने के लिए न किसी ईमेल आईडी जिक्र है, न ही कोई ऑनलाइन व्यवस्था है। सिर्फ एक कमरे के पते का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य नीतियों पर सुझाव देने के लिए संबंधित विभाग लोगों को ई-मेल आईडी भी मुहैया कराता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग सुझाव दे सकें लेकिन इस संशोधन के मामले में एस्टेट ऑफिस ने कुछ नहीं किया है। इससे जाहिर होता है कि प्रशासन नहीं चाहता कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस संशोधन पर आपत्तियां दर्ज करा सकें। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श करने और आपत्तियां जमा करने के लिए कम से कम 30 दिन का समय होना चाहिए।
विरोध दर्ज कराने यूटी सचिवालय पहुंचेंगे कई उद्योगपति
एस्टेट ऑफिस के प्रस्ताव के खिलाफ शहर के कई नामी उद्योगपति सोमवार को सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय पहुंचेंगे। इसमें कई व्यापारी संगठन, उद्योगपतियों और आरडब्ल्यूए के सदस्य भी होंगे। सभी ‘चंडीगढ़ को-ऑर्डिनेशन कमेटी’ के बैनर तले एकत्रित होंगे, जो एस्टेट ऑफिस के इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए गठित की गई है। कमेटी के सदस्य सोमवार को सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय में अपनी-अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे। इस दौरान सदस्य प्लेकार्ड भी प्रदर्शित करेंगे। साथ ही आने वाले दिनों में विरोध स्वरूप कैंडल मार्च, कार रैली भी निकाली जाएगी। इसके अलावा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ ने भी वित्त सचिव विजय नामदेवराव जड़े को पत्र लिख कर इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
एस्टेट ऑफिस के इस प्रस्ताव का हो रहा है विरोध
कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952 में संशोधन करके प्रशासन भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 400 गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। नए प्रस्ताव में सभी तरह के उल्लंघन के लिए अब फिक्स 2 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। अगर उल्लंघन को हटाया नहीं जाता है, तो 8 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चार्जेज तय किए गए हैं। वर्ष 2007 में प्रशासन ने भवन नियमों के उल्लंघन व दुरुपयोग पर जुर्माने की राशि को 10 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति स्क्वॉयर फुट प्रति महीने कर दी थी। जिसके बाद ही शहर के अधिकतर व्यापारियों और उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये के नोटिस भेजे गए। अभी तक उनमें से कई मामलों में सुनवाई चल रही है।