डिलीवरी के 16 घंटे बाद मां को बताया कोरोना पॉजिटिव, जच्चा-बच्चा को वार्ड से बाहर निकालने का आरोप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल अस्पताल में डिलीवरी के 16 घंटे बाद गायनी विभाग के स्टाफ ने एक मां को कोरोना संक्रमित बताया। सिविल अस्पताल के गायनी वार्ड में शुक्रवार को सुबह पांच बजे एक महिला (24) ने बेटे को जन्म दिया। नवजात के जन्म के लगभग 16 घंटे के बाद रात नौ बजे गायनी विभाग की स्टाफ नर्स महिला के पास आई, उसने महिला से कहा कि वह कोरोना पॉजिटिव है। पत्नी के पास बैठे पति ने स्टाफ नर्स से महिंदर ने नर्स से सुमन की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट मांगी। नर्स ने कहा कि उसके पास कोई रिपोर्ट नहीं है। सुमन कोरोना पॉजिटिव है, इस बारे में जानकारी डॉक्टरों ने दी है।
स्टाफ नर्स ने सुमन की देखभाल कर रहे पति व उसकी मां को कहा कि वह नवजात व सुमन को यहां से ले जाएं और गुरुनानक देव अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में दाखिल करवाएं। सुमन व नवजात को गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल करवाने के लिए एंबुलेंस अस्पताल में पहुंच गई है।
यह सुनकर सुमन के पति व मां ने कहा कि ठंड की रात में वह नवजात बच्चे को लेकर कहां जाएं। वह दर्द से तड़प रही है। अस्पताल प्रबंधन ने बिना कोई तर्क दिए सुमन व नवजात बच्चे को वार्ड से बाहर निकल दिया। नवजोत को अपने आंचल में लेकर सुमन उसका पति व मां वार्ड के बाहर बैठे रहे। कई बार मौजूद स्टाफ की मिन्नतें कीं। मगर उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
रात करीब बारह बजे वह पत्नी और सुमन की मां अस्पताल से बाहर निकले। नवजात भी गोद में था। सुनसान सड़कों पर एक भी वाहन नजर नहीं आ रहा था। करीब एक किलोमीटर चलने के बाद सुमन थककर चूर हो गई। एक बजे सड़क पर आटो दिखाई दिया। बड़ी मुश्किल से उसे रामतीर्थ रोड घर की तरफ जाने के लिए राजी किया।
महिंदर के अनुसार यदि उनकी पत्नी व बच्चे को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता? अगर उनकी पत्नी कोरोना पॉजिटिव थी तो नवजात शिशु का कोविड टेस्ट क्यों नहीं किया गया। सच तो यह है कि सिविल अस्पताल के डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के लिए हमसे ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे हम अछूत हों। महिंदर ने इस घटना की शिकायत एसएमओ व डायल-104 पर कर कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टर नहीं, स्वजनों की लापरवाही : डॉ. चरणजीत
सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. चरणजीत सिंह का कहना है कि महिला के स्वजनों ने ही लापरवाही का प्रमाण दिया है। गर्भवती महिला के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद उसे गुरु नानक देव अस्पताल स्थित आइसोलेशन सेंटर में ही भेजा जाता है, क्योंकि वहां कोरोना उपचार की हर सुविधा है।
डॉक्टरों ने सुमन की डिलीवरी कर दी, क्योंकि उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी। महिंदर को इस बात की जानकारी हमने डिलीवरी से पहले ही दे दी थी कि उसकी पत्नी सुमन कोरोना पॉजिटिव है। जब उसकी कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई तो डायल-108 एंबुलेंस भी मंगवा दी, ताकि उसे गुरु नानक देव अस्पताल पहुंचाया जा सके, मगर परिवार वाले कह रहे थे कि हम वहां नहीं जाना चाहते।
डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोरोना पॉजिटिव सुमन को गायनी वार्ड में नहीं रख सकते थे। यहां 50 से अधिक गर्भवती महिलाएं उपचाराधीन हैं। इसलिए नियमानुसार ही सुमन को गुरु नानक देव अस्पताल भेजा जा रहा था। उसके नवजात शिशु का सैंपल भी गुरु नानक देव अस्पताल में लिया जाना था।