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आरोप-प्रत्यारोप: करनाल लाठीचार्ज में एक किसान की मौत, पुलिस ने किया इनकार, एसपी बोले- नहीं गया कोई अस्पताल
Sun, 29 Aug 2021 08:40 PM IST
सुशील कुमार कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, घरौंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, घरौंडा
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Sun, 29 Aug 2021 08:40 PM IST
सार
सुशील काजल के बेटे साहिल ने बताया कि उनके पिता शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे घर पहुंचे थे। उनके सिर में गुम चोटें थीं और कपड़ों पर खून के छींटे पड़े थे। उसने पिता से पहले दवाई लेने की बात कही, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
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करनाल के एसपी गंगाराम पुनिया
- फोटो : ट्विटर ANI
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विस्तार
बसताड़ा टोल पर शनिवार को किसानों पर हुए लाठीचार्ज में घायल किसान सुशील काजल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार शनिवार रात वह घर पहुंचने के बाद सो गया था, लेकिन सुबह मृत मिला। रविवार को गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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करनाल में शनिवार को भाजपा की प्रदेशस्तरीय बैठक की सूचना पर विरोध के लिए किसान बसताड़ा टोल पर एकत्रित हुए थे। यहां से वह भाजपा के कार्यक्रम स्थल की ओर से कूच करने की तैयारी कर रहे थे। तभी पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज में गांव रायपुर जाटान निवासी किसान सुशील काजल को भी चोट लगी थी।
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सुशील काजल के बेटे साहिल ने बताया कि उनके पिता शनिवार रात करीब साढ़े आठ बजे घर पहुंचे थे। उनके सिर में गुम चोटें थीं और कपड़ों पर खून के छींटे पड़े थे। उसने पिता से पहले दवाई लेने की बात कही, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। रात को कई बार कहने के बावजूद उन्होंने खाना भी नहीं खाया। रविवार सुबह आठ बजे तक जब वह नहीं उठे तो उन्हें जगाने पहुंचे, जहां उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
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साहिल ने बताया कि उसके पिता पिछले नौ माह से बसताड़ा टोल पर चल रहे किसान आंदोलन में जा रहे थे। दिल्ली बार्डर पर बड़ा आंदोलन होता था तो वहां पर भी वह अक्सर पहुंचते थे। सुबह से ही आसपास के लोग, किसान संगठन व राजनीतिक दलों से जुड़े नेता उनके घर पर आकर सांत्वना दे रहे हैं।
सुशील काजल का एक बेटा और एक बेटी है। दोनों की शादी हो चुकी है। उनकी पत्नी किसान आंदोलन के दौरान अपने बेटे के साथ खेतीबाड़ी संभालती थी। अब सुशील काजल की मौत के बाद सारी जिम्मेदारी उनकी पत्नी व बेटे पर ही आ गई है।
गंगाराम पूनिया बोले
जिस किसान की मौत हुई है, उसके बारे में उन्हें जब सूचना मिली तब तक परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। यदि किसान की लाठीचार्ज के दौरान लगी चोट से मौत होती तो परिजन पुलिस के पास आते और शिकायत दर्ज कराते। साथ ही उसका पोस्टमार्टम भी कराते।
भाकियू के झंडे से दी सलामी
रायपुर जाटान गांव निवासी किसान सुशील काजल की मृत्यु के बाद रविवार को ग्रामीणों ने उन्हें भारतीय किसान यूनियन के झंडे से सलामी दी। रायपुर जाटान पहुंचे किसान नेता जगदीप औलख ने परिजनों को सांत्वना देने के बाद कहा कि किसान आंदोलन के दौरान शनिवार को पुलिस ने बसताड़ा टोल पर लाठीचार्ज किया, जिसमें किसान सुशील को भी लाठियां लगी थीं, जिसमें किसान सुशील काजल को काफी चोटें थीं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के चलते एक किसान और शहीद हो गया है।