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जीएमसीएच-32 में नहीं लागू हो सकता ओबीसी आरक्षण, यूटी प्रशासन ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा पत्र
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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस एडमिशन में ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने के निर्देश पर यूटी प्रशासन ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि पंजाब विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के कारण जीएमसीएच-32 में केंद्र सरकार के मानक के अनुसार ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। वहीं इस संबंध में पूर्व में मंत्रालय द्वारा जारी किए गए पत्र के पुनरावलोकन का भी आग्रह किया है।
स्वास्थ्य सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में जीएमसीएच 32 समेत चंडीगढ़ के अन्य कॉलजों में ओबीसी आरक्षण न लागू किए जाने के कारणों का बिंदुवार विवरण भी दिया गया है। वहीं कहा गया है कि इस संदर्भ में निर्णय लेने से पहले सभी मानकों का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। इस प्रक्रिया से चंडीगढ़ के अभिभावकों व छात्रों ने राहत की सांस ली है। वहीं इससे पूर्व अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार की सुबह इस संबंध में गवर्नर से मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया था। इसे गंभीरता से लेते हुए गवर्नर ने उन्हें न्यायोचित निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद दोपहर में यह पत्र जारी किया गया है।
बता दें कि चंडीगढ़ के अभिभावकों व छात्रों की इस समस्या को अमर उजाला ने लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमें यह बताया था कि अगर जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस प्रवेश में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया तो सामान्य वर्ग की सीटों पर कैची चलेगी। प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर गवर्नर के निर्देश पर यह पत्र जारी किया गया है जिससे अभिभावक बेहद खुश हैं। जीएमसीएच-32 के पूर्व सर्जन डॉ संजीव भाटिया का कहना है कि यह पत्र जारी होने के बाद चंडीगढ़ के अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। उन्हें उम्मीद है कि ओबीसी आरक्षण के मानक को लेकर आगे होने वाले निर्णय में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ न्याय किया जाएगा।
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इनसेट-
इसलिए नहीं हो सकता ओबीसी आरक्षण लागू
- संसद के अधिनियम के अनुसार तय मानक में शामिल न होना
- इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सीलेंस में शामिल ना हो, डिम्स यूनिवर्सिटी ना होना
इनसेट-
राज्य सरकार के अंतर्गत है संचालित
यूटी प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि जीएमसीएच-32 पंजाब विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इसे 1947 के स्टेट एक्ट के अनुसार बनाया गया था। 1966 में किए गए संशोधन के बाद इसे इंटरस्टेट कॉर्पोरेशन बनाया गया था। इसके लिए 50 प्रतिशत बजट राज्य सरकार प्रदान करता है। वहीं इससे जुड़े नियम कानून क्षेत्रीय सीनेट सदस्य बनाते हैं। इसलिए इसमें केंद्रीय यूनिवर्सिटी के मानकों का पालन नहीं होता। अत: यहां ओबीसी आरक्षण का मानक लागू नहीं किया जा सकता।
इनसेट-
सीधे स्वास्थ्य मंत्रालय नहीं दे सकता निर्देश
वही ओबीसी आरक्षण मामले को लेकर पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले पत्र के संदर्भ में जुटी प्रशासन ने बताया है कि राज्य सरकार के अंतर्गत शामिल होने के कारण उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय से सीधे तौर पर पत्र जारी नहीं किया जा सकता। चंडीगढ़ को केंद्रीय शिक्षा से जुड़े मामलों पर सिर्फ मानव संसाधन विकास ही पत्र जारी कर सकता है।
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स्वास्थ्य सचिव द्वारा भेजे गए पत्र में जीएमसीएच 32 समेत चंडीगढ़ के अन्य कॉलजों में ओबीसी आरक्षण न लागू किए जाने के कारणों का बिंदुवार विवरण भी दिया गया है। वहीं कहा गया है कि इस संदर्भ में निर्णय लेने से पहले सभी मानकों का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। इस प्रक्रिया से चंडीगढ़ के अभिभावकों व छात्रों ने राहत की सांस ली है। वहीं इससे पूर्व अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार की सुबह इस संबंध में गवर्नर से मुलाकात कर उन्हें अपनी चिंता से अवगत कराया था। इसे गंभीरता से लेते हुए गवर्नर ने उन्हें न्यायोचित निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद दोपहर में यह पत्र जारी किया गया है।
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बता दें कि चंडीगढ़ के अभिभावकों व छात्रों की इस समस्या को अमर उजाला ने लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमें यह बताया था कि अगर जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस प्रवेश में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया तो सामान्य वर्ग की सीटों पर कैची चलेगी। प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर गवर्नर के निर्देश पर यह पत्र जारी किया गया है जिससे अभिभावक बेहद खुश हैं। जीएमसीएच-32 के पूर्व सर्जन डॉ संजीव भाटिया का कहना है कि यह पत्र जारी होने के बाद चंडीगढ़ के अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। उन्हें उम्मीद है कि ओबीसी आरक्षण के मानक को लेकर आगे होने वाले निर्णय में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ न्याय किया जाएगा।
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इसलिए नहीं हो सकता ओबीसी आरक्षण लागू
- संसद के अधिनियम के अनुसार तय मानक में शामिल न होना
- इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सीलेंस में शामिल ना हो, डिम्स यूनिवर्सिटी ना होना
इनसेट-
राज्य सरकार के अंतर्गत है संचालित
यूटी प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए पत्र में बताया गया है कि जीएमसीएच-32 पंजाब विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इसे 1947 के स्टेट एक्ट के अनुसार बनाया गया था। 1966 में किए गए संशोधन के बाद इसे इंटरस्टेट कॉर्पोरेशन बनाया गया था। इसके लिए 50 प्रतिशत बजट राज्य सरकार प्रदान करता है। वहीं इससे जुड़े नियम कानून क्षेत्रीय सीनेट सदस्य बनाते हैं। इसलिए इसमें केंद्रीय यूनिवर्सिटी के मानकों का पालन नहीं होता। अत: यहां ओबीसी आरक्षण का मानक लागू नहीं किया जा सकता।
इनसेट-
सीधे स्वास्थ्य मंत्रालय नहीं दे सकता निर्देश
वही ओबीसी आरक्षण मामले को लेकर पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्रालय से मिले पत्र के संदर्भ में जुटी प्रशासन ने बताया है कि राज्य सरकार के अंतर्गत शामिल होने के कारण उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय से सीधे तौर पर पत्र जारी नहीं किया जा सकता। चंडीगढ़ को केंद्रीय शिक्षा से जुड़े मामलों पर सिर्फ मानव संसाधन विकास ही पत्र जारी कर सकता है।