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Chandigarh News: नर्सिंग पेशा मरीजों की सेवा के लिए समर्पित, ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत
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चंडीगढ़। नर्सों को और ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत है। समाज में जो रुतबा मिलना चाहिए था वो नर्सिंग ऑफिसर को नहीं मिला है।अंतरराष्ट्रीय नर्सेज काउंसिल ने भी थीम दिया है... हमारी नर्सेज हमारा भविष्य। यह कहना है फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन पर 12 मई को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस चंडीगढ़ के नर्सिंग ऑफिसर्स का। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को लेडी विद द लैम्प के नाम से जाना जाता है। पीजीआई में इस समय 2500 नर्सिंग ऑफिसर्स ड्यूटी दे रहे हैं। वहीं, पूरे शहर में सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में सात से आठ हजार नर्सें सेवाएं दे रही हैं। आइए जानें क्या कहती हैं नर्सिंग ऑफिसर-
नर्सिंग का योगदान निस्वार्थ, समस्याओं का समाधान हो
हमारा देश एक जंग से निकला है। नर्सिंग का योगदान ओर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जंग के मैदान में घायलों की सेवा और देखभाल करने से शुरू हुआ यह पेशा निस्वार्थ और समाज की भलाई के हेतु कार्यरत है। आज नर्सिंग स्टाफ के सामने अनेकों समस्याएं हैं। इनमें स्टाफ कम होने के कारण कार्यभार ज्यादा होना, पर्याप्त छुट्टी न मिलना और काम का दोहरा भार नर्सिंग स्टाफ उठा है।
-मंजनीक, नर्सिंग ऑफिसर, पीजीआई
नर्स के साथ बेटी की भूमिका भी निभा रहीं परमिंदरजीत
कोरोना में भी हमने 16 से 18 घंटे तक काम किया। आज भी हम अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभा रहे हैं। वह केवल मां और पत्नी होने का ही नहीं बल्कि एक बेटी होने का भी फर्ज निभा रही है। 90 साल के ससुर आर्मी से रिटायर हैं। उनकी देखभाल का जिम्मे भी है। मेरे पति पंजाब में पोस्टेड हैं। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर सुबह और दोपहर का खाना तैयार करती हूं। पिता भी आर्मी से थे। सेवा विरासत में मिली है।
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-परमिंदरजीत थिंड, नर्सिंग ऑफिसर, जीएमएसएच-16
नर्सों को और ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत
आज नर्सिंग ऑफिसर को सशक्त बनाने की जरूरत है। भारत के अंदर नर्सिंग पेशे पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, उनकी समस्याओं को दूर करते हुए उनको स्वास्थ्य तंत्र में उनका योगदान बढ़ाया जा सकता है। नर्सें देश पर आई हर आपदा में अपनी सेवाएं देती हैं। कोरोना के दौरान भी सेवाएं निभाना नहीं छोड़ा। कोरोना काल में पीजीआई की एक नर्स शहीद भी हुई थी।
एकता, र्सिंग ऑफिसर, पीजीआई
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नर्सिंग का योगदान निस्वार्थ, समस्याओं का समाधान हो
हमारा देश एक जंग से निकला है। नर्सिंग का योगदान ओर भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जंग के मैदान में घायलों की सेवा और देखभाल करने से शुरू हुआ यह पेशा निस्वार्थ और समाज की भलाई के हेतु कार्यरत है। आज नर्सिंग स्टाफ के सामने अनेकों समस्याएं हैं। इनमें स्टाफ कम होने के कारण कार्यभार ज्यादा होना, पर्याप्त छुट्टी न मिलना और काम का दोहरा भार नर्सिंग स्टाफ उठा है।
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-मंजनीक, नर्सिंग ऑफिसर, पीजीआई
नर्स के साथ बेटी की भूमिका भी निभा रहीं परमिंदरजीत
कोरोना में भी हमने 16 से 18 घंटे तक काम किया। आज भी हम अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभा रहे हैं। वह केवल मां और पत्नी होने का ही नहीं बल्कि एक बेटी होने का भी फर्ज निभा रही है। 90 साल के ससुर आर्मी से रिटायर हैं। उनकी देखभाल का जिम्मे भी है। मेरे पति पंजाब में पोस्टेड हैं। रोजाना सुबह 4 बजे उठकर सुबह और दोपहर का खाना तैयार करती हूं। पिता भी आर्मी से थे। सेवा विरासत में मिली है।
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-परमिंदरजीत थिंड, नर्सिंग ऑफिसर, जीएमएसएच-16
नर्सों को और ज्यादा सशक्त बनाने की जरूरत
आज नर्सिंग ऑफिसर को सशक्त बनाने की जरूरत है। भारत के अंदर नर्सिंग पेशे पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, उनकी समस्याओं को दूर करते हुए उनको स्वास्थ्य तंत्र में उनका योगदान बढ़ाया जा सकता है। नर्सें देश पर आई हर आपदा में अपनी सेवाएं देती हैं। कोरोना के दौरान भी सेवाएं निभाना नहीं छोड़ा। कोरोना काल में पीजीआई की एक नर्स शहीद भी हुई थी।
एकता, र्सिंग ऑफिसर, पीजीआई