सैन्य जवानों के पहचान पत्रों के जरिए ऑनलाइन चल रहा ये 'खेल', सेना प्रमुख को भेजी गई शिकायत
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ऑनलाइन मार्केट में सेना के जवानों के पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर ठगी का खेल खेला जा रहा है। एक गिरोह ऐसा सक्रिय है जो पुराने सामानों को ऑनलाइन बेचने में इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा है।
इस धोखाधड़ी के खेल में जवानों का आईडी कार्ड, कैंटीन कार्ड और आधार कार्ड (हरियाणा के झज्जर का पता) तक का दुरुपयोग किया जा रहा है। जबकि इसमें इंडियन आर्मी अंकितफर्जी कूरियर रसीदें भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
ठगी करते हुए इन रसीदों पर इंडियन आर्मी कैंप जैसलमेर का पता दिया जा रहा है। इस तरह की ऑनलाइन ठगी को लेकर जहां सेना की विशेष विंग सर्तक हो गई है। वहीं इसकी शिकायत एक पीड़ित द्वारा सेना प्रमुख को भी भेजी जा चुकी है।
सेना के रिटायर्ड कर्नल चरणजीत सिंह कहते हैं कि संभवत: यह सेना के जवानों व अफसरों के चोरी व गुम हुए पहचान पत्रों का इस तरह से गलत इस्तेमाल हो सकता है।
उनके अनुसार, देश की सुरक्षा के लिहाज से भी जवानों व अफसरों के आईडी का इस तरह से दुरुपयोग देश के लिए खतरनाक हो सकता है। उधर, पीड़ित आशीष के अनुसार इसकी शिकायत सेना प्रमुख को भेजी जा चुकी है, क्योंकि यह एक गंभीर मामला है।
पहचान पत्रों से भरोसा जीत करते हैं ठगी
पुराने सामान की खरीद-फरोख्त करने वाली ऑनलाइन वेबसाइट पर इस गिरोह के सदस्यों ने कई तरह के सामान खासकर मोबाइल अपलोड किए हुए हैं, जिनकी कीमत कम रखते है। कम मूल्य की वजह लोग जब इस डील की ओर आकर्षित होते हैं तो उस व्यक्ति को मोबाइल बेचने वाले व्यक्ति की पहचान सेना के एक जवान के रूप में बताई जाती है।
इसके लिए संबंधित जवान का आर्मी द्वारा जारी पहचान पत्र, आधार कार्ड और कैंटीन कार्ड तक खरीदने की इच्छा जताने वाले व्यक्ति को व्हॉटसएप पर भेज दिया जाता है। डील फाइनल होने पर संबंधित व्यक्ति को मोबाइल का मूल्य संबंधित अकाउंट में पेटीएम करने को कहा जाता है। उसके बाद संबंधित मोबाइल की पैकिंग व उसे खरीददार के पते पर कूरियर करने की रसीद की फोटो तक खरीददार को भेजी जाती है। ताकि उसका भरोसा और पुख्ता हो जाए।
सामने आई इस तरह की कूरियर रसीद के हेडर पर इंडियन आर्मी छपा है और उस पर पता इंडियन आर्मी कैंप जैसलमेर का पता लिखा है। बाद में न तो खरीददार के पास मोबाइल पहुंचता है और न ही पेटीएम किया पैसा वापस आता है। संबंधित मोबाइल नंबर भी स्विच ऑफ हो जाते हैं और वही फोन किसी दूसरे नंबर से फिर ऑनलाइन मार्केट में अपलोड कर दिया जाता है।