फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Olympic Gold Medalist Neeraj Chopra had Practice for some time in Tau Devi Lal Sports Complex of Panchkula  

ओलंपिक में स्वर्णिम सफलता: चाचा के डर ने पहुंचाया था ग्राउंड तक, अब ओलंपिक से सोना ले आए नीरज

Sun, 08 Aug 2021 11:05 AM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 08 Aug 2021 11:05 AM IST
सार

2011 से एक साल तक ताऊ देवी लाल के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में पसीना बहाने के बाद पहले ही प्रयास में नवंबर-2012 लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल में अंडर-16 कैटेगरी में 68.46 मीटर के साथ जेवेलिन थ्रो में नया रिकॉर्ड बना दिया था।

विज्ञापन
Olympic Gold Medalist Neeraj Chopra had Practice for some time in Tau Devi Lal Sports Complex of Panchkula  
पंचकूला में नीरज की जीत का जश्न मनाते कोच नसीम अहमद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का सिंथेटिक ट्रैक नीरज चोपड़ा के सुनहरे सफर का गवाह है। यहां दौड़ लगाते समय नीरज को नहीं पता था कि एक दिन यह ट्रैक उन्हें टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण तक पहुंचा देगा। यहीं से धीरे-धीरे खेल में उनका रुझान बढ़ा और 10 साल के अथक प्रयास के बाद उन्हें शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में सफलता मिली। 
विज्ञापन


2011 से एक साल तक ताऊ देवी लाल के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में पसीना बहाने के बाद पहले ही प्रयास में नवंबर-2012 लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल में अंडर-16 कैटेगरी में 68.46 मीटर के साथ जैवलिन थ्रो में नया रिकॉर्ड बना दिया था। उसके बाद से कोच नसीम अहमद नीरज चोपड़ा को ओलंपिक के लिए तैयार करने में जुट गए और नीरज को भी लगा कि वह बेहतर कर सकता है। 
विज्ञापन



जैवलिन में नीरज के पहले गुरु हैं जयवीर...
चाचा के डर से वजन कम करने को नीरज स्पोर्ट्स से जुड़े थे। नीरज ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि यही उनका कैरियर बन जाएगा। वजन ज्यादा होने से चाचा ने ग्राउंड में दौड़ और व्यायाम के लिए भेजा था। उनके डर से ग्राउंड में जाता था। धीरे-धीरे खेल में मजा आने लगा। शुरुआत में उनके गांव के जयवीर ने जैवलिन थ्रो की प्रैक्टिस करवाई। फिर घरवालों से राय लेकर एथलेक्टिस में कैरियर बनाने का फैसला किया और जयवीर के साथ पंचकूला खेल नर्सरी में दाखिला लिया था। इसके बाद वजन कम किया और फिर जैवलिन थ्रो की मदद से रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाते गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


महज चार साल के खेल कैरियर में बनाए थे पांच रिकॉर्ड
नीरज चोपड़ा ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने महज चार साल के खेल कैरियर में पांच रिकॉर्ड बनाए थे। 2012 से 2016 तक खेल के मैदान में उतरते थे तो बड़े-बड़ों के पसीने छूटने लगते हैं कि कहीं इस बार भी वह कोई नया रिकॉर्ड न बना दे और होता भी ऐसा ही था। 2012 के बाद उन्होंने फिर 2016 में 12 फरवरी को गुवाहाटी में आयोजित साउथ एशियन गेम्स के इवेंट जैवलिन थ्रो में अंडर-19 आयु वर्ग में 82.23 मीटर भाला फेंक कर नया रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले हरियाणा के राजेंद्र ने नेशनल गेम्स में केरल में यह रिकॉर्ड कायम रखा था।

चार साल में बनाए लगातार पांच रिकॉर्ड

  • फरवरी-2016 में गुवाहाटी में आयोजित एशियन गेम्स के इवेंट में जैवलिन थ्रो इवेंट में 82.23 मीटर का नया रिकॉर्ड।दिसंबर-2015 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स चैंपियनशिप में मतले का 79.20 का रिकॉर्ड तोड़कर 81.04 का नया रिकॉर्ड बनाया था।
  • 26 से 30 नवंबर, 2014 में गुजरात के विजयवाड़ा में 30वें जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप अंडर-18 आयु वर्ग में यूपी के अभिषेक का 73.40 का रिकॉर्ड तोड़कर 76.50 मीटर का नया रिकॉर्ड बनाया था।
  • लखनऊ के पीएसी ग्राउंड में 18-19 अक्तूबर, 2014 को 26वीं नॉर्थ जोन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के इवेंट जैवलिन थ्रो में ही 74.76 मीटर के साथ हरियाणा के अभिषेक का 66.90 का रिकॉर्ड तोड़ा था।
  • 2012 लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल में 68.46 मीटर के साथ जैवलिन थ्रो में रिकॉर्ड बना चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed