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मां ने 6 दिन से नहीं होने दिया डेढ़ साल के बेटे का पोस्टमार्टम, बोली- इंसाफ दिलाकर रहूंगी

Sat, 23 Jun 2018 10:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 23 Jun 2018 10:03 AM IST
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one year child killed by stray dogs, mother wants justice for son
कुत्तों ने नोच-नोच कर मार डाला बच्चा
कुत्तों का शिकार बने डेढ़ साल के आयुष के शव का पोस्टमार्टम छठे दिन भी नहीं हो सका है। मां जिद पर अड़ी है कि वह अपने जिगर के टुकड़े को इंसाफ दिलाएगी। उसका शव सेक्टर-16 हॉस्पिटल की मोर्चरी में रखा है। आयुष के परिजन हॉस्पिटल नहीं आ रहे हैं। जब तक वे हॉस्पिटल पहुंचकर जरूरी कागजात पूरे नहीं करेंगे, तब तक पोस्टमार्टम नहीं हो सकेगा। आयुष के परिजनों की मांग है कि जब तक  नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन इस मामले में किसी को दोषी नहीं ठहराते, दोषियों पर कार्रवाई नहीं करते, तब तक  वे अपने बच्चे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
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आयुष की मां का कहना है कि वह तब तक लड़ेंगी, जब तक आयुष को इंसाफ नहीं मिलता। बीते रविवार को सेक्टर-18 के पार्क में पांच कुत्तों ने डेढ़ साल के आयुष को नोच-नोचकर मार डाला था। उसके बाद से परिवार के सदस्य लगातार मांग कर रहे हैं कि इस घटना के लिए नगर निगम के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके साथ एक सामाजिक संस्था वायस आफ चंडीगढ़ के सदस्य भी जुड़े हैं। संस्था के सदस्य परिजनों के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं।
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वीरवार को सेक्टर-18 के पार्क में कैंडल मार्च निकाल कर इंसाफ की मांग की थी। उसके बाद शुक्रवार को भी सेक्टर 34-35 के चौक  पर भी लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। संस्था का कहना है कि जब तक आयुष को इंसाफ नहीं मिलेगा, वह परिजनों के साथ खड़ी है। आयुष की मां ममता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर घटना के लिए नगर निगम के अधिकारियों को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है।
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जस्टिस राजबीर सेहरावत की वैकेशन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ के गृह सचिव, डीसी, नगर निगम के आयुक्त, मेयर, पब्लिक हेल्थ विभाग के चीफ इंजीनियर, एनिमल हस्बेंड्री विभाग के सचिव, एसएसपी, डीएसपी (ईस्ट) और सेक्टर-19 पुलिस थाने के एसएचओ को 4 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब  किया है । ममता ने एडवोकेट एपीएस शेरगिल के जरिये दायर याचिका में कहा कि उसके मासूम बेटे की मौत के लिए निगम के अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं ।

यह दुर्घटना नहीं, बल्कि एक हत्या का मामला है लिहाजा दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। साथ ही ममता ने कहा कि इस घटना के लिए वे सभी लोग भी जिम्मेवार हैं जो इन पब्लिक पार्कों की देखभाल करते हैं । जिनकी लापरवाही के चलते पार्कों में आवारा कुत्ते बेखौफ घूम रहे हैं और आम लोगों और मासूम बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं । याचिकाकर्ता ने बताया कि गत वर्ष हाई कोर्ट ने ही आदेश दिए थे कि आवारा कुत्तों के आतंक से आम लोगों को बचाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए। 

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अब भी हर रोज ट्राइसिटी में कुत्तों के काटने के 40 से 45 केस सामने आ रहे हैं।  इन सभी घटनाओं के लिए निगम के अधिकारी जिम्मेदार हैं क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निगम शहर में इन आवारा कुत्तों के आतंक पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है।

मामले को रफा-दफा करने में लगे 3 लाख रुपये मुआवजा दे निगम
याचिकाकर्ता के वकील ए.पी.एस. शेरगिल ने कहा कि इस घटना के बाद निगम निगम ने मृतक के परिवार को 3 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है और परिवार को कहा जा रहा है कि वह मृतक का पोस्टमार्टम करवा उसका संस्कार कर दे।  जबकि पीड़ित परिवार दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहा है। 

शेरगिल के अनुसार निगम 3 लाख देकर मामले को रफा दफा करना चाहता है और कोशिश में है कि निगम के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज न हो  इतना ही नहीं पुलिस भी पीड़ित परिवार को एफ.आई.आर. नहीं दर्ज करवाने का दबाव डाल रही है । जबकि पीड़ित परिवार ने तब तक मुआवजा लेने से इंकार कर दिया है  जब तक की दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है

निगम कुत्तों की नसबंदी में रहा नाकाम
मृतक की माँ ने अभी तक इस मामले में किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर उन पर जुर्माना लगाकर उन्हीं से वसूलने की मांग की है।  साथ ही निगम के दोषी अधिकारियों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की हाई कोर्ट से मांग की है।  हाई कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ही आवारा कुत्तों की नसबंदी के आदेश दे चुका है।  बावजूद इसके अभी तक निगम के अधिकारी इन आवारा कुत्तों की नसबंदी में नाकाम रहे हैं ।


यह है मामला
बता दें कि रविवार को सेक्टर-18 में एक 18 महीने के मासूम पर 5 आवारा कुत्तों ने उस समय हमला कर दिया था जब वह तीन अन्य बच्चों के साथ पार्क में खेल रहा था।  मासूम की मृत्यु हो गई।  इस घटना से पूरा शहर दहला हुआ है। बच्चे का शव अब भी शवगृह में है और उसका पोस्ट मार्टम नहीं हुआ है।
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