{"_id":"5fcbf4d69bc93972cd161702","slug":"now-36-uk-mps-openly-support-punjab-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब ब्रिटेन के 36 सांसदों ने पंजाब के किसानों का किया खुलकर समर्थन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब ब्रिटेन के 36 सांसदों ने पंजाब के किसानों का किया खुलकर समर्थन
Sun, 06 Dec 2020 02:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 06 Dec 2020 02:30 AM IST
सार
- कनाडा के बाद अब यूके के सांसद सामने आए
- सांसदों ने राष्ट्रमंडल सचिव डोमिनिक राब को लिखा पत्र
विज्ञापन
किसान आंदोलन
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दिल्ली में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में ब्रिटेन के 36 सासंद खुलकर सामने आए हैं। यूके की लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी के नेतृत्व में 36 ब्रिटिश सांसदों ने राष्ट्रमंडल सचिव डोमिनिक राब को चिट्ठी लिखकर कहा है कि वह भारत में किसानों के चल रहे संघर्ष पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात कर आधिकारिक जानकारी हासिल करें।
विज्ञापन
भारत में चल रहे प्रदर्शन से यूके के पंजाबियों में भी आक्रोश है और वह प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए भारत सरकार को ब्रिटिश पंजाबियों से भी बातचीत करनी चाहिए। इस पत्र को ब्रिटिश सिख लेबर सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने ड्राफ्ट किया है। इस पर लेबर पार्टी के जालंधर मूल के सांसद वरिंदर शर्मा, सीमा मल्होत्रा और वैलेरी वाज के साथ-साथ अन्य लेबर लीडर जेरेमी कॉर्बिन सहित अन्य भारतीय मूल के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
विज्ञापन
सांसदों के पत्र में मंत्री से आग्रह है कि वे पंजाब में बिगड़ती स्थिति पर चर्चा करने के लिए उनके साथ एक तत्काल बैठक करें। कहा गया है कि यह ब्रिटेन में सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है, हालांकि यह अन्य भारतीय राज्यों पर भी भारी पड़ता है। कई ब्रिटिश सिखों और पंजाबियों ने अपने सांसदों के साथ इस मामले को उठाया, क्योंकि वह पंजाब में परिवार के सदस्यों और पैतृक भूमि से सीधे प्रभावित हैं।
विज्ञापन
पहले पगड़ीधारी सांसद तनमनजीत सिंह ने कहा कि पिछले महीने कई सांसदों ने आपको (राष्ट्रमंडल सचिव) और लंदन में भारतीय उच्चायोग को किसानों और जो खेती पर निर्भर हैं, उनके शोषण को लेकर तीन नए भारतीय कानूनों के प्रभावों के बारे में लिखा था। कनाडा के बाद यूके दूसरा ऐसा देश है जो भारत में चल रहे किसानों के आंदोलन में खुलकर सामने आया है।