उपन्यासकार दलीप कौर टिवाणा का पद्मश्री लौटाने का ऐलान
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साहित्यकारों पर हो रहे हमलों से चिंतित पंजाबी उपन्यासकार और प्रख्यात लेखिका डॉ. दलीप कौर टिवाणा ने अपना पद्मश्री सम्मान लौटाने का ऐलान किया।
इसके अलावा पंजाबी के दो अन्य साहित्यकारों ने भी भारतीय साहित्य अकादमी अवार्ड वापस करने का फैसला किया है। इनमें साहित्यकार मोहन भंडारी और परगट सिंह सतौज के नाम शामिल हैं।
साहित्य जगत के सर्वोच्च सरस्वती सम्मान, पंजाब रतन और साहित्य अकादमी अवार्ड समेत कई सम्मान हासिल कर चुकीं डॉ. दलीप कौर टिवाणा ने पद्मश्री सम्मान लौटाने का फैसला भारी मन से किया है।
कई और लेखकों ने की अवार्ड लौटाने की घोषणा
तमाम अपील, गुहार और विरोध के बावजूद साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वरिष्ठ पंजाबी लेखिका दलीप कौर टिवाणा ने अपना पद्म श्री सम्मान और पंजाबी लेखकों मोहन भंडारी, परगट सिंह सतौज, असमी लेखक होमेन बोरगोहायन, निरुपमा बोरगोहायन, बंगाली कवियत्री मंदक्रांता सेन तथा कन्नड़ साहित्यकार प्रोफेसर रहमत तरीकेरी ने साहित्य अकादमी पुरस्कार वापस करने की घोषणा की।
हिंदी अनुवादक चमन लाल ने भी अकादमी को अपना अनुवाद पुरस्कार लौटा दिया है। इस बीच पूरे मुद्दे पर साहित्य समाज ही दो धड़ों में बंट गया है। चेतन भगत ने लेखकों के पुरस्कार लौटाने के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
वहीं साहित्यकारों के साथ खड़े होने के कारण सलमान रुश्दी को कई लोगों की आलोचना झेलनी पड़ी है। उड़िया लेखक राजेंद्र किशोर पांडा ने अकादमी से आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
रुश्दी भी अवार्ड लौटाने वालों के समर्थन में आए
दूसरी ओर सलमान रुश्दी का पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों के समर्थन में खड़े होना बहुत लोगों को पसंद नहीं आया है। रुश्दी के समर्थन वाले ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ संदेशों की बाढ़ आ गई।
बुकर पुरस्कार विजेता ने भी अपना विरोध करने वालों को बेहद आक्रामक अंदाज में मोदी का चमचा कहकर जवाब दिया है। एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन में जानलेवा हिंसा का प्रवेश हो गया है, जो कि नई चीज है।
उधर चेतन भगत ने पुरस्कार लौटाने को राजनीति करार दिया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘पुरस्कार स्वीकार कर फिर उसे लौटाना पुरस्कार तथा ज्यूरी का अपमान है। यह दिखावा और राजनीति है।’
डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने मामले पर सरकार की चुप्पी की निंदा करते हुए कहा है कि यह लापरवाह रवैया इतिहास का काला अध्याय और अन्याय है।
मोदी के चमचे आ गए। आपकी जानकारी के लिए चमचों, मैं किसी भारतीय राजनीति पार्टी का समर्थन नहीं करता। मैं बोलने की स्वतंत्रता पर सभी तरह के हमलों के खिलाफ हूं। आजादी ही मेरी एकमात्र पार्टी है।
- सलमान रुश्दी, विरोधियों को ट्विटर पर जवाब
सरकार का लेखकों की तरफ रुख नकारात्मक है। लेखक मारे जा रहे हैं, कलम को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे माहौल में सम्मान का बोझ उठाया नहीं जा सकता।
- मोहन भंडारी, पंजाबी लेखक
जिस देश में लेखकों का कत्ल हो रहा हो, फिरकापरस्ती को शह मिल रही हो और कट्टरता हावी हो, वहां सम्मान के कोई मायने नहीं रह जाते।
- परगट सिंह सतौज, पंजाबी लेखक
पुरस्कार स्वीकार कर फिर उसे लौटाना पुरस्कार तथा ज्यूरी का अपमान है। यह दिखावा और राजनीति है। यदि कोई सरकार को पसंद नहीं करता तो क्या वह अपना पासपोर्ट या सरकारी कॉलेज की डिग्री वापस कर देगा। केवल पुरस्कार ही क्यों।
- चेतन भगत