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केंद्र की योजना पर बैंकों की बेरुखी: चंडीगढ़ में दम तोड़ रही प्रधानमंत्री की मुद्रा स्कीम, चार साल में एक तिहाई हुए लाभार्थी

Thu, 24 Mar 2022 02:42 PM IST
ajay kumar रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 24 Mar 2022 02:42 PM IST
सार

8 अप्रैल 2015 को मोदी सरकार ने मुद्रा योजना की शुरुआत की थी। इसमें तीन श्रेणियों में कर्ज देने का प्रावधान है।

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Number of beneficiary of Mudra Yojana decreased in Chandigarh
मुद्रा योजना - फोटो : https://www.mudra.org.in/

विस्तार

मलोया में फोटो और गिफ्ट की दुकान चलाने वाले राजन कुमार (27 वर्ष) को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कुछ पैसों की जरूरत थी। केंद्र सरकार की ‘मुद्रा योजना’ के तहत उन्होंने एक नजदीकी बैंक में लोन का पता किया लेकिन उन्हें बैंक ने लोन देने से मना कर दिया। राजन कुमार अकेले नहीं हैं, शहर में ऐसे सैकड़ों लोग हैं, जिन्हें मुद्रा योजना के तहत लोन देने से मना किया जा रहा है। यही कारण है कि चंडीगढ़ में इस योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले चार वर्षों में तेजी से गिरी है।

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ऐसा नहीं है कि इस योजना के तहत लोन लेने वालों की संख्या कम है। जरूरतमंदों को जानकारी और जागरूकता के अभाव में इस योजना से वंचित किया जाता है। कुछ को ब्याज और लोन का भय दिखाया जाता है तो कुछ के प्रोजेक्ट और व्यवसाय को कमजोर बताकर लोन देने से इनकार किया जाता है। राजन के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनकी लोन की अर्जी को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उनका व्यवसाय योजना के नियमों के अंदर नहीं आता। राजन बताते हैं कि बैंक के मना करने पर उन्होंने एक निजी फाइनेंसर से अधिक ब्याज पर पैसे उधार लिए और अपने व्यवसाय में लगाया। 
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आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018-19 में चंडीगढ़ में 30015 लाभार्थियों को योजना के तहत कुल 4.12 करोड़ का लोन मिला था लेकिन वर्ष 2021-22 (21 मार्च तक) में यह संख्या घटकर 11470 पर पहुंच गई है। इन सभी को 1.72 करोड़ रुपये का ही लोन मिल सका। इनमें भी बैंक तरुण लोन (5 लाख से 10 लाख रुपये तक) देने से बच रहे हैं। सबसे ज्यादा शिशु लोन (50000 रुपये तक) दिया गया है। 
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छोटे व्यवसायों के लिए लोन लेना आसान नहीं 
8 अप्रैल 2015 को मोदी सरकार ने मुद्रा योजना की शुरुआत की थी। इसमें तीन श्रेणियों में कर्ज देने का प्रावधान है। पहला, शिशु कर्ज (50000 रुपये तक), दूसरा, किशोर कर्ज (50000 से 5 लाख तक) और तीसरा तरुण कर्ज (5 लाख से 10 लाख रुपये तक)। इस योजना के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम कारोबार के लिए लिए जाने वाले कर्ज को बिना किसी कोलैटरल सिक्योरिटी के तहत देने का प्रावधान है। हालांकि जमीन पर जाने पर पता चलता है कि इस योजना के तहत छोटे व्यवसायों के लिए लोन लेना उतना आसान नहीं है, जितना सरकार प्रचार करती है। छोटे व्यवसायियों से ऐसे दस्तावेजों की मांग कर दी जाती है, जो वो देने में असमर्थ होते हैं। 


क्या है ब्याज दर और कैसे कर सकते हैं आवेदन
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कोई निश्चित ब्याज दर नहीं है। विभिन्न बैंक मुद्रा लोन के लिए अलग ब्याज दर वसूल सकते हैं। लोन लेने वाले के कारोबार की प्रकृति और उससे जुड़े जोखिम के आधार पर भी ब्याज दर निर्भर करती है। आम तौर पर ब्याज दर 12% है। लोन के लिए सरकारी या बैंक की शाखा में आवेदन देना होगा। अगर आप खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो आपको मकान के मालिकाना हक या किराए के दस्तावेज, काम से जुड़ी जानकारी, आधार, पैन नंबर सहित कई अन्य दस्तावेज देने होंगे। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए मुद्रा योजना के तहत लोन के लिए लोगों को जागरूक करते हैं ताकि वो इसका लाभ उठाएं और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करें। इसके लिए नियमित शिविर लगाए जाते हैं और लोगों को योजना के बारे में विस्तार से बताया जाता है। योजना के तहत पात्र आवेदनकर्ता को औपचारिकताएं पूर्ण करने पर लोन लेने में किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं होती है। कई बार लोन लेने वाला व्यक्ति पात्रता मापदंड को पूरा नहीं करता, जिसकी वजह से उसे दिक्कत हो सकती है। - दीपक कुमार शर्मा, महासचिव, भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ, चंडीगढ़ मंडल

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