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‘देश में साल में एक लाख लोग करते हैं खुदकुशी’
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चंडीगढ़। सेक्टर-36 स्थित एमसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमन की गीतांजलि काउंसलिंग हेल्पलाइन ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस और अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में आत्महत्या रोकथाम और युवाओं में दिमागी परेशानियों पर वेबिनार का आयोजन किया। पीजीआई के मनोचिकित्सा विभाग की प्रोफेसर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आदर्श कोहली ने वेबिनार में वक्तव्य दिया।
उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण आ रही परेशानियों के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत में 10-24 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं में मृत्यु का प्रमुख कारण आत्महत्या है। हमारे देश में आत्महत्या के कारण हर साल एक लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है। वेबिनार में 126 विद्यार्थयों ने भाग लिया।
डॉ. कोहली ने आत्महत्या के प्रमुख कारकों और विभिन्न मानसिक विकार जैसे अवसाद, चिंता, मादक द्रव्यों के सेवन, आवेग, पारिवारिक विकृति, यौन शोषण आदि पर चर्चा की। डॉ. कोहली ने युवाओं को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले विशिष्ट कारणों को प्रासंगिक अनुसंधान के साथ बताया। इसके साथ ही केस स्टडी के माध्यम से आत्महत्या में मनोवैज्ञानिक शव परीक्षा, आत्महत्या के प्रयासों से जुड़े मिथक, युवाओं में आत्महत्या के प्रारंभिक लक्षणों पर भी चर्चा की। डॉ. कोहली ने तनाव प्रबंधन की रणनीतियों, भावनाओं पर नियंत्रण, कौशल विकास आदि पर चर्चा की और साथ ही रचनात्मक गतिविधियों में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। वहीं प्रिंसिपल डॉ. निशा भार्गव ने मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता पर चर्चा करने के लिए गीतांजलि काउंसलिंग हेल्पलाइन की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण आ रही परेशानियों के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत में 10-24 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं में मृत्यु का प्रमुख कारण आत्महत्या है। हमारे देश में आत्महत्या के कारण हर साल एक लाख से अधिक लोगों की जान चली जाती है। वेबिनार में 126 विद्यार्थयों ने भाग लिया।
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डॉ. कोहली ने आत्महत्या के प्रमुख कारकों और विभिन्न मानसिक विकार जैसे अवसाद, चिंता, मादक द्रव्यों के सेवन, आवेग, पारिवारिक विकृति, यौन शोषण आदि पर चर्चा की। डॉ. कोहली ने युवाओं को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले विशिष्ट कारणों को प्रासंगिक अनुसंधान के साथ बताया। इसके साथ ही केस स्टडी के माध्यम से आत्महत्या में मनोवैज्ञानिक शव परीक्षा, आत्महत्या के प्रयासों से जुड़े मिथक, युवाओं में आत्महत्या के प्रारंभिक लक्षणों पर भी चर्चा की। डॉ. कोहली ने तनाव प्रबंधन की रणनीतियों, भावनाओं पर नियंत्रण, कौशल विकास आदि पर चर्चा की और साथ ही रचनात्मक गतिविधियों में ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। वहीं प्रिंसिपल डॉ. निशा भार्गव ने मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता पर चर्चा करने के लिए गीतांजलि काउंसलिंग हेल्पलाइन की सराहना की।
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