फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Objection on Self Financing Housing Scheme for UT Employees

यूटी कर्मचारियों को बड़ा झटका, 3930 फ्लैट्स की योजना पर लटकी तलवार, जानिए क्यों

Fri, 03 Aug 2018 10:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 03 Aug 2018 10:20 AM IST
विज्ञापन
Objection on Self Financing Housing Scheme for UT Employees
buy flat
यूटी कर्मचारियों के लिए बनाई गई सेल्फ फाइनेंस हाउसिंग स्कीम के तहत 3930 फ्लैट्स के लिए 61.5 एकड़ भूमि देने पर मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के लीगल अफेयर्स विभाग ने आपत्ति जताई है। मंत्रालय के रुख से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को केंद्र के समक्ष दो सप्ताह में पक्ष रखने और केंद्र को यूटी का पक्ष सुनने के बाद अंतिम निर्णय लेने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


वीरवार को हाईकोर्ट में यूटी कर्मियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। मित्तल ने बताया कि यूटी प्रशासन ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा था कि 61.5 एकड़ भूमि हाउसिंग बोर्ड को सौंपी जाए ताकि 3930 फ्लैट्स का निर्माण किया जा सके। इस प्रस्ताव को फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक्सपेंडेचर व इकोनॉमिक अफेयर्स विभाग ने अपनी एनओसी दे दी थी। इसके बाद इसे मिनिस्ट्री ऑफ लॉ एंड जस्टिस के लीगल अफेयर्स विभाग के पास भेजा गया। विभाग ने इस प्रस्ताव पर अपनी असहमति जता दी है। अब यह जानकारी प्रशासन को सौंप दी गई है और प्रशासन को अपना पक्ष या अपनी सफाई मंत्रालय के समक्ष रखनी होगी।
विज्ञापन


यह है मामला
मामला चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों को हाउसिंग वेलफेयर स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकान उपलब्ध करवाने से जुड़ा है। प्रशासन की ओर से इस स्कीम को आरंभ किया गया था और हाउसिंग बोर्ड को इसका जिम्मा सौंपा गया था। हाउसिंग बोर्ड ने इसके लिए योजना तैयार कर मकानों के ड्रा निकाले थे और चयनित लोगों से रकम भी ले ली थी। इसके बाद मामला लटकता चला गया और इस बीच कर्मचारियों का 57 करोड़ रुपया हाउसिंग बोर्ड के पास ही रहा। हाउसिंग बोर्ड और प्रशासन के बीच की तकरार के बाद यह कह दिया गया था कि इस स्कीम को ही रद्द कर दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये है परेशानी
चंडीगढ़ प्रशासन ने इस स्कीम के लिए दक्षिणी सेक्टरों में जमीन रिजर्व रखी हुई है। जमीन की बढ़ी कीमत के चलते यह स्कीम चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बीच ही उलझकर रह गई थी। चंडीगढ़ प्रशासन का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड ने इस स्कीम के तहत जमीन लेने के लिए प्रशासन के पास पैसे जमा नहीं करवाए, इसलिए प्रशासन ने जमीन जारी नहीं की। दूसरी तरफ चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का कहना है कि वर्षों पहले यह स्कीम आई थी, उस समय जमीन के रेट 7920 रुपये गज थी जबकि आज के समय चंडीगढ़ में जमीन का रेट 60 हजार रुपये प्रति गज है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed